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सोशल मीडिया न होता तो जलीकट्टु का शोर निगल ही जाता दलित की चीत्‍कार!

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पूरा देश जिस वक्‍त जलीकट्टु नामक तमिल परंपरा को बचाने के नाम पर दो पाले में बंटा हुआ था, उसी दौरान चेन्‍नई से कुछ दूरी पर अरियालुर में 17 साल की एक दलित लड़की का बलात्‍कार कर के उसे मरने के लिए एक कुएं में फेंक दिया गया और यह घटना मीडिया में ख़बर नहीं बन सकी। जब 14 जनवरी को दो सप्‍ताह के बाद उसकी सड़ी हुई लाश बरामद हुई, तो घटना के विरोध में न तो कोई मार्च हुआ, न बैनर-पोस्‍टर टंगे और न ही किसी मीडिया संस्‍थान ने इसे अपने सुर्खियों में शामिल करना ज़रूरी समझा।

अरियालुर पुलिस के मुताबिक लड़की के साथ उसके एक दोस्‍त मणिकंदन और उसके तीन मित्रों ने कथित रूप से 20 दिसंबर 2016 को सामूहिक बलात्‍कार किया और उसकी हत्‍या कर दी थी। चारों ने अपना दोष स्‍वीकार कर लिया है और उन्‍हें न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पीडि़त दलित लड़की दिहाड़ी मजदूरी करती थी और मुख्‍य आरोपी मणिकंदन को पिछले एक साल से जानती थी। पुलिस के मुताबिक लड़की गर्भवती थी, मणिकंदन से शादी करना चाहती थी लेकिन लड़के की योजना कुछ और थी। उसने लड़की से बच्‍चा गिराने को कहा लेकिन उसके इनकार करने पर अपने मित्रों के साथ उसने उसका बलात्‍कार किया और हाथ बांधकर कुएं में फेंक दिया।

आरोपी मणिकंदन पेशे से राजमिस्‍त्री है। ऊंची जाति वन्नियार से आता है और हिंदू मुन्‍नानी नामक संगठन का यूनियन सेक्रेटरी है। यह मामला सीधे तौर पर एक ऊंची जाति के एवं हिंदू संगठन से ताल्‍लुक रखने वाले लड़के द्वारा दलित व मजदूर लड़की के साथ बलात्‍कार और हत्‍या का है। यह एक सामान्‍य अपराध कथा नहीं है, लेकिन जलीकट्टु की टीआरपी में पूरे देश को बांध देने वाले मीडिया ने इसे ख़बर बनाना भी ज़रूरी नहीं समझा।

इससे भी ज्‍यादा खतरनाक यह है कि पीडि़त लड़की के लिए इंसाफ की मांग करने को कोई आगे नहीं आया। जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसके बारे में लिखना शुरू किया, तब यह घटना खबरों में आ सकी।

अभिनेता कमल हसन ने इस घटना पर 3 फरवरी को ट्वीट किया है और एक अन्‍य ट्वीट में इस पर देरी से प्रतिक्रिया देने के लिए माफी मांगी है।

 

 

 

 

(डेलीओ पर अक्षय नाथ के लेख से साभार)