Home ख़बर अमेरिका में नस्लवादी हमले के शिकार स्वामीजी के समर्थन में भारतीय मुसलमान

अमेरिका में नस्लवादी हमले के शिकार स्वामीजी के समर्थन में भारतीय मुसलमान

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पिछले सप्ताह स्वामी हरीशचंद्र पुरी जी पर न्यू यॉर्क में नस्लवादी हमला हुआ था. इसके फ़ौरन बाद न्यू यॉर्क के कई मुसलमानों ने स्वामी जी के स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उनको फूल भेजे. और ज्योंही स्वामीजी भेंट करने लायक़ हुए तो मुसलमानों का एक डेलिगेशन उनसे मिल कर भी आया.

तस्वीर में दिख रहे इस इस डेलिगेशन में हैं आज़म शेख़, इमरान पाशा, ख़ालिक़ बंदगी, मोइज़्ज़ुद्दीन अहमद, अज़हर भट्ट, सय्यद वजाहत अली और मुक़ीत अहमद.

ये सभी व्यक्ति अमेरिका में बसे भारतीय मूल के मुसलमान हैं और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल नाम के संगठन के सदस्य हैं.

न केवल ये मुसलमान स्वामीजी से मिले बल्कि इन्होंने फ़ैसला किया है कि स्वामीजी पर हुए हमले का पुरज़ोर विरोध करेंगे और न्यू यॉर्क राज्य के गवर्नर एंड्र्यू कुओमो से मिल कर भारतीय मूल के सभी लोगों को सुरक्षा दिया जाने की माँग रखेंगे.

न्यू यॉर्क और IAMC के मुसलमानों ने जो ये पहल की है वो सराहनीय है.

साधना नाम के हिंदू संगठन ने मुसलमानों की इस पहल का खुलेदिल से स्वागत किया है. स्वामीजी साधना से निकट संबंध रखते हैं.

आशा करता हूँ कि अमेरिका के अन्य हिंदू संगठन IAMC की इस पहल का स्वागत करेंगे. ख़ासतौर से विश्व हिंदू परिषद अमेरिका, हिंदू स्वयंसेवक संघ और Hindu American Foundation जैसे संघी संगठन भी अपनी मुस्लिम-विरोधी लाइन के बावजूद मुसलमानों के इस क़दम को सराहेंगे.


अजित साही की फेसबुक दीवार से साभार , अजित साही वरिष्ठ पत्रकार हैं। आजकल अमेरिका में हैं।

4 COMMENTS

  1. शानदार । जाति धर्म में नहीं बंटेंगे , मिलजुल कर संघर्ष करेंगे ।
    1940 में उधम सिंह ने ब्रिटेन में जाकर जलियांवाला बाग कांड के हत्यारे माइकल ओ डायर को उसके कुकर्मों की सजा दी थी और फांसी के फंदे को चूमा था । 31 जुलाई शहीद उधम सिंह की शहादत का दिन है । ये साल जलियावाला बाग का शताब्दी वर्ष भी है । शहीद भगत सिंह के गुरु लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस में बोल्शेविक क्रांति होती है और पहली बार मजदूरों का राज दुनिया में स्थापित होता है । 99% की 1% पर तानाशाही या अधिकतम संभव लोकतंत्र । इससे दुनियाभर के पूजीवादी शासक घबरा जाते हैं ।ऐसे माहौल में दमनकारी रॉलेट एक्ट के खिलाफ कौमी एकता का प्रदर्शन भारत की जनता कर रही थी । 9 अप्रैल ,1919 को डॉ बशीर के नेतृत्व में अमृतसर में रामनवमी का जुलूस हिन्दू मुसलमानों द्वारा निकाला जाता है ।इस कौमी एकता से अंग्रेज़ सरकार घबरा गई। माइकल ओ डायर ने बेशाखी को 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड को अंजाम दिया जिसमें 1000 लोगों की मौत हुई थी । शहीद भगत सिंह ने 12 वर्ष की आयु में अकेले ही जलियांवाला बाग की यात्रा की और वहां की पवित्र मिट्टी लेकर घर आए। हत्याकांड का बदला उधम सिंह ने लिया । इन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद रखा था और वह कौमी एकता के प्रतीक के रूप में उभरे थे । आजादी के बाद भारत में काले अंग्रेज ,यानि टाटा बिड़ला,अपनी पार्टी के रूप में सत्तासीन हो जाते हैं। आज काले अंग्रेज भारतीय पूंजीपति वर्ग और उनके द्वारा समर्थित कई पार्टियों में से एक खास राजनीतिक पार्टी मजदूर एकता की संभावना को नष्ट करने और रोजी रोजगार आवास, चिकित्सा ,शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए जनता को धर्म जाति के आधार पर बांट रही है ! आज हम देख रहे हैं कि पूरे देश में दलितों अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं । ऐसे माहौल में हमें अपने शहीदों से प्रेरणा लेने की जरूरत है ।शहीद भगत सिंह के साथी अशफ़ाकउल्ला और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती प्रसिद्धि है उन्होंने कहा था कि हम दोनों एक ही हैं और हमें जब भी याद किया जाए अकेले ना याद किया जाए बल्कि साथ मिलकर याद किया जाए । आइए अपने शहीदों से प्रेरणा लें ।

  2. Satish Chaudhary

    I do not understand why people says that independent was brought by Gandhi and Nehru and forget these real heros of India great conspiracy by Nehru and Gandhi

  3. Satish Chaudhary

    I do not understand why people says that independence was brought by Gandhi and Nehru and forget these real heros of India great conspiracy by Nehru and Gandhi

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