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पोस्टर में ‘मुस्लिम’ हैं हार्दिक,अल्पेश और जिग्नेश ! क्या RSS दलित-ओबीसी को हिंदू नहीं मानता ?

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2014 के चुनाव के पहले एक बड़े बीजेपी नेता ने सोशल मीडिया टीम की बैठक में कहा था-‘आपके लिए कोई बंधन नहीं है। जहाँ तक जा सकते हैं जाएँ।’

और आईटी सेल के लोगों ने चुनाव दर चुनाव ‘बंधन-हीन’ होने का प्रमाण दिया। झूठ और फ़रेब के ज़रिए भावनाएँ भड़काने का एक ऐसा सिलसिला चला जो आज तक रुका नहीं है।

लेकिन इन दिनों गुजरात में सोशल मीडिया में तेज़ी से प्रचारित किया जा रहा एक पोस्टर बीजेपी के लिए उलटा पड़ सकता है। इस पोस्टर में मुख्यमंत्री रूपानी (R), बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह  (A) और प्रधानमंत्री मोदी (M) के प्रथम अक्षरों को जोड़कर राम बनाया गया है। साथ में राममंदिर की तस्वीर है।  उसके नीचे युवा पटेल नेता हार्दिक  (H), ओबीसी नेता अल्पेश  (A) और दलित नेता जिग्नेश (J) के प्रथम अक्षरों को जोड़कर ‘हज’ लिखा गया है और सामने है मक्का स्थित काबा की तस्वीर जहाँ हर साल पूरी दुनिया से मुस्लिम श्रद्धालु हज करने जाते हैं।

यह पोस्टर, आरएसएस के अरवाडीनगर (अहमदाबाद) के व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए वायरल किया जा रहा है, जिसकी एक्सक्लूसिव तस्वीर न्यूज़क्लिक ने जारी की है।

देखा जाए तो यह हर चुनाव के पहले ‘हिंदू-मुस्लिम’ करने की वीभत्स कोशिशों का ही दोहराव है। चूँकि हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकौर और जिग्नेश ने सामूहिक रूप से गुजरात चुनाव में बीजेपी को हराने का ऐलान किया है, इसलिए उन्हें इस्लाम का एजेंट बताया जा रहा है। बीजेपी कुछ भी करे, लेकिन वह राम की पार्टी है। इस तरह जनता के सामने राममंदिर और काबा के बीच चुनाव का विकल्प रखा जा रहा है। पोस्टर का शीर्षक भी है-पसंद तुम्हारी।

यानी 22 साल के शासन और विकास के तमाम दावों के बावजूद बीजेपी को भरोसा सांप्रदायिक विद्वेष पर ही है। ऐसा लगता है कि बीजेपी, पिछड़े और दलित वर्गों से आने वाले तीन युवाओं के अभियान से घबरा गई है जिसका सीधा लाभ काँग्रेस को मिलता दिख रहा है।

लेकिन आरएसएस के जिन उत्साही लोगों ने यह पोस्टर रचा है, वह शायद नहीं जानते कि इसका एक और पाठ भी संभव है। सोशल मीडिया में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या बीजेपी दलित और पिछड़े नेताओं को हिंदू नहीं मानती। हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश को हज बताने का और क्या अर्थ है।

ज़ाहिर है, पोस्टर का यह पाठ अगर गुजरात चुनाव में परवान चढ़ा तो बीजेपी के लिए लेने के देने वाली स्थिति होगी। उसे सोचना चाहिए कि बंधनहीन होने का क्या नतीजा हो सकता है।

पढ़िए, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष ने फ़ेसबुक पर क्या लिखा है-    

 Arvind Shesh

1 hr ·

इस पोस्टर के जरिए भाजपा ने दलित जिग्नेश, ईबीसी अल्पेश और ओबीसी हार्दिक को ‘हज’ यानी ‘मुसलमान’ कहा है। इसके बाद रूपाणी, अमित और मोदी को ‘राम’ बता कर कहा है कि ‘अब पसंद तुम्हारी!’

सवाल है कि जिन दलित-पिछड़ी जातियों के चेहरों को भाजपा ‘हज’ यानी मुसलमान बता रही है, वे ‘राम’ यानी भाजपा को क्यों चुनें?

जब भाजपा दलित-पिछड़ी जातियों के चेहरों को ‘हज’ यानी मुसलमान बता रही है तो इसका मतलब यह कि भाजपा की नजर में दलित-पिछड़ी जातियां ‘राम’ यानी हिंदू नहीं हैं और उसके लिए ‘हिंदू’ का मतलब सिर्फ ‘ऊंच’ कही जाने वाली जातियां!

‘ऊंच’ कही जाने वाली जातियां ‘हज’ यानी मुसलमान नहीं हैं और उन्हें भाजपा को चुनना चाहिए… यह लाजिमी है..!

‘RAM’ यानी हिंदू यानी भाजपा.
‘HAJ’ यानी मुसलमान यानी दलित-पिछड़ी जातियां.

शब्दों के शॉर्ट फॉर्म के खेल में भाजपा हर बार फंसती है… बस उसका इस्तेमाल करने या भुनाने वाली मैदानी राजनीति नहीं हो पाती!

. बर्बरीक



 

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