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‘प्रचंड’ संकल्प पूरा : नेपाल में एक कम्युनिस्ट पार्टी के लिए माओवादी पार्टी का लोप !

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पंकज श्रीवास्तव

 

जुलाई 2015 में भारत की यात्रा पर आए नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और शीर्ष माओवादी नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने जब कहा था कि वे नेपाल के कम्युनिस्टों को एक करने में बाक़ी जीवन लगा देंगे तो एकबारगी यक़ीन नहीं हुआ था। दिल्ली के एक बड़े होटल के उस नीम-रोशन कमरे में ट्रैक सूट पहने चश्माधारी से बात करते हुए लग नहीं रहा था कि यह ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ का वही भूमिगत कमांडर ‘प्रचंड’ है जिसके जनयुद्ध ने नेपाल की राजशाही को पूरी तरह समाप्त करके लोकतंत्र के दरवाज़े पर खड़ा कर दिया था। हाँ, लोकतंत्र तो पहले भी था लेकिन ‘विश्व हिंदू सम्राट’ की छत्रछाया में।

हमने उनके इरादे के हक़ीक़त में बदलने पर सवालिया निशान लगाया था। प्रचंड का जवाब था कि उन्होंने एकीकृत माओवादी पार्टी बनाने के लिए अपने ‘मशाल’ ग्रपु का लोप कर दिया था, अगर ज़रूरत पड़ी तो कम्युनिस्ट पार्टी बनाने के लिए अपनी माओवादी पार्टी भी ख़त्म कर देंगे।

संशय की वजह थी। भारत ही नहीं दुनिया का इतिहास इस मामले में उलट है। कम्युनिस्ट, एकता के लिए नहीं विभाजन के लिए जाने जाते हैं। कभी क्रांति की लाइन के सवाल पर तो कभी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की समझ के नाम पर, तो कभी किसी और नाम पर। विभाजन के बाद पूर्व कॉमरेडों में शत्रुता का भाव ज़्यादा रहा है। यहाँ तक कि कई बार पार्टी लाइन से अलग जाने वालों को वर्गशत्रु से भी बड़ा शत्रु माना गया। उन्हें ग़लत साबित करने में ही पूरी ऊर्जा लगा दी गई।

लेकिन हिमालय की तलहटी में बसे इस छोटे से देश के कम्यनिस्टों ने पहाड़ पर जमी रहने वाली बर्फ़ को अपनी गर्मजोशी से पिघलाकर उम्मीदों की नदी बहा दी। कम्युनिस्ट घोषणापत्र के प्रकाशन (21 फ़रवरी 1848) की 170वीं वर्षगाँठ के ठीक दो दिन पहले 19 फ़रवरी 2018 को नेपाल की दोनों प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियाँ एक हो गईं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (संयुक्त मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने विलय के मसौद पर हस्ताक्षर कर दिए। नयी पार्टी का नाम नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी होगा।

इसी के साथ दोनों पार्टियों और उनके जनसंगठनों को भंग करके एक नई शुरुआत की जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी की कांग्रेस के पहले दोनों पार्टियों के वर्तमान अध्यक्ष के.पी शर्मा ओली और प्रचंड एक साथ नयी पार्टी का नेतृत्व करेंगे और बारी-बारी से सरकार के प्रमुख बनेंगे।

पिछले दिनों नए संविधान के तहत हुए हुए नेपाल के संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन को बड़ी जीत मिली थी। सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष के.पी.शर्मा ओली दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने। ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल को 275 सदस्यों वाली संसद में 121 सीटें और सीपीएन-माओवादी को 53 सीटें मिली थीं।

और फिर प्रचंड ने वह कर दिखाया जो जुलाई 2015 में हमसे कहा था – एक कम्युनिस्ट पार्टी बनाने के लिए अपनी पार्टी का लोप। ऐसा नहीं कि इस प्रक्रिया में ओली या अन्य कम्युनिस्ट नेताओं का योगदान नहीं है, लेकिन किसी ‘माओवादी कमांडर’ का इस क़दर लचीला होना आम बात नहीं है।

