Home Corona ‘पत्रिका’ के ‘गुलाब’ को आरक्षण में कांटे क्यों दिखते हैं?

‘पत्रिका’ के ‘गुलाब’ को आरक्षण में कांटे क्यों दिखते हैं?

गुलाब कोठारी के इस संपादकीय के प्रकाशित होते ही, राजस्थान ही नहीं, देश भर के अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों की ओर से विरोध से स्वर सामने आने लगे। लॉकडाउन के कारण, विरोध का स्थल बन गया सोशल मीडिया और ट्विटर पर #गुलाब_कोठारी_शर्म_करो हैशटैग ट्रेंड करने लगा।

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हालांकि ‘पत्रिका’ समूह (पूर्व राजस्थान पत्रिका) के संपादक, गुलाब कोठारी इस बात पर खुश भी हो सकते थे कि अभी तक हिंदी पट्टी में संपादकीय पढ़ा जाता है और वो ऐसे संपादकों की सूची में शामिल हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, उनके जिस संपादकीय की देश भर में चर्चा हो रही है – वो किसी अच्छी वजह से नहीं बल्कि आरक्षण और सामाजिक न्याय कि मुख़ालिफ़त करने के लिए चर्चा, बल्कि विवादों के घेरे में है। गुलाब कोठारी – जिनको राजस्थान पत्रिका समूह अख़बार में बाकी सबसे अलग, श्री गुलाब कोठारी लिख कर प्रकाशित करता है, समूह के प्रधान संपादक हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हो रही आरक्षण की समीक्षा पर सुनवाई के मामले पर अपनी संपादकीय टिप्पणी में जाति-आधारित आरक्षण को ख़त्म कर डालने की हिमायत कर डाली है।

गुलाब कोठारी के इस संपादकीय के प्रकाशित होते ही, राजस्थान ही नहीं, देश भर के अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों की ओर से विरोध से स्वर सामने आने लगे। लॉकडाउन के कारण, विरोध का स्थल बन गया सोशल मीडिया और ट्विटर पर #गुलाब_कोठारी_शर्म_करो हैशटैग ट्रेंड करने लगा। तमाम बहुजन कार्यकर्ताओं के अलावा अन्य सोशल एक्टिविस्ट, लेखक और पत्रकार भी इस संपादकीय के ख़िलाफ़ लिखने लगे।

 रात होते-होते, न केवल इस संपादकीय का देश भर में विरोध शुरु हो चुका था। लोगों ने राजस्थान पत्रिका के बहिष्कार की अपील भी शुरु कर दी थी – #BoycottRajasthanPatrika भी ट्रेंड होने लगा था। कई जगह से अख़बार की प्रति जलाए जाने की तस्वीरें, सोशल मीडिया पर अपलोड होने लगी थी।

दरअसल गुलाब कोठारी का ये संपादकीय न केवल, आरक्षण के ख़िलाफ़ है – ये संपादकीय लेख, बेहद सीधे तरीके से कई जगह पुराने वैदिक नियम या समाज की वकालत करते भी दिखाई देता है। इसके हिस्सों को अलग-अलग गंभीरता से विश्लेषित किया जाए तो वे सीधे-सीधे पूरे आधुनिक विमर्श को ही ठोकर मारते नज़र आ जाते हैं। वे संपादकीय की शुरुआत ही पूर्वजन्म के कर्म और उनके फल से करते हैं, जो जाति व्यवस्था और जाति आधारित शोषण को लेकर पुराना ब्राह्मणवादी तर्क रहा है, लेकिन आगे लिखते हुए वे 1990 के आरक्षण विरोधी आंदोलन को युवा क्रांति बता बैठते हैं,

“वैसे भी क्रांति तो युवा के नेतृत्व में ही आती है। उनमें जोश होता है, आंखों में सपने होते हैं, शक्ति का महासागर होता है। 1990 का आरक्षण विरोधी आंदोलन, युवा आंदोलन ही तो था।”

(गुलाब कोठारी के संपादकीय से)

आरक्षण के ख़िलाफ़ सीरियल ऑफेंडर हैं – गुलाब कोठारी

ऐसा भी नहीं है कि गुलाब कोठारी और उनके अख़बार ने पहली बार कुछ ऐसा लिखा-कहा-छापा हो। वे इसके पहले भी जातिगत आरक्षण का विरोध, इस तरह बार-बार करते हैं, जैसे कि कोठारी और उनका अख़बार कोई आरक्षण विरोधी एक्टिविस्ट हो – जिसका एजेंडा ये ही हो कि शोषित-वंचित समाज को आरक्षण मिलना बंद हो जाए। अतीत में चलते हैं –

