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ITI करनाल के छात्रों-शिक्षकों पर हमले के दोषी पुलिसवालों को ही खट्टर सरकार ने सौंप दी जांच!

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बाबू मूल चंद जैन राजकीय आईटीआई करनाल में 12 अप्रैल 2019 को छात्रों व शिक्षकों पर हरियाणा पुलिस द्वारा बेरहमी से किए गए लाठीचार्ज, फायरिंग व तोड़फोड़ के पूरे घटनाक्रम के दौरान एसपी करनाल व दो डीएसपी मौके पर मौजूद थे और सारे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में क्या उन्हीं एसपी करनाल के मौजूद रहते हुए एएसपी महोदय से निष्पक्ष जांच किए जाने की आशा की जा सकती है? दूसरी जांच कमेटी जो एसडीएम करनाल के नेतृत्व में बनी है, जब पुलिस आईटीआई परिसर में अपना दमनचक्र चला रही थी तो वे भी वहां मौजूद थे। क्या वे पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ बिना किसी दबाव के अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट दे सकेंगे? 

16 अप्रैल 2019 को जन संघर्ष मंच हरियाणा की एक तथ्यान्वेषी टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। टीम का नेतृत्व मंच की महासचिव सुदेश कुमारी ने किया। टीम में अन्य सदस्य मंच के प्रदेश प्रवक्ता डॉ लहना सिंह, सचिव सोमनाथ, एडवोकेट कविता विद्रोही व सूही सवेर मीडिया के मुख्य संपादक शिव इंदर सिंह रहे। आईटीआई करनाल के प्रिंसिपल, शिक्षकों व अन्य स्टाफ, पड़ोस के दुकानदारों, मृतक छात्र के परिजनों से बातचीत करने तथा घटनास्थल का मुआयना करने के बाद निम्नलिखित तथ्य सामने आए:

