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बिहार: सेना के रिटायर्ड कैप्टन की हत्या के बाद दंबगों के डर से परिवार ने छोड़ा गाँव

बिहार के मधेपुरा जिला के सदर क्षेत्र के मदनपुर निवासी गौरी देवी के पति की हत्या बीते 13 जून को अपराधियों ने देर रात उस वक्त कर दी जब वो अपने घर में सो रहे थे। रिटायर्ड कैप्टन सियाराम यादव ने 32 वर्ष तक भारतीय सेना में काम किया। इस दौरान वो पकिस्तान से तीन दो बार, चीन से एक बार हुई लड़ाई में अपनी वीरता का परिचय दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति ने उसे अवार्ड देकर और मेजर से केप्टन के पद पर प्रोन्नति देकर सम्मानित किया था। घटना के दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से क्षुब्ध होकर और दबंगों के भय से दिवंगत कैप्टन की पत्नी गौरी देवी और जम्मू कश्मीर में तैनात पुत्र बालकृष्ण यादव एवं शिक्षक अनुज कुमार यादव ने अपना गांव छोड़ दिया।

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“जा रही हूँ जहाँ जाना होगा जाऊंगी, जहाँ रहना होगा रहूंगी लेकिन ये गाँव छोड़कर दूर चली जाउंगी। जब गाँव समाज, पुलिस नेता कोई मेरा साथ ही नहीं दिया तो इस गाँव में रहकर क्या करुँगी? मेरे परिवार में बेटा है, पोता है, पोती है, उसे भी अपराधी मार देंगे, इसलिए गाँव ही छोड़ दे रही हूँ”,  इतना कहकर गौरी देवी फफक फफक कर रो पड़ीं।

बिहार के मधेपुरा जिला के सदर क्षेत्र के मदनपुर निवासी गौरी देवी के पति की हत्या बीते 13 जून को अपराधियों ने देर रात उस वक्त कर दी जब वो अपने घर में सो रहे थे। रिटायर्ड कैप्टन सियाराम यादव ने 32 वर्ष तक भारतीय सेना में काम किया। इस दौरान वो पकिस्तान से तीन दो बार, चीन से एक बार हुई लड़ाई में अपनी वीरता का परिचय दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति ने उसे अवार्ड देकर और कैप्टन के पद पर प्रोन्नति देकर सम्मानित किया था।

घटना के दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से क्षुब्ध होकर और दबंगों के भय से दिवंगत कैप्टन की पत्नी गौरी देवी और जम्मू कश्मीर में तैनात पुत्र बालकृष्ण यादव एवं शिक्षक अनुज कुमार यादव ने अपना गांव छोड़ दिया।

पत्नी गौरी देवी कहती है देश के लिए समर्पित मेरा परिवार आज उजड़ने के कगार पर है। मेरे पति जो 32 वर्ष देश सेवा किये, पकिस्तान, चीन सहित अन्य देशों से लोहा लेते हुए देश की रक्षा की, वो खुद आज अपने घर में अपराधियों के शिकार हो गए। अब मेरे बेटा, बहु, पोता, पोती को अपराधी निशाना बना रहे हैं। मेरा परिवार देश के लिए अपना जीवन दान दे दिया है। पति सेना में थे। एक पुत्र सेना में है, जो जम्मू कश्मीर में तैनात है। पोती जो देश के लिए कई बार शतरंज खेली और अवार्ड लेकर देश के नाम को ऊंचा की। लेकिन अब हम लोगों को कोई देखने वाला नही है। रोते हुए उन्होंने कहा राज्य में न कोई शासन है न प्रशासन है। अगर होता तो अपराधियों पर शिकंजा कसा जाता और हमारे परिवार की रक्षा होती। कम से कम कोई भी अधिकारी या जन प्रतिनिधि सुध लेने तो जरूर आते।

 

गाँव छोड़ने के सवाल पर जम्मू कश्मीर में तैनात कैप्टन के पुत्र बाल कृष्ण बताते हैं कि गांव के ही दबंग नवीन यादव ने उनके पिता की हत्या की है। चूंकि उनसे जमीन विवाद था और उनके मन मुताबिक फैसला नहीं हो पाया था। आरोपी नवीन ने पहले ही हत्या कर देने की धमकी दी थी। धमकी देने के बाद लाख प्रयास किया, लेकिन स्थानीय थाना ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया। बाद में एसपी से शिकायत के बाद मामला तो दर्ज हुआ लेकिन पिता बच नहीं पाए और उनको देर रात घर में घुसकर गोली मार दी गयी।