  • सितंबर, 2015 में महीने के आख़िरी दिन के अपने संपादकीय ‘आरक्षण से अब आज़ाद हो देश’ शीर्षक में भी उन्होंने न केवल आरक्षण के ख़िलाफ़ लेख लिखा था, बल्कि वर्णाश्रम और मनुवादी सामाजिक व्यवस्था की वकालत भी की थी।
  • जनवरी, 2018 में उन्होंने ‘हिंदू एकीकरण’ शीर्षक से संपादकीय लिखा, जिसमें एक बार फिर हिंदू समाज और उसके अंदर की फूट के लिए जाति व्यवस्था की जगह आरक्षण को दोषी ठहराया। इस लेख में उन्होंने मोहन भागवत की आरक्षण ख़त्म करने वाली सलाह का समर्थन भी कर डाला था। ये अलग बात है कि भागवत, अपने बयान से बाद में पीछे हट गए थे।
  • अक्टूबर, 2018 में पत्रिका समूह ने आरक्षण पर बाक़ायदा एक सर्वे करा के छापा, जिसके मुताबिक – आरक्षण से सामाजिक वैमनस्य बढ़ा है। ज़ाहिर है इस पर भी गुलाब कोठारी की प्रतिक्रिया वही थी, जो लगातार आरक्षण को लेकर रही है।
  •  25 मई, 2019 को नरेंद्र मोदी के दोबारा पीएम बनने पर, गुलाब कोठारी को संपादकीय के तौर पर लिखा गया खुला पत्र, पढ़ने लायक है कि उसमें किस तरह से पौराणिक युग के लौट आने जैसी खुशी और कामना ज़ाहिर की गई थी।

ये अज्ञानता या भूलवश लिखा गया संपादकीय नहीं है

और अब इस नए संपादकीय में वे लिखते हैं, “पिछले 7 दशकों में आरक्षण का घुण, देश की संस्कृति, समृद्धि, अभ्युदय सबको खा गया। शिक्षा नौकर पैदा कर रही है। खेती, पशु-पालन, पुश्तैनी कार्य छूटते जा रहे हैं।” ज़ाहिर है कि उनका सीधा इशारा ही ये है कि दलित-वंचित और पिछड़े समुदाय चूंकि सरकारी नौकरियों में जा रहे हैं। इसलिए खेती, पशुपालन और पुश्तैनी कार्य (जिसका आशय शायद वो लिखना नहीं चाहते थे) ठीक से नहीं हो पा रहे हैं। ज़ाहिर है कि इस पूरे वक्तव्य में ही सवर्ण सामंती पीड़ा है, जिसको वो चाह कर भी सीधे ज़ाहिर नहीं कर पा रहे हैं।

इसके आगे वे और दो कदम आगे जाते हैं और सीधे-सीधे हिंदू दक्षिणपंथियों का पोंगावादी एजेंडा सामने ले आते हैं। वे लिव-इन की मुख़ालिफ़त तो करते हैं, लेकिन किसी तार्किक या मनोवैज्ञानिक आधार पर नहीं, बल्कि धार्मिक संस्कृति के आधार पर। वे अप्रत्यक्ष रूप से चाहते हैं कि लिव-इन की वैधानिक मान्यता ही ख़त्म कर दी जाए, बुद्धिजीवियों को नीतियां बनाने के काम से हटा दिया जाए, “बुद्धिजीवी नीति बनाते हैं, माटी से इनका जुड़ाव नहीं, संवेदना इनके पाठ्यक्रम में नहीं। वे आंकड़ों में जीते हैं, शरीर प्रज्ञा से अविज्ञ होते हैं। भारत जैसे देश में लिव-इन को क़ानूनी मान्यता क्या विवेकशीलता है?”

वो ये ही भूल जाते हैं कि वे आरक्षण के खिलाफ़ लिख रहे हैं और इसका लिव-इन से या लिव-इन का आरक्षण से कोई रिश्ता ही नहीं है। इस संपादकीय के और अधिक हिस्सों पर हम आगे भी बात करते रहेंगे। फिलहाल देश भर में इसको लेकर आक्रोश है, बहुजन समाज के साथ मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी इस पर काफी गुस्सा है। हालांकि माफ़ी तो इसके पहले भी गुलाब कोठारी ने नहीं मांगी, लेकिन इस बहाने जाति आधारित शोषण पर विमर्श फिर से तेज़ हुआ है और ये समाज को बदलने के लिए ज़रूरी भी है। लेकिन सवाल गुलाब कोठारी से है, कि संपादक के तौर पर उनको अभी आरक्षण की चिंता है या उनकी चिंता उन सवालों को लेकर होनी चाहिए, जो सरकार से पूछे जाने हैं, मगर पूछे नहीं जा रहे…ज़ाहिर है हमारी प्राथमिकताएं ही हमारी पहचान हैं।