  1. बाबू मूल चंद जैन राजकीय आईटीआई करनाल में सन 1963 में बनी थी। यह आईटीआई करनाल शहर में कुंजपुरा रोड पर स्थित है। इस समय करीब 1800 छात्र इसमें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 90 फ़ीसदी छात्र दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से बस द्वारा यहां पढ़ने आते हैं। पर्याप्त सरकारी बसें न होने के कारण बसों में भीड़ रहती है इसलिए अधिकांश बसों के चालक पास होल्डर छात्रों को बसों में बैठाते भी नहीं हैं। बसों को जानबूझकर बस स्टॉप पर न रोक कर आगे पीछे रोका जाता है। इससे छात्र-छात्राओं को आईटीआई में आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई बार पहले भी बस में चढ़ते उतरते समय दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। दिनांक 11 अप्रैल सायं समय 5:15 बजे रीन्डल गांव निवासी आईटीआई के एक 19 वर्षीय छात्र निकित की बस ड्राइवर की लापरवाही के कारण हरियाणा रोडवेज की बस के नीचे कुचले जाने के कारण मौके पर ही मृत्यु हो गई। इससे मौके पर उपस्थित आईटीआई के छात्रों में रोष फैल गया। वे मृतक छात्र के शव के पास एकत्रित हो गए और रोष जाहिर किया। इसकी वजह से जाम लग गया। पुलिस द्वारा दोषी ड्राइवर को गिरफ्तार किए जाने का आश्वासन देने पर वे शांत हुए और तब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
  2. दिनांक 12 अप्रैल 2019 सुबह 8:30 बजे छात्र आईटीआई में आने लगे और उन्हें पता चला कि दोषी ड्राइवर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इससे  उनमें रोष फैल गया और कुछ छात्रों ने आईटीआई के सामने सड़क पर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। प्रिंसिपल बलदेव सिंह सगवाल तथा अन्य शिक्षकों को जब पता चला कि मृतक छात्र निकित की मौत के जिम्मेदार बस ड्राइवर की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण छात्रों में व्यापक रोष फैला हुआ है तो उन्होंने मॉर्निंग असेंबली में माइक लगाकर सभी छात्रों को बुलाया। अधिकांश छात्र मॉर्निंग असेंबली में आ गए। प्रिंसिपल व अन्य शिक्षकों ने छात्रों को समझाया कि सारे स्टाफ को छात्र निकित की दर्दनाक मौत का गहरा दुख है। शांति बनाए रखें, प्रदर्शन करना ठीक नहीं है, आपकी मांगों के बारे में हम खुद आपके साथ डीसी महोदय के पास जाकर बात करते हैं। प्रिंसिपल महोदय व स्टाफ ने छात्रों से उनकी मांगों के बारे में जाना। छात्रों की मांगे थीं: 1. छात्र की मौत के जिम्मेदार बस ड्राइवर की गिरफ्तारी, 2.मृतक छात्र के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और 3. जहां से भी छात्र बस में चढ़ते उतरते हैं वहां बसों का ठहराव। इस बात पर सहमति बन गई थी कि इन मांगों को लेकर 10 छात्र व 10 शिक्षकों की एक कमेटी डीसी करनाल से बात करेगी। इससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई थी। प्रिंसिपल व स्टाफ द्वारा छात्रों को समझाए जाने के वीडियो मौजूद हैं।
  3. सुबह करीब 9:05 पर प्रिंसिपल ने डीसी करनाल से छात्रों की मांगों बारे मिलने बारे फोन द्वारा बात की और डीसी महोदय ने बात करने के लिए सहमति दे दी। कुछ समय बाद ही डीसी का प्रिंसिपल को दोबारा फोन आया कि आप लोग मेरे कार्यालय में न आएं,  मैं एसडीएम नरेन्द्र पाल मलिक को प्रशासन की ओर से आपके पास छात्रों की मांगों के बारे में बातचीत करने के लिए आईटीआई में ही भेज रहा हूं। सारे छात्र इस बात पर सहमत हो गए थे लेकिन इसी दौरान पुलिस ने आईटीआई का मेन गेट बंद कर दिया और कुछ छात्र जो बाहर थे और अंदर आना चाहते थे, उन्हें पुलिस ने आईटीआई परिसर में आने से रोक दिया।
  4. अधिकांश छात्र आईटीआई परिसर में मौजूद थे। अध्यापकों ने छात्रों से बार-बार अपील की कि वे शांति बनाए रखें, कोई भी छात्र बाहर ना जाए और जो भी साथी बाहर हैं उन्हें भी फोन करके वे अंदर बुला लें। शिक्षकों के कहने पर अधिकांश छात्र छात्राएं अपने क्लास रूम में भी चले गए थे। जब आईटीआई परिसर के अंदर मौजूद कुछ छात्रों को यह पता चला कि पुलिस बाहर खड़े छात्रों को गेट के अंदर आने नहीं दे रही है तो 10-15 छात्र-छात्राएं मेन गेट की ओर गए। पुलिस ने उन्हें बाहर जाने से रोका और बिना चेतावनी दिए बेरहमी से छात्रों पर लाठीचार्ज करना शुरू कर दिया। बचाव में छात्रों ने भी पुलिस पर पथराव किया। दोनों तरफ से पथराव हुआ और पुलिस द्वारा फायरिंग भी की गई। अखबारों में छपी फायरिंग करते हुए पुलिसकर्मियों की फोटो को देख कर यह भी साफ कहा जा सकता है कि पुलिस की बन्दूक की दिशा हवाई फायरिंग की नहीं बल्कि निशाना साधने वाली है। भारी संख्या में पुलिसबल लाठी चार्ज करता हुआ आईटीआई परिसर के अंदर बिना अनुमति लिए घुस गया जो भी छात्र छात्रा या शिक्षक सामने आया उन्हें बेरहमी से पीटा गया। सीओई (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बिल्डिंग के गेट के आगे दरवाजों के टूटे कांच के शीशे, घायल छात्र छात्राओं का फर्श पर बिखरा खून, दूसरे तल तक की सीढियों पर पड़े खून के छींटे व पिटाई के कारण कपड़ों में निकले यूरीन के निशान और इधर-उधर टूटा पड़ा हुआ सामान, टूटे हुए दरवाजों के कुंडे-चिटकनियां साफ ब्यान कर रहे थे कि पुलिस ने कितनी बेरहमी से संवेदनहीन होकर छात्र-छात्राओं की पिटाई की है। इस बिल्डिंग के सेकंड फ्लोर तक जाकर पुलिस ने छात्रों की पिटाई की और घायल छात्रों को पीटते हुए नीचे लाई।
