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सुलहकुल: नफ़रत के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे धर्मगुरु, लेखक, जज और नेता-अभिनेता !

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ऐसे वक़्त में जब गोडसे का गौरवगान करने वाली आतंकी टोलियाँ तिरंगा थामे सड़क पर हों, सद्भवाना और सुलहकुल के पक्षधरों को भी अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के शहादत दिवस पर कर्नाटक में ऐसा ही कुछ हुआ। करीब दो लाख लोगों ने सूबे की क़रीब 160 जगहों पर शाम 4:00 से 4:10 के बीच कर्नाटक फॉर हार्मनी (सद्भावना के पक्ष में कर्नाटक) के बैनर तले मानव शृंखला बनाई। इसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधियों के अलावा मशहूर लेखक, कलाकार, अभिनेता, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, किसान, मज़दूर, महिला संगठनों के अलावा तमाम सेक्युलर और वाम पार्टियों के नेता शामिल थे।

मशहूर लेखक डॉ.एम.एम.कलबुर्गी की हत्या के बाद से ही कर्नाटक में फ़ासीवादी ताक़तों से मोर्चा लेने की ज़रूरत को शिद्दत से महसूस किया जा रहा है। इस संबंध तमाम सेमिनार और अन्य कार्यक्रमों के सिलसिले के बाद 5 सितंबर 2017 को ‘कर्नाटक फॉर हार्मनी’ का स्थापना सम्मेलन बंगलुरु में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का उद्घाटन सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने किया था। सीपीआई महासचिव कॉमरेड सुधाकर रेड्डी और तमाम अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों ने इसमें हिस्सा लिया था। यहीँ 30 जनवरी को मानव शृंखला बनाने का आह्वान किया गया था। इसी कार्यक्रम के बाद शाम को घर पहुँचने पर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी।

गौरी लंकेश की हत्या से उपजे आक्रोश के बीच इस कार्यक्रम की प्रदेशव्यापी तैयारी की गई। नतीजा बड़ी तादाद में लोग इसमें शामिल हुए। मैसूर में मशहूर लेखक देवनूर महादेव और मोदी-शाह की नीतियों को देश के लिए खुलेआम ख़तरनाक बता रहे प्रख्यात फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज, तुमकुर में बुज़ुर्ग गाँधीवादी एच.एस.दोरईस्वामी, बैंगलुरु में लेखक प्रो.चंद्रशेखर पाटिल, पूर्व सुप्रीमकोर्ट जज गोपाल गौडा, कुवेमपु भाषा भारती के अध्यक्ष डॉ.के.मारुलासिद्दपा, साहित्य अकादमी अध्यक्ष अरविंद मालगट्टी, पूर्व हाईकोर्ट जज नागमोहन दास, लेखक बरगुरु रामचंद्रप्पा और अभिनेता चेतन, शिमोगा में प्रो.राजेंद्र चेन्नी ने शिरकत की। राज्य के तमाम अन्य स्थानों पर कांग्रेस और वाम समेत अन्य सेक्युलर पार्टयों के नेता शामिल हुए।

मानवशृंखला के बाद जनसभाएँ हुईं जिसमें सांप्रदायिक सद्भाव और भारत की विविधिता की संवैंधानिक मान्यता की रक्षा करने की शपथ ली गई।

वैसे, सूचनाक्रांति के युग में इस कार्यक्रम की जानकारी आमतौर पर हिंदी मीडिया ने नहीं दी। विंध्याचल के उस पार की दुनिया में जब तक बीजेपी का नगाड़ा न बजे, उसके कान बंद ही रहते हैं।

 

 

 

 

(सबरंग से साभार)