67 COMMENTS

  1. देवेन्द्र कुमार सिंह

    एक पहलू यह भी हो सकता है कि राजस्थान पत्रिका में अधिकतम सवर्ण पत्रकार ही काम करते हैं, उनकी पिछले महीने की सैलरी में भारी कटौती की गई है। इस इस वजह से कर्मचारियों में फैला असंतोष आरक्षण विरोधी संतुष्टि से ही दूर होगा।

    • आरक्षण से जाति कुछ अमीर लोग तो और अमीर हो रहे हैं लेकिन देश कमजोर हो रहा है मेरे दोस्त
      आरक्षण हमेशा आर्थिक आधार पर होना चाहिए उसी से देश का पिछड़े और गरीब वर्ग आगे बढ़ेगा

  2. Bhupendra Choudhary

    Sir Jo log reservation ka virodh Kar rahe h bo log gaao me ja Kar dekhe Kya halat h. Kuch month pahle ki ghatana h jab ek gaao me Gaya tha dukan kisi uchi jati ki thi usne pani nai pine Diya apni dukan se kyo aap Bata sakte sir Jo bolte reservation jaati ke aadhar par nahi hona chahiye. To usne pani kyo nahi pine Diya yahi halat h bahut see gaao me city me bhi yahi halat h logo ke and AR bahut chhuyachut h sir. Abhi bhi or yah sb hajaro saalo se chalta aa raha h.

    • लेकिन जो गावों में हो रहा है उसमे नौकरियों में आरक्षण कैसे मदद कर रहा है? और सच बात ये है केबाप गांव में हॉन्य शहर में अगर आपके पास पैसा है आप अमीर हो तो आपके सामने कोई कुछ नहीं बोल सकता और अगर आप गरीब हो तो चाहे कोई भी जाति हो,आपकी कोई इजाय नहीं करेगा। और जातिगत अपमान की जो बात है उसके लिए एससी एसटी एक्ट है, नौकतियोयमे आरक्षण से क्या मतलब? और जो गरीब है, जो पूरा दिन मेहनत मजदूरी करके फिर अपने थके हुए शरीर के साथ कुछ समय ही पढ़ाई कर सकता है उस आरक्षण मिलना चाहिए, हा फिर उसको जिसके पास पैसा हैै और वक़्त की कमी नहीं, जो आरक्षण के कारण काम पढ़ाई करने की जरूरत से बच्चे समय को भी शायद गलत आदतों में बीता देता है।
      आरक्षण गरीबों को मिलना चाहिए, जितना मेहनत करोगे उतने मार्क्स आएंगे इसमें जाति से कैसा भेदभाव हो सकता है? इसमें क्या कंप्यूटर आपकी जाति देखकर आपके मार्क्स कम कर देता है क्या?
      सच्चाई ये है के आप मेहनत नहीं करना चाहते।

      • राजीव पान्डे़

        राजस्थान पत्रिका के साथ पुरा देश खड़ा है। और रहेगा देश हित में उठने वाली हर आवाज को बुलंद करना भारत के हर जिम्मेदार नागरिक का करत्वय है।

  3. Bhupendra Choudhary

    Sir Jo log reservation ka virodh Kar rahe h bo log gaao me ja Kar dekhe Kya halat h. Kuch month pahle ki ghatana h jab ek gaao me Gaya tha dukan kisi uchi jati ki thi usne pani nai pine Diya apni dukan se kyo aap Bata sakte sir Jo bolte reservation jaati ke aadhar par nahi hona chahiye. To usne pani kyo nahi pine Diya yahi halat h bahut see gaao me city me bhi yahi halat h logo ke and AR bahut chhuyachut h sir. Abhi bhi or yah sb hajaro saalo se chalta aa raha h.

    • आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए लेकिन जिसे दलित समाज मे कभी नही मिला वंचित दलित को मिलना चाहिये परन्तु जो विकसित हो गया दलित जो सक्षम है उसे अब चाहिए अपने हिस्से का आरक्षण अपने ही समाज के वंचित दलित को दे ।जिससे समाज का विकास हो सके। आज भी बाल्मीकि समाज उपेक्षित है आदिवासी आज भी उपेक्षित है उनके बारे में सब को मिलकर सोचना चाहिए । भीमराव जी अम्बेडकर जी की भी यही सोच थी इसी को आधार मानकर आरक्षण का प्रावधान किया गया। वंचित जिसे अभी तक लाभ नही मिला उसके अधिकार की बात करना कोई गलत बात नही है
      इस पर सभी समाज और वर्ग के लोगो को बैठकर एक सही दिशा में कार्य करने की जरूरत है । बाकी दोष किसी को देते रहो

  4. Kothari sc st k prati duragrah se grashit h.

  5. Hum 85% bahujan society brahman aur uchch jati walo ko apna nahi samjhte ye bhi lootere hi hai Jo Bharat me uresia se aakar yhi buss gye aur moolnivasiyo pe shasan katna inka aim hai ye hamare hi desh me rahege aur ham logo pe hi shasan karege kothari likhte hai ki country me export decrease hua aur import increase hua to kya reservation hi iska jimmedar hai sirf bahujan society hi inpe dhyan dega aur tum bahujano ke mehnat pe baithkar khaoge tumhe kheti nahi karni aati sirf baithkar gaal bajana aata hai yhi brahmano ne angrejo dwara satta me hissa na dene par unhe desh se nikalne ka notice de diya pahle vo brahman log kehte rhe agar angrej hame satta me jagah de to unhe desh chodkar Jane ki jaroorat nahi ye itne lalchi aur kapati the to hum sabhi bahujan bhi ka kahna hai ki yha rah rhe savarn Jo uresia se bhag kar aaye videsi hai unhe hum iss desh ka nahi mante aur ye kehte hai ki hme bhi satta aur sarkari naukri me pratinidhitv chahie aur yhi reservation hi pratinidhitv hai aur yadi uresia videsi ko yah swikar nahi to videsiyo ka bahujan moolnivasi logo par shasan karne ka adhikar nahi hum unhe India chodne ka notice dege aur phir se ek baar Bharat ki aazadi chahege haih.

    • Bhai jo bhi ho aap baat bhut shi likhe ho.
      Inhe jb vote chahiye to khte hai hum sb Hindu hai lekin jb job wagarh ki baat ho to khte hai tumarhi caste ke log able nhi hai..

    • I am not bhimta

      Tu dekhne gya tha Kya? Hme ni chahiye ye bheekh hmme itna talent he and tumme itna talent h to kyu rote ho reservation ke liye. 4 clas pdkar tumhari job lag jati he bechare jin dalito ko fayda chhaiye vo abi garib hee h unko do fayda fr bolte h jatigat karte he jativad karte he ye to tum he felate ho

  6. Hum 85% bahujan society savarno ko uresiya ka samjhte hai ye videsi lootere hai ye hamare hi desh me moolnivasiyo pe shasan kaise kar sakte hai ye videsi logo ko hum bahujan apna nahi samjhte aur bahujno ko bhi satta me aur sarkari naukari me barabar ka hissa chahie nahi to jaise savrno ne angrejo se satta me jagah na dene par angrejo ko desh chodne ka notice de diya tha vaise hi hum bahujan bhi uresiai videsiyo ko desh chodne ka notice de dege aur videsiyo ko iss moolnivasi logo ke desh se bahar khaded dege haih.

  7. विरोध तो सभी का होता है
    चाहे कोई कितना ही अच्छा काम करे…

    • Jitendra indian

      Jati or reservation ek dusre ke ulte seedhe pahlu hai bhai jab ek upar jayega to dusra neeche aayega .. or jati vyawastha ka khatma hi sab samsyao ka solution hai .. or ye tabhi possible hai jab reservation apne charam pe poori imandari se failaya jaye …
      Or waise 13% ke aas pas hai govt job jisme reservation hai ..baki 87 %me bhi kbhi survey krne ke liye kothari ji aage aaye to ham bhi sath de.
      Central university me 6 % se bhi kam log h reservation category se .. kbhi is bare me kisi ne socha hai …
      Par hame dikhta whi hai jo hmari mansikta hoti hai .
      sahi kha virodh to hota hi hai hmesha …
      Jai hind jai bharat ..

