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‘सरेंडर’, ‘सरेंडर’ की ब्रेकिंग के बीच एसएसपी के यहां सदलबल पहुंचे सेंगर, चाय पी और कट लिए!

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उन्‍नाव कांड में देर रात लखनऊ में हुआ एमएलए के सरेंडर का फर्जी ड्रामा

लखनऊ में देर रात हाइ वोल्‍टेज ड्रामा देखने को मिला जब मीडिया सरेंडर सरेंडर चिल्‍लाता रहा और सरेंडर करने के नाम पर एसएसपी दफ्तर आए उन्‍नाव कांड के आरोपी एमएलए कुलदीप सिंह सेंगर ने चाय पी और वापस चलते बने।

एक नाटकीय घटनाक्रम में उन्‍नाव रेप कांड में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने बुधवार देर रात सरेंडर कर दिया। सरेंडर के नाम पर उन्‍होंने एसएसपी के साथ एक कप चाय पी और वापस घर लौट गए। इस बीच विधायक के समर्थकों ने काफी बवाल काटा। भारत समाचार के मुताबिक लाठी-डंडे से लैस होकर आए विधायक के लोगों ने पत्रकारों को एसएसपी के गेट के बाहर पीटा है।

 

रात करीब एक घंटे से मीडिया में अटकलें चल रही थीं कि 11 बजे रात को सेंगर लखनऊ एसएसपी के दफ्तर में जाकर सरेंडर करेंगे, लेकिन आखिरकार रात पौने बारह बजे सबसे पहले इंडिया टुडे चैनल ने ख़बर दी कि सेंगर ने सरेंडर कर दिया है। इस बार में राजदीप सरेदसाई ने सबसे पहले ट्वीट किया

सरेंडर का यह ड्रामा चुनाव में नामांकन भरने से कम भव्‍य नहीं था जिसमें सेंगर 15 से ज्‍यादा एसयूवी गाडि़यों के काफि़ले से एसएसपी लखनऊ के दफ्तर पहुंचे और चैनलों के कैमरे का भरपूर इस्‍तेमाल करते हुए उन्‍होंने बयान दिया कि वे निर्दोष हैं और उन्‍हें फंसाया जा रहा है।

यूपी के चर्चित टीवी पत्रकार बृजेश मिश्रा लिखते हैं

जब सारे चैनल सरेंडर की ख़बर सबसे पहले देने का दावा कर रहे थे, उसी बीच बृजेश मिश्रा ने खबर दी कि सरेंडर का ड्रामा खत्‍म हो गया है। सेंगर चाय पीकर घर निकल लिए हैं।

 

2 COMMENTS

  1. Unnao , Unnao !!! Chandrashekhar azad belonged to this place. His parents migrated from here. Azad never pardonned anyone who DISHONOURED WOMEN. Be it a British thrashed by him in a railway station WHILE khatri ji was with him. Or even an inebriated HUSBAND beating his wife. Other time he beaten an indian who was misbehaving with Congress women staging a DHARNA on a liquor shop. Unfortunately in that very SOIL KALE ANGREZ are openly negotiating in favour of RAPIST LIKE MLA SENGAR!! AZAD WOULD HAVE shot them on Head. Afterall he WAS an excellent shooter. YOGI WOULD HAVE EXPERIENCED HIMSELF WHAT IT FEELS LIKE.

  2. Ravana of FASCISM had been killed by Working class party alone. BUT only having a RIGHT POLITICAL LINE OR PRINCIPLE. Even alternate online media like thewire etc keep themselves away from industrial workers specially of unorganized sectors doing informal jobs. For example, in 50 lakh industrial population if NCR and delhi. News click cover FARMERS, PSU workers STRUGGLE WITHOUT fail. But it deliberately not translated SULTANPURI FIRE OF 9 APRIL WHERE 4 PEOPLE DIED. Even what is published in hindi translation is 10 APRIL news of low MINIMUM WAGES . BUT here’s is a subtle game. JUST IN A TYPICAL BOURGEOIS LABOR DEPARTMENT STYLE IT weeps about low WAGES of shop. Why not manufacturer Comrade ? WHICH is area of preference ? It’s not bad to cover shop but definitely Worse to spare manufacturer…. Which are backbone of BIG CAPITALISTS ventures.

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