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ठेके पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों पर ऐक्टू का दिल्ली में प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन के दौरान एक्टू नेताओं ने कहा कि दिल्ली के तमाम स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत अगर कोई सबसे शोषित वर्ग है तो वो स्कीम वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का ही है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से सफाई कार्य से लेकर ऑफिस और वार्ड-ओपीडी के कई ज़रूरी कार्य लिए जाते हैं, पर वेतन और सुविधाएं परमानेंट कर्मचारियों के बराबर नहीं दी जाती। हर बार कॉन्ट्रैक्ट बदलने के वक़्त कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने की कवायद तेज़ हो जाती है। कई बार ठेकेदार और सरकारी अफसरों द्वारा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से अवैध वसूली तक की जाती है। लेडी हार्डिंग के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद काम पर दोबारा लौट पाए हैं।

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देश की राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र में ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों ने अपनी कई मांगों को लेकर आज लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और कलावती सरन अस्पताल के बाहर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। ऐक्टू के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन के दौरान ठेका कर्मचारियों ने एक सुर में कहा कि सरकार हमें फूल बरसाकर फुसला नहीं सकती।

दिल्ली ऐक्टू के सचिव सूर्य प्रकाश ने कहा कि जहां एक ओर कोरोना काल में भी संघी-भाजपाइयों को उन्मादी जुलूस निकालने की छूट है, वही दूसरी ओर ‘कोरोना वारिअर्स’ कहे जाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का अपनी जायज़ मांगों को लेकर आवाज़ उठाना भी गुनाह हो गया है। प्रबंधन-पुलिस की ओर से तमाम खींचतान के बावजूद ऐक्टू कार्यकर्ताओं ने लेडी हार्डिंग और कलावती सरन अस्पताल के परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि ऐक्टू द्वारा आज देशभर में कई जगहों पर मजदूर अधिकारों पर हो रहे हमलों और निजीकरण-ठेकेदारी के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। दिल्ली के बीचोबीच स्थित ‘लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और कलावती सरन अस्पताल’ के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने इसी क्रम में अपनी मांगों के साथ अस्पताल परिसर के बाहर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शन में कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर आवाज़ उठाई गई और देशभर में चल रहे केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के ‘देश बचाओ’ अभियान के साथ एकजुटता जाहिर की गई।

प्रबंधन-ठेकेदार की सांठगांठ से परेशान हैं स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारी

प्रदर्शन के दौरान एक्टू नेताओं ने कहा कि दिल्ली के तमाम स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत अगर कोई सबसे शोषित वर्ग है तो वो स्कीम वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का ही है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से सफाई कार्य से लेकर ऑफिस और वार्ड-ओपीडी के कई ज़रूरी कार्य लिए जाते हैं, पर वेतन और सुविधाएं परमानेंट कर्मचारियों के बराबर नहीं दी जाती। हर बार कॉन्ट्रैक्ट बदलने के वक़्त कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने की कवायद तेज़ हो जाती है। कई बार ठेकेदार और सरकारी अफसरों द्वारा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से अवैध वसूली तक की जाती है।

लेडी हार्डिंग के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद काम पर दोबारा लौट पाए हैं। मजदूरों के केस की पैरवी करने वाले अधिवक्ता गुंजन सिंह द्वारा इन कर्मचारियों का केस लड़ा गया. इससे पहले भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए कई केस लड़ चुके गुंजन सिंह का मानना है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों को अपने अधिकारों के लिए काफी कठिन कानूनी लड़ाई और आन्दोलन के रास्ते से गुजरना पड़ता है।

ऐक्टू नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में भी दिल्ली के कई अस्पतालों में कर्मचारियों के वेतन और सुरक्षा को लेकर, केंद्र व राज्य- दोनों ही सरकारों का रवैया ठीक नहीं रहा है।

 

मजदूर विरोधी नीतियों और निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी विरोध

प्रदर्शन में मौजूद ऐक्टू के दिल्ली राज्य सचिव सूर्य प्रकाश ने बताया कि आगामी 9 अगस्त को केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों द्वारा ‘जेल भरो’ आन्दोलन किया जाएगा। अगस्त के शुरुआत से ही अलग-अलग सेक्टरों के मजदूर-कर्मचारियों के बीच कैंपेन लगातार जारी है। मोदी सरकार कोरोना से लड़ने की जगह आम जनता को धर्म-सम्प्रदाय के झगड़े में झोंककर उनके अधिकार छीन लेना चाहती है। श्रम कानूनों को तेज़ी से खत्म किया जा रहा है, कई गैर-भाजपा शासित प्रदेशों में भी श्रम कानूनों पर हमले जारी हैं। उन्होंने कहा कि ऐक्टू दिल्ली के तमाम न्याय-पसंद और लोकतांत्रिक लोगों से अपील करता है कि जनता पर हो रहे हमलों के खिलाफ मजबूती से खड़े हों और देश बचाने के संघर्ष में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।


 ऐक्टू दिल्ली सचिव, सूर्य प्रकाश द्वारा जारी विज्ञप्ति पर आधारित

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