  8. PRATAP SINGH RANAWAT

    आरक्षण का लाभ ले चुके st,sc,obc,के भाई यह चाहते हैं कि यह लाभ पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें ही मिलता रहे,उन्हीं के संवर्ग में आ रक्षण के लाभ से वंचित st,sc,obc,का नम्बर ही ना लगे। यह सरासर नाइंसाफी st,sc,obc,के उन लोगों के साथ हो रहीं है जिन्हें आजादी के 70वर्ष बाद भी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। आरक्षण का लाभ ले चुके st,sc,obcके अग्रणी ही वंचितों की राह में कांटे हैं।

    • भाई पीढ़ी दर पीढ़ी बिल्कुल मिलनी चाहिए आरक्षण । इसमें सवर्णों को इतनी दिक्कत क्यों हो रही है? हजारों वर्षों से तुम अलिखित आरक्षण का सुख भोग रहे हो और अब दलित, आदिवासी और पिछड़ों के आरक्षण में ऊँगली करना आरंभ कर दिए। ये न भुलो अभी भी 15% सवर्णो की जनसंख्या 50% आरक्षण का फायदा ले रही है I

      • SHYAMSUNDAR SHARMA

        Bhai sirf kehne se kch nhi hota ek baar aap jb savarn garib k yaha peda ho jaaoge aapko smjh aa jaayega ki garibi jaati se nhi hoti or garib sabarn ko to bechare ko jaati tk ka ehsaas nhi hota usme or ek dalit garib mai koe fark nhi hota
        Jaati to bs 2 hi hoti h ek garib dusari amir amir kisi bhi cast ka ho use koe kch nhi kr skta garib koe bhi ho use dabaya jaata h
        Or dalit ka arth daba kuchala hota h iska mtlb ye to nhi ki sabarn dabaya nhi ja raha abhi aapne hi likha h ki 15 % sabarn 50 percent reservation le rahe bhai pehali baar to 50 percent unreserved hoti h vacancies jin pr jiske jyada number wahi le skta h to sabarn kaha se aa gaye 50 percent pr

        • Jitendra indian

          Bhai maine aaj tak kisi bhi sawarn ke muh se ye nhi suna ki jati khatam honi chahiye ….har koi is sawal se kinara krta h or khta h jati nhi jatiwad kharab hai …
          Are bhaiyo jab jati hai tabhi to jatiwad h ..kya sarkar ne kabhi kha hai ki cast system ko abolish krna jruri hai ?? Kabhi nhi .
          Or Bhai wo jo savarn gareeb ki aap bat kr rhe ho survey krwake dekh lo kitne % hai … Mai manta hu jrur usme bhi gareeb honge .. lekin utne nahi hai jinka dhol bjakar prasar kiya ja rha hai …
          Fir bhi unke liye 10 % diya h tab to kisi ne nhi kha h ki reservation galat diya h .
          Or baki aap jo gareeb ki bat kr rhe ho use kisi na kisi mandir me job mil hi jati h ..
          Baki bechare jo I indian hai unka kya ? Unko to pet bharne ke liye bhi jindgi bhar sangarsh krna pdta hai …
          Baki ha kuch samaj me hulchul hui hai ..
          Baki hajaro salo se jin kuritiyon ko samaj me dharam ke name pe failayi hai unko khatam hone me time to lgega…
          Apka din mangalmay ho .
          Jai hind jai bharat

      • First uplift cast system th

        en talk about reservation

      • Wha bhai trea logic aur concept dono kitne acche he to aazadi milte samah kaha chel gya ta us samah savidhan me lik diya jata jo mulnivasi wo rahe aur jo bahar se aaye wo jaye rahe baat reservation ki samiksha ki baat huee hatane ki nhii use me bura kya he

    • बिल्कुल सही, आरक्षण कायम रहना चाहिए, जरूरी भी है लेकिन उसका लाभ उसके वास्तविक हकदार को मिलना चाहिए, इसलिए sc st आरक्षण में भी obc कीतरह ही क्रिमीलेयर की अवधारणा होनी ही चाहिए ताकि अधिकतम वंचितों तक इसका लाभ पहुँचे

      • बिल्कुल आरक्षण व्यस्था होनी ही चाहिए, परन्तु जो आरक्षण लाभ से सक्षम हो गया उसको आरक्षण छोड़कर अपने गरीब भाईयो को ऊपर आने का मौका देना चाहिए।

        आरक्षण लाभ किसी भी व्यक्ति को एक बार मिलना चाहिए, उसके बाद बाकी गरीबों को मौका मिलना चाहिए।

        आज भी sc st वर्ग में बहुत बड़ा तबका आरक्षण लाभ से वंचित है, वजह अमीरों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण व्यवस्था का शोषण करना है।

        जबकि क्रीमीलेयर व्यवस्था के बाद हर गरीब की पहुंच आसान हो जाएगी।

        आरक्षण की समीक्षा जरूर होनी चाहिए, जिसमे समान रूप से गरीब को उसका हक मिलना ही चाहिए, आज भी गांव और शहर से दूर sc st समेत तमाम वर्ग के गरीब परिवारों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

