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बैंक हड़ताल : सरकार की नीतियों से घाटा तो कर्मचारी क्यों खाए वेतन का चाँटा !

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सत्येंद्र पीएस

 

देश के सरकारी बैंक बर्बादी की कगार पर हैं। सरकार ने कर्मचारियों का वेतन 2012 के बाद अब 2 प्रतिशत बढाने का प्रस्ताव दिया है जिससे नाराज कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस सरकार के वश की बात नहीं लगती कि वह शासन प्रशासन सत्ता चला पाएगी। लोग सरकार को लूटकर निकल ले रहे हैं। सरकार मुंह ताक रही है। उसकी गाज आम जनता और बैंक के बाबुओं पर गिर रही है।

खोजिए कि आपका बैंक कितने घाटे में गया? बैंकों का यह हाल तब है जब कई राज्य सरकारों ने कृषि ऋण माफ कर कृषि NPA से बैंकों को मुक्त किया है!


-स्टेट बैंक ने अपनी चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2018 के नतीजे घोषित किए. बैंक ने बताया कि इन तीन महीनों के दौरान उसे 7,718 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. भारत के बैंकिंग इतिहास में ये दूसरा सबसे बड़ा घाटा है.

-पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी बैलेंस शीट दिखाते हुए कहा कि जनवरी-मार्च तिमाही में उसे 13,417 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है.

-वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में इलाहाबाद बैंक को 1,264 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में इलाहाबाद बैंक को 75.3 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

– वित्त वर्ष 2017-18 की 31 मार्च 2018 को समाप्त तिमाही में एकल आधार पर यूको बैंक का घाटा बढ़कर 2,134.36 करोड़ रुपये हो गया.

-चौथी तिमाही में केनरा बैंक को 4,860 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तो देना बैंक को इसी अवधि में 1,225.42 करोड़ रुपये घाटा हुआ।

-सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक का शुद्ध घाटा मार्च तिमाही में बढ़कर 1,225.42 करोड़ रुपये हो गया.

-सार्वजनिक क्षेत्र के ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) शुद्ध घाटा मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में 1,650.22 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.


(सत्येंद्र पीएस, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)