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11 दिन हो गए, ‘चोटीकटवा’ मीडिया को ख़बर नहीं ! अनशन तोड़िए मेधा जी !

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नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर 27 जुलाई से अनिश्चतकालीन अनशन कर रही हैं। बड़वानी, मध्यप्रदेश  में जारी इस अनशन में उनके साथ 11 साथी भी हैं। उनकी माँग है कि नर्मदा घाटी के 40 हज़ार परिवारों को डूब से बचाने के लिए सरदार सरोवर बांध के फाटक खोले जाएँ। 

हैरानी की बात है कि मध्यप्रदेश सरकार की कोई रुचि माँगों को पूरा करने पर नहीं है। डाक्टरों ने मेधा समेत 12 अनशनकारियों की सेहत ख़तरे में बताई है लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के लिए यह चिंता की बात नही ंहै । उधर, मीडिया चोटीकटवा का शिकार करने में जुटा है। ऐसे में  इंदौर के रहने वाले गिरीश मालवीय ने मेधा पाटकर से उपवास ख़त्म करने का आग्रह करते हुए जो कहा है, उसे पढ़िए–

 

मेधा पाटकर जी , आप मान क्यो नही जाती है ?

सरकारी अधिकारीयो को भेजा , आप नही मानी, स्थानीय नेताओं ने जोर लगा लिया, आप नही मानी, अब सरकारी संत को भी भेजा है आप मान नही रही है, अब आप क्या चाहती है हम उनको भेजे जिन्होंने नीतीश कुमार की अन्तरात्मा को जगाया है ?
वे आएंगे तो अकेले नही आएंगे पहले सीबीआई को भेजेंगे फिर आपके एनजीओ के विदेशी संबंध की जांच की जाएगी , फिर यह सिद्ध किया जायेगा कि आप विकास विरोधी यानी देश विरोधी शक्तियों से हाथ मिलाये हुए है फिर आपकी अन्तरात्मा के जग जाने की राह देखी जाएगी
ऐसे खेल अन्ना के साथ सफलता पूर्वक खेले जा चुके हैं इसलिये आपके  विरोधी पक्ष की जीत तो तय है, बस आप अपने समय को बस थोड़ा लम्बा ही खींच सकती हैं बस
वैसे ये आप ये पहले ही बोल चुकी हैं कि , गुजरात में अदानी व अंबानी की कंपनियों को पानी देने के लिए सरदार सरोवर बांध का जलस्तर बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को इस बात की चिंता नहीं है कि इससे कितने गांव और परिवार डूबने वाले हैं सरकार ने कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ‘नर्मदा नदी को वेश्‍या बना दिया गया है
बताइये नर्मदा जैसी पवित्र नदी को कोइ वेश्या बनाने की कैसे बोल सकता है ये शब्द ही मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं आप इसे इतनी पवित्र नदी के लिए इस्तेमाल कर रही है,…….छी छी छी, हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री तो नर्मदा सेवा यात्रा निकाल चुके है और सुना है उसके विज्ञापन लॉस एंजिलिस के हवाई अड्डे पर लगे हैं,बताइये वो इतना सब कर रहे हैं और आप कह रही हैं कि नर्मदा नदी से हर रोज 172 करोड़ लीटर पानी कंपनियों द्वारा लिया जा रहा है।
आप यह कह रही हैं कि यह गतिविधि जारी रही तो नर्मदा आने वाले दिनों में यमुना नदी की तरह सूख जाएगी बड़वानी में ही रेत निकालने को लेकर कई बार आंदोलन से जुड़े नेताओं और उत्खनन करने वालों के बीच टकराव हो चुका हैं
देखिये जो आप यहाँ इतना बोल रही है वह दिल्ली में बैठा मीडिया क्यो दिखाएगा भला, उसे तो चोटी कटवा से ही फुरसत नही है
देखिए अब आप मान भी जाइये , क्या हुआ जो सरदार सरोवर का एक बूंद पानी भी मध्यप्रदेश को नहीं मिल रहा और सबसे ज्यादा प्रभावित यहां के लोग ही हो रहे हैं। अधिक से अधिक क्या होगा इस बांध का जलस्तर बढ़ने से सिर्फ विस्थापन बढ़ेगा ना , घर, खेत, पशुधन, दुकानें, धार्मिक स्थल, लाखों की संख्या में पेड़ की जल समाधि हो जाएगी डूब जाने दो धरमपुरी नगर और 244 गांव को हमे तो विकास चाहिये
अब बहुत हो गया मैडम , अब आप उठ जाइये……..


गिरीश मालवीय

लेखक इंदौर मध्यप्रदेश से है, ओर सोशल मीडिया में समसामयिक विषयो पर अपनी कलम चलाते रहते हैं .



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