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का हो एनजीटी ! रामलीला मैदान के पास रहने वाले बहरे हैं क्या ?

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जंतर-मंतर से आंदोलनकारियों को हटाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के फ़ैसले का विरोध शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार लुटियन ज़ोन में ऐसे किसी शख्स को नहीं देखना चाहती जो सरकार पर सवाल उठा रहा हो। हद तो यह है कि एनजीटी ने धरना-प्रदर्शन के लिए लोगों को रामलीला मैदान भेजने को कहा है, वजह ध्वनि प्रदूषण को बताया है।

हक़ीक़त ये है कि रामलीला मैदान के आसपास ज़्यादा सघन बस्ती है। कॉलेज और अस्पताल हैं। क्या एनजीटी को लगता है कि वहाँ लोगों के कान नहीं होते ? फिर तमाम कार्यक्रम और रैलियाँ होती हैं जिसके लिए मैदान खाली कराया जाता है, तो क्यों ना माना जाए कि एनजीटी चाहता ही नहीं कि देश की राजधानी में कोई जगह नियत हो जहाँ देश भर से लोग अपन दुख जताने आएँ। यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।

फिलहाल पढ़िए, राज्यसभा टीवी से जुड़े युवा पत्रकार दिलीप ख़ान ने क्या लिखा है-

 

जंतर-मंतर पर प्रदूषण होता है तो रामलीला मैदान में नहीं होगा क्या?

 

1. जंतर-मंतर से ज़्यादा लोग रामलीला मैदान के बगल में रहते हैं। तुर्कमान गेट पर जो घनी बस्ती है, वैसी बस्ती लुटियंस में कहीं है क्या?

2. ज़ाकिर हुसैन कॉलेज रामलीला मैदान के ठीक बगल में है। वहां लोगों को ‘परेशानी’ नहीं होगी क्या? सड़क भी वहां की ज़्यादा पतली है।

3. राजनीतिक पार्टियां वहां रैलियां करती रहती है। पता चला कि आप प्रोटेस्ट करने गए और मैदान कांग्रेस/बीजेपी ने ‘बुक’ कर रखा है।

4. पहले राजपथ के बोट क्लब पर लोग प्रोटेस्ट करते थे, बाद में जंतर-मंतर भेज दिया गया। अब रामलीला मैदान भेजा जा रहा है। यानी सत्ता के ठिये से लगातार दूर किया जा रहा है।

5. कल को हो सकता है बवाना भेज दिया जाए। दिल्ली पुलिस वैसे भी लोगों को डिटेन कर बॉर्डर पर छोड़ने के लिए कुख्यात है। बॉर्डर पर ही कोई खेत चुन लिया जाएगा प्रोटेस्ट के लिए।

6. वरुण सेठ की याचिका पर NGT ने फौरन जंतर-मंतर खाली करने कह दिया, क्या इसी फैसले को आधार बनाकर रामलीला मैदान के बगल के बाशिंदे अपील नहीं कर सकते?

7. NGT के कम से कम सौ फैसलों पर सरकार अमल नहीं कर रही। कई फैसलों को सरकार ने चुनौती तक दी, लेकिन देखिएगा, इसको चट्ट से मान लेगी। फौरन मान लेगी।

8. NGT ने यमुना मैदान में रविशंकर के कार्यक्रम पर पाबंदी लगाई थी। ज़ुर्माना लगाया था। सरकार को क्या करना चाहिए था? आदेश का पालन। लेकिन प्रधानमंत्री ने क्या किया? रविशंकर के कार्यक्रम का उद्घाटन। लेकिन जंतर-मंतर मामले में समय पर कार्रवाई होगी। देख लीजिएगा।

 



 

 

 

3 COMMENTS

  1. So again it was established that in capitalist democracy all 3 parts serve ruling class. N G T (judiciary) belong to their masters. Not other 99%.

  2. N G T kah rahi hai —Des me aghoshit aapatkaal laga hai

  3. Proposed labour code by modi Govt has union act with provison of heavy penalty if you donate union to fight 4 workers legal rights. If this is not emergency then please coin a different word—-NEO EMERGENCY

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