बाल कृष्ण कहते हैं कि गाँव इसलिए छोड़ रहा हूँ क्योंकि इसी गाँव के अपराधियों ने मेरे पिता की हत्या कर दी। अब हमलोगों को टारगेट किया जा रहा है। घर में छोटे छोटे बच्चे हैं, उन सबकी रक्षा करना जरूरी है। अपने आर्मी के जॉब से रिजाइन के सवाल पर वो कहते है कि पिता 32 वर्ष सेवा किये, उसकी ह्त्या हो गयी, दो माह बीत जाने के बाद भी अपराधियों की गिरफ्तारी तक नहीं हो पाई। उल्टे पुलिस द्वारा चार नामजद को निर्दोष कह बता के मामले से नाम छांट दिया गया। मुझे देश सेवा में 20 वर्ष हो गये। जब मेरे पिता को न्याय नहीं मिल सका तो हमें तो अपने परिवार की रक्षा करनी होगी। इसलिए सर्विस से भी रिजाइन कर रहा हूँ और पूरे परिवार के साथ गाँव छोड़ रहा हूँ।

दूसरे पुत्र अनुज यादव कहते है कि शासन-प्रशासन सब से विश्वास उठ गया है। पिता सेवानिवृति के बाद केवल समाजसेवा करते थे। उसकी नृशंश हत्या कर दी गयी। दो माह बीत गया कोई न्याय नहीं मिला। अपराधियों के नाम छंट दिए गये। ऐसे में इस गाँव में रहकर क्या करूँगा? ये गाँव अब काटने दौड़ता है। मन नहीं था अपनी मिटटी से दूर होने का, लेकिन क्या करूं ? घर में मां है, बच्चे हैं, उनकी रक्षा जरूरी है। अपराधियों द्वारा केस उठाने की धमकी दिलवाई जा रहा है। पुलिस अनुसन्धान के नाम पर खानापूर्ति कर हत्या करने में शामिल लोगों के नाम को ही छांट दे रही है। कहाँ जाऊं ? थाना, एसपी, आईजी, डीआईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री हर जगह न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। अंततः आज गाँव छोड़ रहा हूँ। एसपी के बेटे को हम दो साल से ट्यूशन पढ़ा रहे हैं, उनके बच्चे को अपने बच्चे के तरह सींचा हूँ। फिर भी हमें एसपी ने न्याय नहीं दिया। इतना कहकर भावुक हो जाते हैं और रो देते हैं।

पास खड़े कैप्टन की पोती जयश्री जो देश के लिए शतरंज में अवार्ड लायी है, रो रही है। वो कह रही है कि ऐसे गाँव समाज में कैसे कोई रह सकता है, जहाँ किसी शरीफ व्यक्ति की इसलिए ह्त्या कर देता है कि उसके मन के लायक फैसला नहीं हुआ। हत्या हुई तो कम से कम अपराधियों पर क़ानूनी कार्रवाई तो हो, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस नौ नामजद में दो तीन लोग को ही गिरफ्तार कर पाती है। जय श्री भावुक होकर कहती है कि पूरा परिवार देश के लिए समर्पित रहा, लेकिन आज गाँव छोड़ना पड़ रहा है।

पुलिस ने नौ नामजद अपराधियों में तीन को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक नाबालिग आरोपी होने के कारण बेल पर बाहर भी हो गया। परिवार वालों ने मामले की सीआईडी जाँच की मांग की, लेकिन सरकार के द्वारा कोई पहल नहीं की गयी। इस संबंध में जब मधेपुरा के एसपी संजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा अपराध कहाँ नहीं होता है। पूरे भारत में अपराध होता है। अब वो इस कारण गांव छोड़ दें तो ये उसका अपना मन है। बाकी पुलिस सही दिशा में अनुसंधान कर रही है।

एक सैनिक परिवार का अपराधियों के डर से गाँव छोड़ने की खबर पूरे मधेपुरा में आग की तरह फ़ैल गयी है। ये परिवार न्याय और सुरक्षा चाहता है, लेकिन न्याय मिलता नहीं दिख रहा है। देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले की हत्या हो गयी। देश सेवा में तैनात पुत्र को रिजाइन कर गाँव छोड़ना पर रहा है। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अपराध मुक्त बिहार के उद्घोष पर कड़ा तमाचा है।


 

 प्रशांत कुमार, स्वतंत्र पत्रकार हैं।

 


 

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