      • क्रीमी लेयर की अवधारणा सवर्णों मे क्यों नही होनी चाहिए ? जो सवर्ण क्रीमी लेयर मे है उन्हे गरीब सवर्णों के लिये सरकारी नौकरी से बाहर क्यों न कर दिया जाय ।

    • पुन:विचार की अवधारणा केवल एससी/ एसटी के लिए ही क्यों ? पीढी दर पीढी चलने वाले जजो पर, मंत्री, एमपी, एम एल ए, मंदिर के पुजारियों पर और मीडिया के उपर भी लागू क्यों न की जाय ।

    • आप अपनी बहन की शादी एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति से करेंगे l

      • साले इसमे बहिन की शादी की बात कहा से आ गई
        तू करवाएगा क्या तेरी बहिन की शादी दूसरी जाति में
        Mcd

  9. there is no requirement to counter kothari.. because it is a only opinion . but we should try to understand what he want to say. he is not against reservation but he against cast wise reservation because this is the reason of backwordness of some poor villagers and his poverty. kothari want reservation for the poor who stands at the last of our socity. He belongs to which comunity, no matter because poverty has no religion, so may the coments be wrong but the intention is great because it will fever to poverty of our country

  10. भाई पीढ़ी दर पीढ़ी बिल्कुल मिलनी चाहिए आरक्षण । इसमें सवर्णों को इतनी दिक्कत क्यों हो रही है? हजारों वर्षों से तुम अलिखित आरक्षण का सुख भोग रहे हो और अब दलित, आदिवासी और पिछड़ों के आरक्षण में ऊँगली करना आरंभ कर दिए। ये न भुलो अभी भी 15% सवर्णो की जनसंख्या 50% आरक्षण का फायदा ले रही है I

    • We have problem because you have now become so called Brahmins within your sc/St community usurping reservation benefit from really downtrodden in your castes. You are now reflecting the Manu waadi thought and your greed. Now you don’t want the actual and eligible and needy people to get this benefit. You already have been elevated economically and socially and not allowing others in your community to get reservation benefits. It is on this that Supreme Court has asked for analysis.

    • Aap akele hi ho kya virodh me,kothari sahi kah raha hai,banchit ko mile,

  11. 50 % uske liye jo acche number wale hai wo general ke liye nhi pta kuch to hai nhi lakin problem ye hai phir – no. Me bhi no. Kaise selection hoga -wale nokri kr rhe hai

  12. तोहरि माँ को चोदो गुलाब कोठरी. अगर हमारा दिमाग़ उखड़ गया न बेटीचोद तो तुझे छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी

    • तुम्हारी भाषा और विचारों को देख कर लगता ह तुम्हें कई पीढ़ियों तक आरक्षण की जरुरत।
      सभ्य ओर शिक्षशीत होने में वक्त लगता ह
      जानवरो को

  13. उनका intention पीढ़ी दर पीढ़ी अमीर लोगों द्वारा आरक्षण का फायदा लेने से था।
    जिसमे आरक्षित वर्ग के गरीब भी हमेशा आरक्षण के फायदे से वंचित रहे है।

    रही बात, सवर्ण लोगों की, तो उनकी सहनशीलता 70 साल से देश देख रहा है, परन्तु आरक्षण से पोषित पढ़े लिखे व्यक्ति भी 2 अप्रैल को पूरा देश को जलाने पर उतरे थे, क्या संविधान की दुहाई उस दिन देना भूल गए थे, जब गरीब व्यक्ति का ठेला दुकान तक जला दिया था।

    आज भी सवर्ण वर्ग सिर्फ आरक्षण की वकालत आर्थिक आधार की करता है, ना कि जातिगत आरक्षण की, जिसमे वर्ग विशेष के गरीब ही शामिल है, जबकि गरीबी का कोई पैमाना नहीं होता,वोह किसी भी समाज, वर्ग,धर्म में हो सकता है।

    आरक्षण आर्थिक आधारित होना चाहिए।
    आरक्षण की समीक्षा करके देख लीजिए, इसका फायदा अमीर वर्ग ले चुका है, जिसमे अफसर का बच्चा भी आरक्षण चाहता है, साथ ही आरक्षण के लाभ से सरकारी नौकरी पाने वाला व्यक्ति पदोन्नति में भी आरक्षण चाहता है, वहां क्या उनको अपनी परफॉर्मेंसऔर काबिलियत पर भरोसा नहीं होता।

