Home ख़बर JNU पर हमला! आरोप ABVP पर! विरोध में शांति मार्च में शामिल...

JNU पर हमला! आरोप ABVP पर! विरोध में शांति मार्च में शामिल हुए हज़ारों !

SHARE

 

न..ऐसा जेएनयूु में कभी नहीं हुआ। तमाम संगठनों के बीच प्रतिद्वंद्विता रही, लेकिन चुनावी जीत-हार को गरिमा के साथ स्वीकार करना ही जेएनयू की परंपरा रही है। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया की मिसाल दी जाती रही है। वहाँ विजयी प्रत्याशी पर हमला किया जाए, उसे जान से मारने की धमकी दी जाए यह हैरान करने वाला है।

यह कुछ छात्रनेताओं या आम छात्रों पर नहीं, जेएनयू पर हमला है!

जी हाँ, आरएसएस के आनुषंगिक संगठन एबीवीपी पर यही आरोप लगा है कि उसने छात्रसंघ चुनाव में वाम छात्र संगठनों से मिली करारी हार से बौखलाकर जेएनयू की महान परंपराओं को तार-तार कर दिया।आम छात्रों और छात्रसंघ पदाधिकारियों को पीटा। जेएनयू के हज़ारों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने सोेमवार शाम कैंपस में विशाल शांति मार्च निकालकर इसका जवाब दिया। दिलचस्प बात यह रही कि एबीवीपी पर उसी के अंदाज़ में पलटवार की हर सोच को वामपंथी छात्रसंगठनों ने नकारा और गाँधी का रास्ता चुना। अंदेशा यह भी था कि एबीवीपी मारपीट की आड़ में ‘साइन डाई’ कराना चाहती है। उस ने मतगणना के दौरान भी तोड़फोड़ की थी जिसके तहत नतीजा आने में काफ़ी विलंब हुआ।

हालाँकि एबीवीपी ने भी आरोप लगाया है कि उसके सदस्यों को वामपंथी छात्रों ने पीटा है।

बहरहाल, शुरुआत समझने के लिए जेएनयू छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एन.साई बालाजी की यह फ़ेसबुक पोस्ट पढ़िए जो उन्होंने 17 सितंबर क भोर में लिखा, बीती रात की घटना का हवाला देते हुए। उनके मुताबिक हार से बौखलाए एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा के नेतृत्व में गुंडों ने पवन मीणा समेत कई छात्रों को पीटा। उन्हें ख़बर मिली तो वे बचाने पहुँचे। उन पर और निर्वतमान अध्यक्ष गीता कुमारी पर हमला हुआ। जान से मारने की धमकी दी गई। उन लोगों ने पीसीआर वैन बुलाई, उसे भी एबीवीपी के सदस्यों ने रोका। इस सिलसिले में कई वीडियो भी मोौजूद हैं।

 

 

जेएनयू छात्रसंघ के निर्वाचित अध्यक्ष एन.साई.बाला जी

घटना की एक गवाह जेएनयू की छात्र अपेक्षा प्रियदर्शिनी भी थीं जिन्होंने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिये बताया कि ‘तड़के तीन बजे के आस पास कैंपस में एबीवीपी के गुंडों ने उत्पात मचाया।’ यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ।

 

सोशल मीडिया के ज़रिये यह ख़बर फैलने लगी..

 


दिन चढ़ने के साथ जेएनयू और जेएनयू के शुभचिंतकों की ज़बान पर यही ख़बर थी।  इसके ख़िलाफ़ शाम को शांति मार्च निकालने का ऐलान किया गया। शाम को हज़ारों छात्र, शिक्षक और कर्मचारी इस मार्च में शामिल हुए। जेएनयू के हर तबके की ओर से हिंसा और गुंडागर्दी की इस संस्कृति का विरोध किया गया।

 

दिलचस्प बात ये थी कि तमाम घटनाओं पर मूक दर्शक बना रहा जेएनयू प्रशासन शांति मार्च की ख़बर से चौकन्ना हो उठा। उसने तुरंतर सभी किस्म के धरना प्रदर्शन रोकने की नोटिस निकाल दी।

 

बहरहाल, एबीवीपी के तेवर देखते हुए मामला जल्दी ठंडा पड़ेगा, इसमें शक है। कहा जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन एबीवीपी के  इशारे पर काम कर रहा है। जिन्हें वह लगातार देशद्रोही बताने का अभियान चला रहा है, उनको जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में लगातार जीत मिले, इसे पचाना उसके लिए मुश्किल हो रहा है।

 



 

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.