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गुजरात मॉडल : दलित कार्यकर्ता आत्मदाह पर मजबूर ! दलित विधायक को पुलिस के धक्के !

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क्या शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे लोगों के साथ पलिस दुर्व्यहार कर सकती है ? आप इस सवाल के जवाब में हँस सकते हैं, क्योंकि पुलिस आमतौर पर ऐसा ही करती है। इस मामले में अपवाद नियम में तब्दील हो गया है। लेकिन क्या पुलिस किसी विधायक को भी घसीटकर ले जा सकती है? ज़ाहिर है, ऐसा आमतौर पर संभव नहीं है। हाँ, सत्ता का निर्देश हो तो बात अलग है।

और गुजरात के नवनिर्वाचित विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ 18 फ़रवरी को यही हुआ। 15 फ़रवरी को  दलित कार्यकर्ता भानु वानकर ने गुजरात के पाटन जिले के डीएम दफ्तर में दलितों को ज़मीन देने में हो रही देरी को लेकर आत्मदाह कर लिया था। 16 फ़रवरी को भानुभाई ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने लोगों को गुस्से में भर दिया। जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे। वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवानी भानुभाई के परिवार को न्याय दिलाने के सवाल पर सक्रिय हो गए।

इसी सिलसिले में 18 फ़रवरी को जिग्नेश मेवानी अहमदाबाद में हो रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे जब पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। यही नहीं, उनकी कार की चाबी भी तोड़ दी गई। इसकी जानकारी ख़ुद जिग्नेश के साथियों ने ट्विटर पर दी।

 

जिग्नेश के साथ हुए अभद्र व्यवहार को लेकर गुजरात में काफ़ी आक्रोश है। जिग्नेश साफ़ कह रहे हैं कि गुजरात सरकार पर दलितों का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय रूपानी से इस्तीफ़ा और गुजरात में राष्ट्रपति शासन की माँग की है।

ग़ौरतलब है कि भानुभाई के परिजनों ने जिग्नेश को हिरासत में लिए जाने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया जताई । उन्होंने कहा कि अगर जिग्नेश को छोड़ा नहीं गया तो वे भानुभाई का शव नहीं लेंगे। आख़िरकार पुलिस ने जिग्नेश को रिहा कर दिया। जिग्नेश के साथ हुए अभद्र व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया में भी व्यापक प्रतिक्रिया दिख रही है।

यह अजीब बात है कि देश में दलित नेताओं की कमी नहीं है। भारत के राष्ट्रपति भी दलित हैं और तमाम केंद्रीय मंत्री भी। लेकिन दलितों का उत्पीड़न कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हैरानी की बात ये भी है कि स्थापित राजनीतिक दलों के दलित नेताओं के लिए यह बड़ा मुद्दा भी नहीं है। मायावती और बीएसपी भी चुप हैं।  ऐसे में गुजरात से लेकर यूपी तक जिग्नेश मेवानी जैसे नौजवान दलित नेता और विधायक की सक्रियता क्या किसी नए दौर की शुरुआत का संकेत है।

(मुख्य तस्वीर में दाएँ भानु भाई खड़े हैं जिन्होंने आत्मदाह किया।)

 



 

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