  14. Reservation is that desease which can not be cured . Today we have to stop it . It becomes pandemic very soon. We all Indian have to think about this matter jointly e. g. Today we are unable to prepare vaccine for covid-19 this is the result of reservation

    • आरक्षण पर गुलाब कोठारी जी ने बिल्कुल सही लिखा है अमीरों को आरक्षण क्यों मिले? एसटी एससी अमीर लोग इतने भूखे कैसे हैं क्या उनको दिखाई नहीं देता समाज में कितने लोग गरीब हैं वह गरीबों का हक क्यों खा रहे हैं? एसटी एससी के अमीर लोग जब आरक्षण का लाभ उठाते हैं तो उन्हीं के वर्गों के गरीब लोग इससे वंचित रह जाते हैं| यह देश के गरीबों के साथ अन्याय हैं| और तथाकथित अमीर अंबेडकरवादी अपने ही वर्ग के गरीब लोगों का हक खा रहे हैं इनको शर्म आनी चाहिए! तुम अपने ही वर्ग के गरीब लोगों का हक क्यों खा रहे हो ! आज नहीं तो कल यह आरक्षण की व्यवस्था बदलेगी शांति से या फिर क्रांति से देश में यह अन्याय ज्यादा समय तक नहीं चलेगा

  15. Phale to SC,st me krimi layer lagu hona chaihey.saath hi ak baar hi laabh milna chaihey taki unke hi varg ke vanchit logo ko iska laabh mil sake. Kothari sir ne jo likha h sahi likha h.koi bhi apani chupri roti ko nahi chodhana chahata h.

    • Write haikothari ji ka kahna

  16. Supreme court always oppose SC ST reservation but he always support General community reservation why?

    • Becoz its belongs to upper caste bro

  17. Supreme court of India is working like SAWARN COURT OF INDIA.

  18. जिन्दगी भर आरक्षण की भीख मांगते रहोगे । भारत के संविधान का सबसे भयावह और डरावना चेहरा है आरक्षण । मैं राजेन्द्र कोठारी के विचारों का पुरजोर समर्थन करता है ।भारत कब तक सवर्ण प्रतिभाओं का कत्लगाह बना रहेगा!!

    • Phir to tum bhi 10% aarakshan lekar bhikh maang rahe ho nahi kya. Kothari jaati vyavstha kyon nahi khatam karne ki vakalat karte. Jaati vyavstha kyon banae rakhna chahte ho. Ye sidhe sidhe 49.5 % logo ki bhavnao ko bhadkane ka lekh h. Ab sarkar ko ye najar nahi aata kya. Isliye jab tak jaati rahegi aarakshan rahega. Kisi k baap ki himat nahi ise khatam karne ki. It is our constitutional right.

  19. समाज से जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए जातिगत आरक्षण को खत्म करना ही पड़ेगा कोठारी जी आप इस संघर्ष को करिए पूरा जनता आपके साथ है

    • Tumhare saath 10% log bhi nahi hain. Understand. Aajma lena.

    • Gulab kothari ji
      Apki mansikta ko is desh ke log samjh rhe hai achchha huaa ki ap log khukar aa gye kuchh log gumrah the (sc st obc) ke log ab ladae kisse or kaisi hai ye jabab loktantrik bhasha me diya jayega.
      Dhayan rakhna apki mansikta ka ant nishchit hai.
      Samtamulak samaj ki bhumika baba sahib rakhkar gye the bahi hoga
      Arakhchhan koe bhek nhi hai or ap logon duwara jo ginoni hatkat ki ja rhi hai bo samjh me aa gyi hai.
      Jati pr kyu nhi likhte dangon pr kyu nhi likhte dharmik daman kyu.nhi likhte.
      Ham log jante hai tum nhi likhoge.
      Khair chalo dekhte

      • Yes bro mauka aanay dao hum gulab ko bta denge kya h hum

        • Yeh dikhana bhi jaruri har

  20. अरे जो अपने आप को सुवर्ण कहते है ना उन को आरक्षण चाहिए ना तो एक काम करो अपनी लड़कियों की शादी sc.st.obc वालों से करवा दो जिससे यह होगा कि उनकी होने वाली औलाद को आरक्षण मिलेगा।

    • Bahut badhiya sir. Ye sc/st/obc k saath apni ladkiyo ki saadi karne k liye tyar nahi hain. Ye jaati vyavstha khatam karne ki vakalat nahi karte. Ye jaati k sahare saashan par domination kayam rakhna chahte hain.

