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न्यूज़18 इंडिया के पत्रकार जाहिल हैं या दंगाई ? ‘इस्लामी झंडे’ को पाकिस्तानी बता दिया !

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यक़ीन करना मुश्किल है कि नामी गिरामी समाचार समूहों में ऐसे पत्रकार और संपादक काम करते हैं जिन्हें ‘इस्लामी झंडे’ और पाकिस्तानी झंडे का फ़र्क़ नहीं पता। याकि ऐसी ज़हालत भरी है कि उर्दू में लिखा हुआ कुछ देखते ही उनके दिल-दिमाग़ में हड़कंप मच जाता है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले से आई ऐसी ही एक तस्वीर को देखकर अंबानी के चैनल न्यूज़ 18 की वेबसाइट ने भी हड़कंप मचा दिया। ज़ाहिर है, इसका सामाजिक सौहार्द पर बेहद बुरा असर पड़ता, लेकिन कुछ लोगों की सतर्कता की वजह से यूपी पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करके माहौल को बिगड़ने से बचा लिया।

ख़बर लिखने और प्रकाशित होने के बीच कई पड़ाव होते हैं जहाँ उसकी सच्चाई परखी जाती है। उपसंपादक, समाचार संपादक से लेकर संपादक तक की नज़र रहती है। ऐसे में अगर कोई वेबसाइट इस तरह का काम कर रही है तो यह कोई सामान्य चूक नहीं है। या तो वहाँ जाहिल पत्रकारों की बड़ी फ़ौज है या फिर दंगाई मिज़ाज के लोगों ने जानबूझकर ऐसी ख़बर लगाई ताकि नफ़रत का कारोबार बढ़े। इससे हिट्स मिलने का खेल भी सध जाता है।  

इस पूरे मसले पर युवा पत्रकार शाहनवाज़ मलिक ने अपनी फ़ेसबुक दीवार पर ये लिखा है–

‘ हिंदी के पत्रकार उर्दू लिपि या हरा रंग देखकर कांपने लगते हैं. और इतना कांपते हैं कि कांपते-कांपते ख़बर बना देते हैं.

ये पत्रकार दिल्ली-एनसीआर में किसी मीडिया कंपनी के दफ़्तर में बैठकर सुपारी पत्रकारिता करते हैं.

तनाव फैलाने के लिए ये हेडिंग लगाते हैं- ‘मचा हड़कंप’

क्या मज़ा आता है हड़कंप मचाने में मूर्खों? और हड़कंप मचाना है तो अपने घर में बीवी-बच्चों के बीच मचाओ. पहले से ख़राब हो रही हवा में और ज़हर भरकर क्या हासिल हो जाएगा?

कौन हैं ये पत्रकार जो भाषा को भाषा नहीं समझते? हरे रंग में पाकिस्तान और उर्दू में इस्लामिक स्टेट ढूंढने का हुनर इनमें कहां से आता है?

दो साल पहले भास्कर डॉट कॉम ने भी बिल्कुल ऐसी ही ख़बर लगाई थी. भास्कर के किसी डिजिटल पत्रकार को राजस्थान में हरा झंडा दिख गया था और झंडे को उसने पाकिस्तानी बना दिया था. उसने भी लिखा था- मचा हड़कंप.

और अब न्यूज़18इंडिया की वेबसाइट पर हूबहू वही ख़बर.

डिजिटल मीडिया के इन पत्रकारों और उन भगवा गुंडों में क्या फर्क़ है जिन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से नई दिल्ली इलाक़े में उर्दू में लिखवाए जा रहे स्लोगन देखने के बाद पेंटर शब्बू पर हमला कर दिया था?

वो गुंडे भी यही मान रहे थे कि उर्दू और हरे रंग का कनेक्शन पाकिस्तान और इस्लाम से है।

मेरा मोदी जी से आग्रह है कि वो सिर्फ डिजिटल इंडिया कैंपेन तक अपनी ऊर्जा सीमित नहीं रखें.

डिजिटल पत्रकारों के लिए भी प्रशिक्षण संस्थान खुलवाएं वरना अभी के डिजिटल पत्रकार डिजिटल इंडिया की वाट लगा देंगे.

शुक्र है गोंडा यूपी पुलिस का जिसने फ़ौरन सामने आकर ज़हरीले पत्रकार के मंसूबों पर पानी फेरा.’

 

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