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पटना संग्रहालय को विस्‍थापन से बचाने के लिए राहुल सांकृत्‍यायन की पुत्री ने भेजा नीतिश को पत्र

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महापंडित राहुल सांकृत्यायन की पुत्री जया सांकृत्यायन ने बिहार के मुख्यमंत्री को पटना संग्रहालय के अस्तित्व को बचाने के बाबत एक पत्र भेजा है। जया सांकृत्यायन का हस्ताक्षरित पत्र मुख्यमंत्री के निजी सचिव के पास whatsapp और ईमेल से मंगलवार को प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री बिहार के नाम से जारी पत्र की प्रतिलिपि महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री और माननीय मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय को भी प्रेषित है।

पिछले 9 सितंबर से ऐतिहासिक पटना संग्रहालय बंद पड़ा हुआ है और उसे बेली रोड स्थित नए बिहार म्‍यूजि़यम में स्‍थानांतरित किए जाने की योजना है। यह काम आगामी 2 अक्‍टूबर को प्रस्‍तावित है। इस प्रक्रिया में यहां से मूर्तिशिल्प की महानतम कृति यक्षिणी सहित 3 हजार से ज्यादा विलुप्त प्रजाति के पुरातात्विक संरचनाओं को बेली रोड स्थित गैर सरकारी (स्वायत्त) बिहार संग्रहालय में रखा जाएगा।

बरसों पुराने इस संग्रहालय को समृद्ध बनाने में राहुल सांकृत्‍यायन की बड़ी भूमिका रही है। उनकी पुत्री जया ने मुख्‍यमंत्री को भेजे पत्र में इस बात का जि़क्र किया है कि कैसे राहुल सांकृत्‍यायन ने तिब्‍बत की पदयात्रा के बाद वहां से बहुमूल्‍य पांडुलिपियों को यहां लाकर संरक्षित करने का काम किया था।

संग्रहालय को खत्‍म किए जाने के खिलाफ कला एवं शिल्प के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, कलाकार और पत्रकार “यक्षिणी बचाओ,पटना संग्रहालय बचाओ” नाम से एक अभियान चला रहे हैं। पटना संग्रहालय से इस तरह के विस्थापन से कला एवं शिल्प महाविद्यालय के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है। कलाकारों का मानना है कि आर्ट कॉलेज के साथ पटना संग्रहालय का रिश्ता गर्भनाल से जुड़ा है और पटना संग्रहालय के खोखला होने से कला एवं शिल्प महाविद्यालय भी अप्रासंगिक हो जाएगा।

कला एवम शिल्प महाविद्यालय के संस्थापकों ने पटना संग्रहालय के पीछे कला एवं शिल्प महाविद्यालय की स्थापना इसलिए की थी कि मूर्ति कला और चित्रकला के छात्रों को प्राकृतिक रूप से प्रयोगशाला के रूप में पटना संग्रहालय मौजूद था। कला एवं शिल्प के छात्र अपने महाविद्यालय में नामांकन के बाद किसी रोकटोक के बिना पटना संग्रहालय जाकर एक-एक पुरातात्विक कृतियों के समक्ष बैठकर उसे अपनी कूची से निर्मित करते हैं। मूर्तिकला के छात्रों के लिए भी संग्रहालय में स्थित कृतियां मूर्तिशिल्प के प्रशिक्षण में प्रेरणादायी हैं।

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