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पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जनमत तैयार करने के संकल्प के साथ CAAJ कन्वेंशन का समापन

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दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में 22-23 सितंबर को आयोजित कमेटी अगेन्स्ट असॉल्ट ऑन जर्नलिज़्म (CAAJ) सम्मेलन पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ देश भर में जनमत तैयार करने और इस लिहाज़ से एक प्रभावी तंत्र विकसित करने के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ। इस दो दिवसीय कन्वेंशन को प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और अंतरराष्ट्रीय साख वाले पत्रकार संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ (CPJ) का समर्थन हासिल हुआ। इसके अलावा 30 से ज़्यादा पत्रकारिता संस्थानों और जनसंगठनों इसके आयोजन में शिरकत की।

दो दिनों तक चार सत्रों में पत्रकारिता और पत्रकारों पर गहराए संकट पर विस्तार से चर्चा की गई। तमाम शहीद पत्रकारों के परिजनों और जेल जाने वाले या नौकरी गँवाने वाले पत्रकारों ने सम्मेलन में दर्द बयान किया। देश के हर कोने से पत्रकार इस सम्मेलन में शामिल होने पहुँचे थे। समापन सत्र में चारों सत्रों का सार प्रस्तुत किया गया और एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसे सम्मेन के प्रतिनिधियों ने ध्वनिमत से पारित किया।

पढ़ें यह प्रस्ताव जो पारित हुआ–

देश भर से आए पत्रकारों के दो दिन के सम्मलेन से यह तथ्य और भी स्पष्ट हुआ है कि आज उन पत्रकारों के सामने अत्यंत ख़तरनाक स्थिति पैदा हो गई है जो सत्ता कि जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी क़लम का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के पत्रकारों की हत्यायें हुईं, उन पर हमले हुए और सरकारी तंत्र द्वारा उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया गया है। सरकार  चाहे जिस पार्टी की हो हालत कमोबेश एक जैसे हैं। राजनेता माफिया और पुलिस के नापाक गठजोड़ ने छोटे शहरों, कस्बों और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए स्थिति और भी गंभीर है।

यह भी उल्लेखनीय है कि पत्रकारों के हितों की रक्षा करने वाले लगभग सभी संगठन और संस्थाएँ निष्क्रिय हो गई हैं। उनके सरोकार बदल गए हैं। अगर कोई पत्रकार अपने उत्पीड़न के ख़िलाफ़ अपने संस्थान में  शिकायत दर्ज करता है तो कोई नतीजा नहीं निकलता, न ही बिरादरी का समुचित समर्थन प्राप्त होता है। ऐसी स्थिति में यह सदन एक ऐसे संगठन की ज़रूरत महसूस करता है जो न केवल पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सके, बल्कि सवाल पूछने की लोकतांत्रिक संस्कृति को ज़िंदा रख सके। यह संगठन देश के विभिन्न राज्यों और विभिन्न भाषाओं में काम कर रहे पत्रकारों के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जनमत तैयार  करेगा।

यह सम्मेलन इस पहल को जारी रखते हुए कमेटी के विस्तार के सभी प्रयास किए जाने का दायित्व आयोजन समिति को सौंपता है। इस विस्तार की प्रक्रिया में प्रांतीय, भाषाई और जेंडर प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी होगा विस्तृत कमेटी को घटनाओं और मुद्दों के संकलन व उन पर उपयुक्त कार्ययोजनाएँ प्रस्तावित करने का एक तंत्र विकसित करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।

 

 

दो दिन में जो हुआ, उकी रिपोर्ट नीचे है। सत्र का लिंक भी है पढ़ें भी और देखें भी….

22 सितंबर को यह सम्मेलन देशबंधु के एडिटर इन चीफ़ ललित सुरजन के बीज भाषण से शुरू हुआ था। उद्घाटन सत्र में मशहूर अभिनेता प्रकाश राज ने भी संबोधित किया था। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा ने अध्यक्षता की थी जबकि संचालक की भूमिका में मीडिया विजिल के संस्थापक संपादक डॉ.पंकज श्रीवास्तव थे। सीपीजे की ओर से उसके भारतीय प्रतिनिधि कुणाल मजूमदार ने देश-विदेश में पत्रकारों की स्थित पर पावर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन दिया।

 

पहले दिन का पहले सत्र का विषय था- ‘मर्डर एंड फीज़िकल असॉल्ट।’ इसे गंगा देवी, पैट्रीशिया मुख़िम, आशा रंजन, जलील राठौर और नितिन गुप्ता ने संबोधित किया। अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार संजय पारिख ने की और संचालन किया हस्तक्षेप.कॉम के संपादक अमलेंदु उपाध्याय ने।

पहले दिन के दूसरे सत्र का विषय था-‘ट्रोल्स, थ्रेट एंड इंटीमिडेशन।’ इसे मशहूर पत्रकार रवीश कुमार और नेहा दीक्षित ने संबोधित किया। अध्यक्षता मुंबई से आए निर्भीक पत्रकार निखिल वागले ने की और संचालन किया संदीप राउज़ी ने।

23 सितंबर को पहले सत्र का विषय था ‘मिस यूज़ ऑफ लॉ:स्टेट मशीनरी एंड डिफेमेशन।‘ वरिष्ठ पत्रकार सुमित चक्रवर्ती की अध्यक्षता में हुए इस सत्र को शाइना के.के., कमल शुक्ला, रचना खैरा, आलोका, प्रभात सिंह, संतोष यादव,सिद्धार्थ कलहंस, आवेश तिवारी, शिवदास और संतोष यादव ने संबोधित किया। संचालन किया मीडिया विजिल के कार्यकारी संपादक अभिषेक श्रीवास्तव ने।

अंतिम सत्र का विषय था-सर्विलांस एंड सेंशरशिप जिसकी अध्यक्षता मशहूर पत्रकार हरतोष सिंह बल ने की। इसे संबोधित किया जनसत्ता के पूर्व संपादक ओम थानवी, पुण्य प्रसून वाजपेयी, जोशी जोज़फ़, विश्वदीपक, मनोज सिंह, सीमा आज़ाद और शिवेंद्र ने। संचालन किया चर्चित पत्रकार और लेखक अनिल यादव ने।

अंत में समापन सत्र हुआ अनिल चौधरी की अध्यक्षता में। विभिन्न सत्रों में बतौर मॉडरेटर भूमिका निभाने वाले पैमिला फिलीपोस, अटल तिवारी, नित्यानंद गायेन, अनुषा पॉल, ऋचा ने रिपोर्ट पेश की। नेपाल से आए पत्रकार नरेश ज्ञवाली ने भी इस सत्र को संबोधित किया और तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने सम्मेलन के सामने वह प्रस्ताव पढ़ा जिसे आप ऊपर पढ़ चुके हैं और जिसे संकल्प बतौर पारित किया गया।