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नया इतिहास-गाँधीजी ने मरते वक़्त ‘हे राम’ नहीं, ‘हे नाथूराम’ कहा था !

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किसके पास है गांधी की असली विरासत, नये दस्तावेजों से हुआ सनसनीखेज खुलासा
इतिहास को इस देश में हमेशा से तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता रहा है। बहुत सारा भ्रम फैलाया जाता रहा है। इनमें सबसे बड़ा भ्रम ये है कि गांधीवाद और मोदीवाद दो अलग-अलग विचारधाराएं हैं। गांधी भी गुजराती, मोदी भी गुजराती। दोनो हिंदू, दोनो को चरखा कातना पसंद, दोनो रामभक्त। जब व्यक्तियों में इतनी समानताएं हैं तो फिर उनके विचार अलग-अलग कैसे हो सकते हैं। कुछ लोगो का मानना है कि दो मामूली शब्दों सत्य और अहिंसा को निकाल दें, गांधी और मोदी एक ही हैं। मोदी चाहते तो इन दोनो शब्दों पर एतराज कर सकते थे। लेकिन उनका बड़प्पन है, उन्होने कभी एतराज नहीं किया। एतराज ना करने का एक बड़ा कारण ये भी है कि मोदीजी को इस देश के असली इतिहास का समग्र ज्ञान है। वो असली इतिहास जिसे देशद्रोही इतिहासकारों ने कुचक्र रचकर हम देशवासियों से छिपाया, तोड़ा और मरोड़ा। महान देशप्रेमी श्री व.ल.फोते की डायरी में ऐसा ही इतिहास दर्ज है। श्री फोते महान राष्ट्रवादी थे। जब गोडसे ने गांधी की आत्मा को शरीर से मुक्त करने का पवित्र संकल्प लिया तब वे गोडसे के साथ थे। हुतात्मा ने जब अपनी पावन प्रतिज्ञा पूरी की तब श्री व.ल.फोते गांधी के अत्यंत निकट खड़े थे। श्री फोते ने जेल में भी हुतात्मा गोडसे से कई बार मुलाकात की और सबकुछ अपनी डायरी में दर्ज किया। कांग्रेसी सरकारो की साजिश की वजह से ये डायरी कभी सामने नहीं आ पाई। लेकिन सत्य छिप सकता है, मिट नहीं सकता है। डायरी अब मिल गई है। बहुत बुरी हालत में है। कुछ ही पन्ने पढ़े जाने लायक हैं।  प्रस्तुत है, डायरी के इन पन्नों में दर्ज अनकहा इतिहास।
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प्रार्थना सभा में गांधी आ रहे थे। कतार बांधकर लोग खड़े उन्हे प्रणाम कर रहे थे। हुतात्मा नाथूराम शाल ओढ़े सामने से चले आये। उन्होने गांधी को नमस्कार किया। हुतात्मा के मुखारविंद पर छाई दिव्य आभा देखकर गांधी समझ गये कि यह कोई साधारण पुरुष नहीं है। गांधी के चेहरे से ऐसा लग रहा था कि वो अभी तत्काल झुककर नाथूराम जी के चरण रज ले लेंगे। लेकिन कर्तव्य की बेड़ी में जकड़े नाथूराम जी ने गांधी को इसका अवसर नहीं दिया। उन्होने गांधी के सीने पर गोलियां उतार दीं। जब गांधी गोली खाकर परम तृप्ति का भाव लिये भूमि की पर गिरे तो मैं वहीं था, उन्होने इशारे से हुतात्मा को करीब बुलाया और बोले—  तुम नर के वेश में नारायण हो। तुम्हारे हाथो मरकर मुझे वैकुंठ मिलेगा। अहिंसा के प्रति तुम्हारी निष्ठा असंदिग्ध है, नहीं तो मुझे मारने से पहले तुमने मुझे दस-बारह गंदी गालियां ज़रूर दी होती। तुम चाहते तो मुझे चाकू भी मार सकते थे, या गोली किसी ऐसी जगह मार सकते थे, जिससे मुझे अधिक पीड़ा हो। लेकिन पीड़ा पहुंचाना तुम्हारा उदेश्य नहीं था। तुम तो आत्मा को इस नश्वर शरीर से मुक्त करने आये थे। क्या अचूक निशाना है, तुम्हारा। राम से भी बड़े धनुर्धर हो तुम नाथूराम। अहिंसा की विरासत को तुम्ही आगे बढ़ाओगे। वो दिन भी आएगा जब नगर-नगर तुम्हारी मूर्तियां लगेगी। मेरी अंतिम इच्छा ये है कि मेरी समाधि पर तुम्हारा नाम लिखा हो..  हे नाथूराम।
ऐसा कहकर गांधी इस लोक से प्रस्थान कर गये। सत्य का गला घोंटकर बाद में कांग्रेसियों ने ..  हे नाथूराम को.. हे राम बना दिया।
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आज मैं कारागार श्री नाथूराम गोडसे को मिला। वे बहुत चिंतित थे। चिंता कारण यह नहीं था कि तीन दिन बाद उन्हे फांसी दी जानी है। वे कह रहे थे, मैं गांधी की उस विरासत का क्या करूं जो वो मुझे सौंप गया है। अगर मैं मुक्त होता तो गांधी की अंतिम इच्छा अवश्य पूरी करता। लेकिन आतातायी सरकार मुझे फांसी पर लटकाने पर तुली है। अगर विरासत लिये मरा तो उपर जाकर गांधी को क्या जवाब दूंगा।
मैने कहा-  आप अहिंसा की विरासत गुरुजी को क्यों नहीं सौंप दे। इस देश में कौन होगा उनसे बड़ा अहिंसा का पुजारी?
मेरी यह बात सुनकर श्री नाथूराम की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। मुंह से कुछ नहीं कहा। एक छोटी सी पुड़िया में बांधकर उन्होने गांधी की अहिंसा की विरासत मेरे हवाले कर दी। जेल के सुरक्षकर्मियों को चकमा देने के बाद मैं केंद्र और राज्य  की कांग्रेसी सरकारों से बचता हुआ गुरुजी के पास पहुंचा और गांधी की विरासत को उनके चरणों में रख दिया।
गुरुजी ने कहा–  गांधी जैसा भी था, उसकी विरासत हमारी है, क्योंकि हम देशप्रेमी हैं और गांधी भी इसी देश का था।
निष्कर्ष–  श्री व.ल.फोते की डायरी के बाकी पन्ने धुंधले हैं। पढ़ना संभव नहीं है। लेकिन इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि गांधी की अहिंसा की विरासत को गुरुजी ने आगे बढ़ाया। उनके बाद बाकी सरसंघचालकों। अब भागवत जी ने विरासत मोदी जी को सौंप दी है। खादी भंडार के कैलेंडर पर गांधी की जगह अपना फोटो छपवाकर मोदीजी ने दुनिया को औपचारिक रूप से बता दिया है कि ओनरशिप अब ट्रांसफर हो चुका है। गांधी की विरासत फिलहाल उनके हाथों में सुरक्षित है। अगर महंत आदित्यनाथ ये प्रमाणित करें कि वे गांधी की विरासत के सच्चे हकदार हैं तो कालांतर में मोदीजी विरासत उन्हे सौंप देंगे।
विशेष टिप्पणी–  इस मेसेज को इतना फेला दो कि सारे देशद्रोही इतिहासकार शर्म से पानी-पानी हो जायें।
(लेखक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं)