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BHU: डॉ. फिरोज खान के समर्थन में छात्रों ने निकाला जुलूस, सभा का आयोजन

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बनारस हिन्दू विश्विद्यालय में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेन्ट प्रोफेसर फ़िरोज़ खान की नियुक्ति के विरोध में बैठे मुट्ठीभर छात्रों के जवाब में जॉइंट ऐक्शन कमेटी बीएचयू व साझा संस्कृति मंच द्वारा डॉ फिरोज खान के समर्थन में 20 नवंबर को लंका गेट पर सभा व रविदास गेट तक मार्च किया गया और 21 नवंबर को भी भारत माता मंदिर काशी विद्यापीठ में सभा आयोजित की गई।

20 नंवबर को आयोजित सभा में कहा गया कि डॉ फ़िरोज़ खान को तत्काल नौकरी पर रखा जाना चाहिए। विवि को उनकी सुरक्षा का भरोसा दिलाना चाहिए और जिम्म्मेदारी लेनी चाहिए।

विश्वविद्यालय में धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है। बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय भी कहें हैं कि भारत न सिर्फ हिंदुओं का है बल्कि मुसलमान, सिख, जैन और ईसाई सबका है।
सभा में ‘कबीर दास की धरती पर फ़िरोज़ खान का स्वागत है’, ‘महामना की धरती पर फिरोज खान का स्वागत है’, रविदास व तुलसीदास के धरती पर फ़िरोज़ खान का स्वागत है’, व ‘महामना की कामना सद्भावना-सद्भावना’ आदि नारे लगाए गए।

सभा में यह सुनिश्चित किया गया कि बीएचयू के छात्र-छात्रा फिरोज खान के समर्थन व स्वागत में है तथा भारत जैसे देश में धर्म के आधार पर भेदभाव कत्तई स्वीकार करने की बात नही है। भारतीय संस्कृति बहुलतावाद और समावेशी प्रकृति की रही है। बनारस की पहचान दारा शिकोह को संस्कृत पढ़ाने के गंगा जमुनी तहजीब से जुड़ी है। यह जमीन नजीर बनारसी और बिस्मिल्लाह खान साहब की है। वो बिस्मिल्लाह जो पूरे जीवन मन्दिर की चौखट पर शहनाई बजाने को ही अपना मुस्तकबिल बताते रहे।

स्वागत मार्च और सभा मे धनञ्जय त्रिपाठी, विकास सिंह, डॉ लेनिन रघुवंशी, तौसीफ कुरैशी, रामायण पटेल, प्रियेश पाण्डेय, दीपक राजगुरु, राज अभिषेक, विवेक, तबस्सुम, अनंत, कुलदीप आदि मौजूद रहे।

वहीं 21 नवंबर को जॉइंट एक्शन कमिटी और साझा संस्कृति मंच द्वारा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्त असिस्टेन्ट प्रोफेसर फ़िरोज़ खान प्रकरण मे भारत माता मंदिर काशी विद्यापीठ में सभा आयोजित की गई।

सभा मे बनारस को बहुलतावादी और समावेशी प्रकृति का शहर बतलाया गया। इस शहर की पहचान में जैन धर्म के चार तीर्थंकर भी शामिल है। गौतम बुद्ध यंही अपना पहला उद्बोधन देते है। आर्य समाज के प्रतिनिधि स्वामी प्रमोद आर्य ने कहा कि बनारस बहुत पहले से धर्मो के मामले में सहिष्णु रहा है। यह धरती कबीर और रैदास के कार्यस्थली रही है।


कीनाराम बाबा, तैलंग स्वामी, योगऋषि लाहिड़ी महाशय जैसे सन्त परम्परा के लोगो ने काशी को एक अलग पहचान दिलाई है। महर्षि पतंजलि ने यँहा से योग दर्शन प्रतिपादित किया। ये सब धरोहर कर्मकांड से अलग धारा के विचार रहे है। आध्यात्मिक और जीवन मूल्य से भरे इस इस परंपरा ने इस सरजमी को आनंद कानन और अविमुक्त क्षेत्र बनाया है। शिव की इस प्रिय नगरी को अपने विवि का क्षेत्र बनाने के पहले मालवीय जी के मन मे यही धारणा रही होगी तभी तो उन्होंने विवि बनाते समय कहा कि ” यह देश सिर्फ हिंदुओ का नही है। यह देश जितना हिंदुओ का है उतना ही मुसलमान का भी है। सिख और ईसाई का भी है। बौद्ध और जैन का भी है। ”

सभा में चर्चा हुई कि बात सिर्फ़ फ़िरोज़ खान की नहीं हैं बल्कि लोकतंत्र, भारत के संविधान और धर्मनिरपेक्षता की है। महामना कहें हैं कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना बड़े उद्देश्य के लिए हुई है। धर्म के आधार पर यहाँ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। डॉक्टर फ़िरोज़ खान को तत्काल नौकरी पर रखा जाना चाहिए। भाषा का धर्म से कोई सम्बंध नहीं होता। विवि को उनकी सुरक्षा का भरोसा दिलाना चाहिए और जिम्म्मेदारी लेनी चाहिए।
विश्वविद्यालय में धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है। बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय भी कहें हैं कि भारत न सिर्फ हिंदुओं का है बल्कि मुसलमान, सिख, जैन और ईसाई सबका है।

सभा में ‘कबीर दास की धरती पर फ़िरोज़ खान का स्वागत है’, ‘महामना की धरती पर फिरोज खान का स्वागत है’, रविदास की धरती पर फ़िरोज़ खान का स्वागत है’ आदि नारे लगाए गए। सभा में यह सुनिश्चित किया गया कि बीएचयू के छात्र-छात्रा व शहर का नागरिक समाज फिरोज खान के समर्थन व स्वागत में है तथा भारत जैसे देश में धर्म के आधार पर भेदभाव कत्तई स्वीकार करने की बात नही है। भारतीय संस्कृति बहुलतावाद और समावेशी प्रकृति की रही है। बनारस की पहचान दारा शिकोह को संस्कृत पढ़ाने के गंगा जमुनी तहजीब से जुड़ी है। यह जमीन नजीर बनारसी और बिस्मिल्लाह खान साहब की है। वो बिस्मिल्लाह जो पूरे जीवन मन्दिर की चौखट पर शहनाई बजाने को ही अपना मुस्तकबिल बताते रहे।

सभा मे यह तय किया गया कि डॉ फिरोज के मामले में विवि प्रशासन उन्हें सुरक्षा का भरोसा देते हुए सेवा बहाली नही कर पाता है तो बनारस का नागरिक समाज और छात्र अपनी आवाज़ को लामबंद करके 23 नवम्बर 2019 को बीएचयू लँका गेट पर जुटकर शाम 4 बजे एक विशाल मार्च निकालेंगे ।

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