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रवीश कुमार ने मोदी को गुंडा नहीं कहा, लेकिन अफ़वाह फैलाने में जुटा हत्यारा आईटी सेल !

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मीडिया विजिल ने कल ही छापा था कि रवीश कुमार की जान को ख़तरा है। सोशल मीडिया के ज़रिए संभावित हत्यारे तैयार करने का एक अभियान चल रहा है। इस हत्यारे गिरोह की ख़ासियत है कि वह शिकार को सिर्फ़ जान मारने की योजना नहीं बनाता, उसको बदनाम करने की ज़ोरदार मुहिम भी चलाता है। यह हम गौरी लंकेश के मामले में देख रहे हैं कि किस तरह हत्या की ख़बर आते ही जश्न शुरू हो गया और उन्हें रंडी से लेकर कुतिया जैसे शब्दों से नवाज़ा गया। गौरी लंकेश की हत्या के बाद 6 सितंबर को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकारों की सभा में रवीश कुमार ने एक मार्मिक भाषण दिया था। उन्होंने अपील की थी कि गौरी लंकेश को ट्विटर पर कुतिया लिखने वाले गुंडों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़ॉलो करना बंद कर दें। रवीश ने यह भी कहा था कि बेहतर हो कि प्रधानमंत्री उन्हें फ़ॉलो करें, वे उन्हें देश की तमाम समस्याओं से, पूरी विनम्रता के साथ अवगत कराएँगे। लेकिन लगता है कि हत्यारों को यह बात बहुत चुभ गई है। उनका आईटी सेल सक्रिय हो गया है। बहुत तेज़ी से यह झूठ फैलाया जा रहा है कि रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को गुंडा कहा। रवीश कुमार को बदनाम करने के लिए अफ़वाह फ़ैक्ट्री  दिन रात काम कर रही है और उसका इरादा बहुत ख़तरनाक है।  रवीश ने इसके बारे में जो लिखा है, उसे पढ़ना और फैलाना ज़रूरी है-संपादक.

 

मैंने प्रधानमंत्री के बारे में ऐसा नहीं कहा।

 

अफ़वाहों का तंत्र इतना व्यापक हो चुका है कि खंडन का भी मतलब नहीं रह गया है। पैटर्न यह है कि आपकी जो बात सत्ता को चुभ रही हो, उसी के समानांतर एक नई बात की छवि तैयार की जाए जिससे चुभ कर लोग आपसे नाराज़ हों। ज़ाहिर है ऐसा बोला नहीं है वरना वीडियो होता। भाई लोग मेरे नाम से चला रहे होते कि मैंने प्रधानमंत्री को गुंडा बोला है। मैंने ऐसा बोला ही नहीं है। पर उससे किसी को क्या। व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के कबाड़ में ठेले जाओ। सो भाई लोग ठेल रहे हैं।

पैटर्न इसलिए है ताकि पाठक ‘ कुतिया कुत्ते की मौत मर गई’ वाक्य और उसे कहने वाले समाज पर अपनी जायज़ प्रतिक्रिया भूल मुझे लेकर व्यस्त हो जाए। याद है एक बार प्रधानमंत्री ने कहा था कि मीडिया हेडलाइन बनाता है कि बी एम डब्ल्यू कार ने दलित को कुचला। कार को क्या पता कि दलित को कुचला। लोगों को लगा कि सही बात है मगर ये इमेज की मिक्सिंग थी। मैंने इस बारे में कस्बा ( naisadak.org ) पर लिखा था। पढ़िएगा। दो अलग अलग घटनाओं की रिपोर्टिंग को मिलाकर एक नया तथ्य गढ़ा गया जो झूठ था।

बी एम डब्ल्यू कार की दुर्घटना की रिपोर्टिंग में कभी दलित लिखा ही नहीं गया। ज़रूर जहाँ दलित को घोड़े पर नहीं चढ़ने दिया गया वहाँ दलित नहीं लिखेंगे तो क्या करेंगे। जाति के कारण वो शिकार हुआ तो जाति लिखेंगे या सिर्फ नाम। इसलिए कि दुनिया को पता न चले ?

इसिलए ऐसे बयान दिए जाते हैं ताकि यह कहने की गुज़ाइश बची रहे कि आप बात को समझ नहीं रहे । ‘मगर मेरा मतलब वो नहीं था’ की आड़ में इमेज के सहारे तर्क गढ़ने की कोशिश की गई। ये एक मनोवैज्ञानिक रणनीति के तहत होता है

यही कोशिश मेरे नाम से प्रधानमंत्री को गुंडा कहना जोड़कर की जा रही है। पहले किसी ने यू ट्यूब पर मेरे ही भाषण का कैप्शन लगाया और अब व्हाट्स अप पर इसे चलाया जा रहा है। मैंने आनलाइन जगत के एक हिस्से को गुंडा और हत्यारा ज़रूर कहा है। प्रधानमंत्री के लिए कभी ऐसे शब्द का इस्तमाल नहीं किया है। जो भी मुझे बदनाम के करने के लिए ऐसा कर रहा है वह लोगों को प्रधानमंत्री को देखने का एक नज़रिया दे रहा है। उनका अपमान कर रहा है। मैंने इस तरह के काम करने वालों को गुंडा कहा है, अभी भी कह रहा हूँ न कि प्रधानमंत्री को ।

प्लीज़ भाई लोग, नेताओं के इतने भी काम मत आओ। समझो तुमसे झूठ फैलवा कर तुम्हारा यूज़ कर रहे हैं। तुम उनके लिए ‘यूज़ एंड थ्रो’ क़लम से ज़्यादा कुछ भी नहीं । जब इस्तमाल के बाद फेंक दिए जाओगे तो वही मिलोगे जहाँ तुम्हारा फैलाया हुआ कचरा जमा होता है। लगता है आई टी सेल से हमला हुआ है।



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