  5. आईटीआई परिसर में वैसे तो जगह-जगह महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के बोर्ड लगाए गए हैं परंतु पुरुष पुलिसकर्मियों ने सभी मर्यादाओं को तोड़ कर बेशर्मी से छात्राओं को पीटा है और बाथरूम के अंदर छुपी छात्राओं को भी बख्शा नहीं गया। महिला विंग की शिक्षिकाओं ने बेहद दहशत व दर्द के साथ कहा कि ऐसे में अब सरकार को यह और लिखवा देना चाहिए कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, बेटी पिटवाओ’। उन्होंने कहा कि  महिलाओं के साथ कोई भी अपराध घटित हो जाने पर महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर सहायता के लिए पुलिस को फोन किया जाता है और सहायता के लिए पुलिस को बुलाया जाता है, यदि पुलिस ही छात्राओं पर इस तरह से अत्याचार करे तो इसकी शिकायत  हम किससे करें? उन्होंने बताया कि छात्राएं जो महिला विंग में पढ़ती हैं हमने उन्हें तीन तीन दरवाजे बंद करके अंदर बैठाया था। नियमानुसार 50 वर्ष से कम आयु के पुरुष को महिला आईटीआई में शिक्षक भी नियुक्त नहीं किया जा सकता है परंतु पुरुष पुलिसकर्मियों ने सभी मर्यादा तोड़ दी और महिला विंग के अंदर घुसकर दरवाजा पीटा और भद्दी गालियां देकर कहा कि उस छात्रा को बाहर निकालो जो अपने आप को प्रधान कहती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश हम दरवाजा बंद नहीं कर पाती तो हमारे विंग की छात्राओं व हम पर भी पुलिस द्वारा कहर बरपाया जाता। महिला आईटीआई में कार्यरत एक बधिर कर्मचारी ने बताया कि पुलिस कर्मचारी एके 47 लेकर ऐसे भाग रहे थे कि जैसे आईटीआई में उग्रवादी घुसे हुए हो और उन्होंने मुझे भी पीटा। महिला शिक्षकों ने यह भी बताया कि संस्थान में कार्यरत अनुदेशक, जो कि देख नहीं सकते, वे कहते रहे कि भाई क्या बात है, मैं देख नहीं सकता हूं, उन्हें भी 5 पुलिस वालों ने बेरहमी से पीटा।
  6. प्रिंसिपल व एक अन्य शिक्षक की कारें भी डंडे मार कर तोड़ डाली गईं। एक कार आज भी वहां खड़ी है जिसके शीशे टूटे पड़े हैं। आईटीआई परिसर में लगे 32 सीसी टीवी कैमरों की डीवीआर को पुलिस प्रिंसिपल रूम से उखाड़कर अपने साथ ले गई। प्रिंसिपल के कमरे में उखड़ा पड़ा इलेक्ट्रिक बोर्ड व तारें इसकी गवाह हैं। प्रिंसिपल रूम में ही शिक्षकों को पीटा गया। दो शिक्षक डर के मारे बाथरूम में छुप गए। डंडे मार कर बाथरूम का दरवाजा तोड़ने की भी कोशिश की गई। प्रिंसिपल को उन्हीं के कमरे से पुलिसकर्मी कॉलर से पकड़कर मेन गेट के बाहर सड़क पर ले आए, जहां उनकी पुलिस वालों ने डंडे मार कर पिटाई की और उनका मोबाइल फोन तक छीन लिया गया। और ताज्जुब की बात है कि इस सारे घटनाक्रम के दौरान डीसी करनाल द्वारा भेजे गए उनके प्रतिनिधि एसडीएम करनाल श्री नरेन्द्र पाल मलिक मौके पर मौजूद रहे और उनके सामने ही पुलिस तांडव मचाती रही तथा उनके रोकने पर रुकी भी नहीं। तब एसपी करनाल सुरेंद्र सिंह भोरिया के कहने पर उन्हें छोड़ा गया। डीसी करनाल के कहने के बाद शाम करीब 4 बजे प्रिंसिपल को मोबाइल फोन वापिस दिया गया। प्रिंसिपल ने पुलिस द्वारा उनके कमरे से धक्केशाही से डीवीआर तोड़ कर ले जाने व पुलिस की शर्मनाक कार्यवाही बारे शिकायत भी की हुई है जिसकी जांच चल रही है।
  7. प्रिंसिपल रूम के साथ वाले कमरे में बैठे महिला स्टाफ ने बताया कि महिला स्टाफ तथा कुछ पुरुष स्टाफ ने इस कमरे का अंदर से दरवाजा बंद करके सामान से भरी हुई एक भारी अलमारी रख दी थी जिसकी वजह से पुलिस दरवाजा नहीं खोल सकी और इस कारण हमारी जान बच गई।
  8. आईटीआई परिसर की पुलिस  ने बिजली भी काट दी थी, जिससे लैंडलाइन फोन भी बंद हो गया था। जिओ नेटवर्क यंत्र भी पुलिस तोड़कर ले गई है, परिसर में लगे हुए कई अन्य बोर्ड भी तोड़ दिए गए हैं।
  9. आईटीआई में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि वे अब भी दहशत में हैं। वह लगभग 20 साल से नौकरी कर रहे हैं लेकिन उन्होंने 20 साल की नौकरी के दौरान ऐसा जुल्म कभी नहीं देखा है। उन्हें रात को भी नींद नहीं आ रही है। हर समय उन्हें पुलिस द्वारा ढाया गया वही खूनी मंजर का दृश्य नजर आता है।
  10. लाठीचार्ज के कारण तीन शिक्षकों को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें फ्रैक्चर हैं। काफी छात्रों को चोटें आई हैं और उन्हें भी फ्रैक्चर हैं। कई छात्र व शिक्षकों ने दहशत के मारे अपना मेडिकल भी नहीं करवाया है। यह भी सुनने में आया है कि छात्राओं पर भी मुकदमे बनाए गए हैं। बहुत से छात्र जो घायल हो गए थे, उन्हें बसों में भरकर सिविल लाइन थाने में ले जाया गया, वहां उनसे शिक्षकों को भी मिलने नहीं दिया गया। डीसी करनाल के हस्तक्षेप के बाद शिक्षक उनसे मिल सके। अपराधी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित 103 छात्र-छात्राओं पर मुकदमा बना दिया और अब वे जमानत पर हैं।

    सीसीटीवी का डीवीआर जिसे पुलिस ने तोड़ दिया और कैमरे उठा ले गई
  11. हमारी टीम ने देखा कि वर्कशॉप का शटर बंद था, शिक्षकों ने बताया कि पुलिस ने इसके अंदर बैठे छात्रों के साथ भी मारपीट की और सामान को नुकसान पहुंचाया है।
  12. शिक्षकों ने बताया कि वे आज भी पुलिस के इस जुल्म के कारण दहशत में हैं। वे उस रात खाना भी ना खा सके, आज भी उन्हें रात को नींद नहीं आती है और बार बार उन्हें पुलिस द्वारा किया गया खूनी तांडव नजर आता है। उन्होंने बताया कि उनके पास अभिभावकों के फोन आ रहे हैं कि इस आईटीआई में अब वे अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे। आगामी 10 जून से परीक्षाएं होने वाली हैं, हो सकता है कि दहशत के मारे सभी बच्चे परीक्षाएं भी ना दे सकें।
  13. आईटीआई स्टॉफ ने बताया कि वे मृतक छात्र के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते थे लेकिन पुलिस द्वारा किए गए इस अत्याचार के कारण वे मृतक छात्र के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके।
  14. यह आईटीआई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के हलके में पड़ती है लेकिन आज तक मुख्यमंत्री ने न तो प्रिंसिपल महोदय या किसी अन्य स्टाफ सदस्य से पुलिस द्वारा ढाए गए इस जुल्म के बारे में अफसोस जाहिर किया है और न ही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई सख़्त कार्रवाई की है। लाठीचार्ज में घायल छात्र-छात्राओं व शिक्षकों का हाल-चाल भी नहीं पूछा है। मृतक छात्र निकित के पिता श्री राजेश कुमार तथा उनके वृद्ध दादा ने रोते हुए कहा कि हमारे बच्चे की मौत की जिम्मेदार हरियाणा सरकार व बस ड्राइवर है। यदि रोडवेज की सुचारु व्यवस्था होती और जिम्मेदार चालक परिचालक भर्ती किए होते तो हमारे बच्चे की मौत नहीं होती। मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी घटना को मात्र दुखदायी घटना बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। अभी तक मृतक छात्र के परिवार को कोई मुआवजा तक देने की घोषणा नहीं की गई है।
  15. पुलिसकमिैयां के द्वारा आईटीआई के छात्रों व शिक्षकों पर ढाये गए इस अत्याचारी कुकृत्य की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने और अखबारों में खबरें छप जाने के कारण चारों ओर हरियाणा पुलिस व हरियाणा सरकार की किरकिरी हो रही है। अभी तक मात्र तीन हवलदार लाइन हाजिर किये गए हैं। सारे मामले की जांच के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं। एक कमेटी एएसपी करनाल के नेतृत्व में बनी है। दूसरी कमेटी एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक की अगुवाई में बनी है जिसमें कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त निदेशक आरपी श्योकंद तथा जीआई जसविंदर संधू शामिल हैं। एसडीएम की अगुवाई में बनी कमेटी की रिपोर्ट 21 अप्रैल तक आने वाली है। एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक वही व्यक्ति हैं जिनके सामने प्रिंसिपल का पुलिस ने कॉलर पकड़ा गया और उन्हें गेट से बाहर ला कर पीटा गया। इनके द्वारा रोकने पर भी पुलिस ने प्रिंसिपल को नहीं छोड़ा था।
खून के निशान अब भी ताज़ा हैं