नेपाल की यह घटना अपने आप में अनोखी और ख़ासतौर पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों के लिए सबक है। यह संयोग नहीं कि नेपाल में कम्यनिस्ट जैसे-जैसे मुख्यधारा बनते गए, भारत के कम्युनिस्ट हाशिये पर सिमटते गए। नेपाल के कम्युनिस्टों ने नई परिस्थितियों के हिसाब से व्यक्तित्वों और पार्टी नाम का मोह छोड़कर नए रास्ते चुने, जबकि भारत में सहयोग से ज़्यादा अलगाव के बिंदुओं पर ज़ोर दिया जाता रहा। संयोग नहीं कि सिर्फ़ दस साल पहले जहाँ भारत की केंद्र सरकार कम्यनिस्टों के समर्थन पर निर्भर थी, वहीं आज वे बंगाल जैसा क़िला खो चुके हैं और त्रिपुरा तथा बंगाल छोड़ शेष भारत में (चुनावी लिहाज से) हाशिये पर चले गए हैं। गैरसंसदीय रास्ते से क्रांति का उद्घोष करने वाले घने जंगलों के मोहताज हैं और सड़क और पुल उड़ाने जैसा ‘क्रांतिकारी धमाका’ करते रहते हैं।

संसदीय रास्ते पर चलने वाली भारत की मुख्य कम्युनिस्ट पार्टियों- सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एम.एल) की कांग्रेस अगले दो महीनों में होगी। लेकिन मिलजुल कर एकताबद्ध वाम विकल्प देश को देने की तड़प कहीं नज़र नहीं आ रही है।  सभी को अपना रास्ता सही लगता है और सभी हाशिये पर हैं। इन पार्टियों के नेता बहुत मेहनत से अपनी भाषा और नारे गढ़ते हैं, लेकिन जनता को समझ नहीं आते।

ऐसे में कई वाम समर्थकों का मानना है कि कभी नेपाल के कम्युनिस्ट नेता, भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन से सीखते थे, लेकिन अब इस प्रक्रिया को उलटने का वक्त आ गया है।

 

(वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव मीडिया विजिल के संस्थापक संपादक हैं।)

 

 

प्रचंड के साथ  पंकज श्रीवास्तव की बातचीत गवर्नेंस नाऊ  के अगस्त 2015 के अंक में छपी थी। अाप नीचे लिंक पर खटका लगाकर पढ़ सकते हैं–

 

India’s Maoists will join the peace process one day: Prachanda

 



 

 

3 COMMENTS

  1. U mesh chandola

    You want Syriza edition of India ? Syriza of Greece is friendly to Israel…. Wanna go to the way ?

  2. U mesh chandola

    What is right path ? CPI, CPM, Cpiml ? Let us do debate. Marxism has 2 integral components. Steel firmness in principles And flexibility in practice. And what is right line ? State and revolution by Lenin and Mao tells us. Examples of 10 nations tell us that even if communist comes to power in a bourgeois democracy they will be sabotaged. Even Parliament can be destroyed physically. Revisionist Communist patties could not challenge small revolutionary organisations in polemic. And their intentions are doubtful. Last year what top leadership did in 1 Day 2 day strikes ? Sitting in A/C cars in Delhi they were informed by their footsoldiers on grounds….”Come to this place Comrade. Now crowd is too much. Leadership comes. Clean throat for 5 minutes. Went back to AC cars. Is not a 2 day annual strike a ritual ? Citu is everywhere be it in any PSU ,Aganwadi, ASHA . Still huge selling of PSU going on. What economic struggle have you done Comrade. Only diluted struggle…? helped corporates while auto workers of India is ready to wage an all out war. Ask any conscious worker.They are afraid that their lower cadres Will read, understand Marx, Lenin, Mao masterpieces. Even a c c member of the Uttarakhand Cpiml told me ” Marx didn’t wrote Gita .” Write your Geeta Mr General secretary, CPM, Cpiml. Another said , Marxism is a guide to action. Is it ? But what is Marxism ? Merely ” Abolition of private property? Don’t forget you need elaborate description. Is not it’s true that most violent struggle was fought under leadership of small groups like MASK , inqlabimazdoorkendra and not under citu etc. Why CPI, CPM , Cpiml could not get even ten thousand votes if combined…. average total votes only 3000? An area having million of workers (. NCR )… reference Samayantar magazine …

  3. U mesh chandola

    Watch on. This combination is useless.Only wait. Revolutionaries have no doubt.

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