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देवरिया में सौ ग़रीबों के घरों पर चला योगी का बुलडोज़र, विरोध करने पर 20 हिरासत में!

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देवरिया। देवरिया जिला प्रशासन ने आज डीएम आवास के पीछे राघवनगर मुहल्ले में पाच दशक से रह रहे 100 गरीब मजदूर परिवारों को उजाड़ दिया। सुबह पांच बजे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चारो तरफ बैरीकेडिंग कर इस झुग्गी को बुलडोजर लगाकर उजाड़ दिया गया। इस झुग्गी में ऐपवा का कार्यालय और निर्माण मजदूर यूनियन का दफ्तर भी था, जिसे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

प्रशासन की इस कार्यवाही का विरोध करने पर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की जिलाध्यक्ष गीता पांडेय सहित दो दर्जन गरीबों को हिरासत में ले लिया गया। विरोध प्रदर्शन की आशंका मे ऐपवा नेता गीता पांडेय को हिरासत में लेने के बाद पहले उन्हें महिला थाने ले जाया गया और उसके बाद उन्हें 30 किलोमीटर दूर सलेमपुर कोतवाली भेज दिया गया। देर शाम तक हिरासत में लिए गए गरीबों और ऐपवा नेता गीता पांडेय थाने में ही थे और उन्हें रिहा नहीं किया गया था।

ऐपवा नेता गीता पांडेय जिला बार काउसिंल की सदस्य भी हैं। उन्हें हिरासत में लिए जाने का अधिवक्ताओं ने विरोध किया और इस सम्बन्ध में डीएम से भी मिले।

गीता पांडेय को सलेमपुर कोतवाली में हिरासत में रखे जाने की जानकारी मिलने पर विभिन्न संगठनों के दर्जनों नेता कोतवाली पहुंच गए। इनमें पूर्वांचल स्वराज आंदोलन के नेता शिवाजी राय, जर्नादन शाही, सामाजिक कार्यकर्ता चतुरानन ओझा, भाकपा माले नेता रामकिशोकर वर्मा आदि के नाम उल्लेखनीय है।

प्रशासन की इस कार्यवाही का नेतृत्व खुद डीएम अमित किशोर ने किया। वह खुद सफेद रंग की ट्रेक सूट पहने झुग्गी झोपड़ी की ध्वस्तीकरण की कार्यवाही संचालित करते देखे गए।

डीएम आवास के पीछे राघवनगर मुहल्ले में करीब ढाई एकड़ भूमि पर 100 गरीब मजदूर परिवार पांच दशक से अधिक समय से बसे हुए थे। इनमें से अधिकतर ठेला-खोमचा लगाकर और दिहाड़ी कर अपना जीवन यापन करते थे। यहां बसे लोगों में एक दर्जन नगर निगम देवरिया में संविदा पर सफाई कर्मचारी भी हैं। इसी जगह ऐपवा और निर्माण मजदूर यूनियन का दफतर भी था। सभी लोगों के घर झोपड़ी के थे।

इस जमीन पर लोक निर्माण विभाग अपना दावा करता रहा था। इस सम्बन्ध में उसने कई बार नोटिस भी जारी किया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद इस झुग्गी को उजाड़ने का प्रयास तेज हो गया। पिछले एक वर्ष के भीतर तीन बार प्रशासनिक अमला झुग्गी को उजाड़ने पहुंचे लेकिन झुग्गीवासियों के प्रतिरोध के कारण उन्हें वापस लौटना पडा।

आठ महीने पहले लोकनिर्माण विभाग ने 95 लोगों को नोटिस भेजते हुए इस जगह को खाली करने को कहा। इसके खिलाफ भाकपा माले नेता रामकिशोर वर्मा अदालत में भी गए जिस पर अदालत की ओर से डीएम और लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी की गई थी। इसके बावजूद प्रशासन ने झुग्गी को उजाड़ने का प्रयास जारी रखा। प्रशासन की पहला पर यहां रह रहे संविदा सफाई कर्मचारियों का वेतन नगर निगम द्वारा रोक दिया गया और उन्हें कहा गया कि उन्हें तभी वेतन मिलेगा जब वे इस जगह को खाली कर देंगे। इस जगह को खाली कराने में स्थानीय भाजपा पार्षद की विशेष रूचि थी और वह बार-बार प्रशासन को इस सम्बन्ध में ज्ञापन देते रहते थे।

आज सुबह पांच बजे भारी पुलिस बल ने झुग्गी को चारो तरफ से घेर लिया। इसके बाद बुलडोजर और जेसीबी मशीन से गरीबों की झोपड़िया उजाड़ी जाने लगी। झुग्गी तक पहुंचने वाली सभी रास्तों को बैरीकेडिंग कर बंद कर दिया गया था और उस ओर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा था। झुग्गी को उजाड़ने की जानकारी जब ऐपवा की जिलाध्यक्ष गीता पांडेय को मिली तो वह मौके पर पहुंची और प्रशासन की कार्यवाही का विरोध करने लगीं। उनका कहना था कि झुग्गीवासियों को पुनर्वासित किए बिना उन्हें नहीं हटाया जा सकता। पुलिस ने उनके सहित दो दर्जन झुग्गीवासियों को हिरासत में ले लिया। गीता पांडेय को महिला थाने ले जाया गया। कुछ देर बाद उन्हें सलेमपुर कोतवाली भेज दिया गया। हिरासत में लिए गए अन्य झुग्गीवासियों को देवरिया कोतवाली में रखा गया है। झुग्गी उजाड़ने के बाद प्रशासन ने वहां से आनन-फानन में मलबा हटा दिया.

भाकपा माले नेता रामकिशोर वर्मा और प्रेमलता पांडेय ने कहा कि देवरिया में कुछ महीनों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रशासन लगातार गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई कर रहा है जबकि दबंगों ने तमाम जगहों पर ज़मीन कब्ज़ा कर रखा है लेकिन उस ओर शासन-प्रशासन दोनों ने आंखें बंद कर रखी हैं। इस अन्याय का विरोध और गिरफ्तार लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर तीव्र आन्दोलन किया जायेगा.

गोरखपुर न्यूज़ लाइन से साभार।

 



 

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