 प्राप्त तथ्यों के आधार पर पुलिस दमन पर उभरते सवाल:

– क्या छात्रों द्वारा बस ड्राइवर की लापरवाही के कारण बस के नीचे कुचले जाने के कारण हुई अपने साथी की दर्दनाक मौत के जिम्मेदार बस ड्राइवर की गिरफ्तारी की मांग करना अनुचित है?

– पुलिस ने समय रहते आरोपी बस ड्राइवर को गिरफ्तार क्यों नहीं किया?

– दिनांक 12 अप्रैल को आरोपी बस ड्राइवर की गिरफ्तारी, मृतक छात्र के परिवार को मुआवजा तथा बस स्टॉप, जहां से छात्र बसों में चढ़ते उतरते हैं, वहां बसें रोके जाने की मांग पर ध्यान देने की बजाय पुलिस ने दमन का रास्ता क्यों अपनाया और छात्रों के दर्द को क्यों नहीं समझा गया?

– आईटीआई प्रिंसिपल व स्टाफ द्वारा जब छात्रों को शांत किया जा रहा था व छात्र डीसी करनाल से अपनी मांगों को लेकर शिक्षकों के साथ मिलकर बातचीत करने को तैयार थे और यह सब मॉर्निंग असेंबली में लगे माइक के जरिये बोला जा रहा था जिसकी आवाज बाहर खड़े पुलिस अधिकारियों को भी सुनाई दे रही थी तब पुलिस ने मेन गेट बंद क्यों कर दिया और बाहर खड़े छात्रों को अंदर आने क्यों नहीं दिया गया?  और बेरहमी से ताबड़तोड़ लाठीचार्ज क्यों शुरू कर दिया? क्या छात्रों को उकसाकर माहौल को बिगाड़ने के लिए पुलिस पूरी तरह जिम्मेदार नहीं है?

– डीसी करनाल द्वारा भेजे गए उनके प्रतिनिधि एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक द्वारा छात्रों की मांगों पर वार्ता शुरू होने से पहले ही लाठीचार्ज शुरू कर देना और AK47 जैसे हथियारों से फायरिंग करना क्या सही है? शिक्षण संस्थान में क्या आतंकवादी घुसे हुए थे?

– आईटीआई परिसर में पुलिस किसकी अनुमति से आई? क्या आईटीआई के सभी छात्र-छात्राएं, प्रिंसिपल व शिक्षक अपराधी  मान लिए गए थे? सीओई बिल्डिंग जोकि मेन गेट से बहुत दूर है उसके अंदर ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर व सेकंड फ्लोर के कमरों में बैठे छात्र वहां बैठे-बैठे मेन गेट के बाहर सड़क पर खड़ी पुलिस पर पथराव नहीं कर सकते हैं। तथ्य यह है कि इस बिल्डिंग में बैठे व्यक्ति की आवाज भी मेन गेट तक सुनाई नहीं दे सकती तो फिर किस आधार पर पुलिस ने इस बिल्डिंग में घुस कर पहली, दूसरी व तीसरी मंजिल पर बैठे छात्रों को पीटा और दरवाजों के कुंडे व चिटकनियां तोड़ दीं और धक्के मारते व पीटते हुए छात्रों को बाहर ले जाकर गिरफ्तार कर लिया।

– पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं को क्यों पीटा और सारे नियम तोड़कर महिला आईटीआई में क्यों घुसे? बाथरूम में छिपी छात्राओं को भी पीटा गया।

– शिक्षकों व प्रिंसिपल को क्यों पीटा गया? क्या प्रिंसिपल व एक इंस्ट्रक्टर को एक अपराधी की तरह कॉलर पकड़कर ले जाया जाना शर्मनाक नहीं है? प्रिंसीपल का फोन क्यों छीना गया? एक शिक्षक का मोबाइल फोन क्यों तोड़ा गया? असल में पुलिस को भय था कि कहीं प्रिंसिपल व शिक्षक अपने से उच्च अधिकारियों को पुलिस द्वारा की जा रही गुंडागर्दी के बारे में न बता दें या फिर रिकार्डिंग न कर लें। प्रिंसिपल व एक शिक्षक की कार को तोड़ा जाना स्पष्ट बताता है कि पुलिस खुली गुंडागर्दी पर उतरी हुई थी।

– पुलिस का कहना है कि छात्र नियंत्रण से बाहर हो गए थे और मजबूरन पुलिस को लाठीचार्ज और फायरिंग करनी पड़ी। यदि ऐसा था तो निश्चित तौर पर यह सब घटनाक्रम आईटीआई परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया तब फिर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को क्यों तोड़ा और उसे अपने साथ ले गई? पुलिस जिओ नेटवर्क के यंत्र को तोड़कर साथ ले गई। क्या पुलिस ने यह सब अपने कुकृत्य को छिपाने के लिए नहीं किया है?

-पुलिस अपने कुकृत्य को छुपाने के लिए बार-बार जुबान बदल रही है। कभी कहती है कि छात्रों ने पुलिस पर पथराव किया इसलिए हमने बचाव में लाठीचार्ज व फायरिंग की, कभी आरोप लगा रही है कि छात्र अंदर पेट्रोल बम बना रहे थे और अब 17 अप्रैल को अखबार में दिए गए ब्यान में एसपी करनाल कह रहे हैं कि पुलिस ने आईटीआई परिसर में रखी ईवीएम मशीनों को खतरा पैदा हो जाने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से लाठीचार्ज व फायरिंग की। सवाल है कि ईवीएम मशीनों की सुरक्षा इतने खतरे में थी तो डीवीआर व जिओ नेटवर्क यंत्र को साथ ले जाने की तरह ईवीएम मशीनों को आईटीआई परिसर से उसी समय क्यों नहीं उठाया गया?

– पूरे घटनाक्रम के दौरान एसपी करनाल व दो डीएसपी मौके पर मौजूद थे और सारे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में क्या उन्हीं एसपी करनाल के मौजूद रहते हुए एएसपी महोदय से निष्पक्ष जांच किए जाने की आशा की जा सकती है? दूसरी जांच कमेटी जो एसडीएम करनाल के नेतृत्व में बनी है। जब पुलिस आईटीआई परिसर में अपना दमनचक्र चला रही थी तो वे भी वहां मौजूद थे, क्या वे पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ बिना किसी दबाव के अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट दे सकेंगे? यह दोनों कमेटियां सारे घटनाक्रम पर लीपापोती करने के लिए बनाई गई हैं इनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती है। निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच करवाई जानी चाहिए।

जन संघर्ष मंच हरियाणा सरकार से मांग करता है कि इस कांड के जिम्मेदार दोषी पुलिस कर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत निलंबित करके जेल भेजा जाए। जांच के नाम पर लीपापोती करने की बजाय उच्च स्तरीय न्यायिक जांच करवाई जाए। छात्रों पर बनाए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। मृत छात्र के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा और  दोषी बस ड्राइवर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लाठी चार्ज में घायल छात्र व शिक्षकों का फ्री इलाज व मुआवजा दिया जाए। जहां से भी छात्र बसों में चढ़ते उतरते हैं वहां सभी बसें रोकी जाएं और उल्लंघना करने वाले चालक परिचालक के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाए। जरूरत के अनुसार और नई बसें चलाई जाएं।

जारीकर्ता
सुदेश कुमारी
प्रांतीय महासचिव, जन संघर्ष मंच हरियाणा
18 अप्रैल 2019

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