    • Iss baat se mae shmat hu inko jarur karwani chaiye tabhi sab brabar hoga

    • तुम sc ओर st की सोचो ।
      ओबीसी की चिंता मत करो
      ओबीसी वालो की ओर से कल ही आरक्षण बंद कर दो कोई परेशानी नही
      वो तुमरी तरह देश को नही जलाते

  21. Sapanna dalito ko Khushi Khushi Apne gareeb dalit bhaeyo ke liye reservation chhodkr general category me samil hona chahiye kyo is arthik yug me Sara samajik nyay paise pr Tikka hai kothari sahb salute Satya khne ki himmat

  22. Chand Chand Singh patavi

    अक्सर देश के अंदर समय-समय पर आरक्षण समाप्त करने की बाद कई सामाजिक संगठन कुछ जनप्रतिनिधि करते रहते हैं लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि उन संस्थाओं प्रतिनिधियों को जो आरक्षण के विरोध में बात करते हैं उन्हें यह पता नहीं है कि आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है जिस से छूटे हुए बिछड़े हुए समाज को समानता की श्रेणी में लाने का संविधान द्वारा नित मौलिक अधिक नए प्रावधानों के तहत कमजोर तबके के समाज के व्यक्तियों को प्राप्त है हजारों साल पहले से ऊंचाइयों की अगली सीढ़ी में खड़े लोगों को निचले शिर्डी में खड़े लोगों की अगली सीढ़ी में आने की आहट इनके परेशानी का असली कारण है कोई भी देश या कोई भी समाज तभी विकास करेगा जब उसमें संतुलन बना रहेगा jo bhi vyakti Samaj Sangathan Aarakshan ke virodh Mein Baat Karta Hai iska matlab yah Hai Ki vah Desh Ki Pragati mein badhak hai aisa mera Niji rai hai aur vichar Hain isko Aarakshan bhaiyon ko samajhne ki atyant avashyakta hai

  23. भिम राव अम्बेटकर ने बिना आरक्षण के हि देश का संविधान लिखा तो क्या आज देश को आरक्षण कि जरूरत हो सकती हे, आज देश को आरक्षण हटाने कि जरूरत हे एक हि परीवार के दादा दादी सरपंच, पापा ममी टिचर
    बेटा बहु भि टिचर ओर पोता व उस्कि बहु भि टिचर फ़िर कहेन्गे देश मे शोषण बहुत बड गया हे

    • Tu jaati khatam karne ki vakalat kyon nahi karta. Aisa bhi tumhare gharo m paya jaata h. Tum log jhuth bolna band karo .Hum tumhare saath relationship ki baat karte hain par tumhare log haath m khanjar liye khade hain.Samvidhan pyar karna sikhata h .Koi isko samjhe to.

  24. Views published in Rajasthan Patrika by Gulab Kothari is “Rurhiyau ki takshal me dhalie khoparhi ke bichar hesn.” Inka bhutkal ke bhute ne pichha nahi chhorha . Ye S.C./S. T. Ko dadrita ki krur chhakke mea piesane ke liye utawale dikhate hean. Sarbjan hitaya sarbjan sukhaya ke pakshadhar nahie hean.

  25. कोठारी जी आप संघर्ष करो हम आपके साथ हैं।

  26. लगता है मीडिया विजिल के आग लगी है

  27. बंशी धर

    100 में से 49% आरक्षण है 16% sc,12%st ओर 21%ओबीसी।जब 51% सीट सभी जनरल के लिए तो भी दिक्कत है जनरल कास्ट वालो को।
    कितनी सदियो से पढ़ने नही दिया जिन लोगो को उनको हक का मिलने लगा तो देखा नही जा रहा है ।ये संकीर्ण मानसिकता वाले व्यक्तियों को सहन नही होता कि जिनके पूर्वज घटर साफ करते थे,चपल जूट बनाते थे ,गंदगी साफ करते थे,दबे कुचले गंदे रहते थे उनके वंशज आज साफ सुथरे पढ़े लिखे नोकरी करने वाले कैसे हो गए,ये आज भी उसी स्थति में देखना चाहते है।यदि आरक्षण को समाप्त करना चाहते है तो कीजिये समाप्त मगर आरक्षण से पहले आरक्षण के मूल कारण जाति को हटाइये जिसके कारण आरक्षण की जरूरत हुई।मगर जाती कभी हटाने की बात नही कही गयी। इस सत्य को कोई भी नही झुठला सकता है कि आज भी आप किसी भी नए व्यक्ति से मिलते हो ओर उसका नाम पूछते हो तो जब तक वो अपना पूरा नाम नही बता देता है दिमाग मे जिज्ञासा रहती है कि इसका पूरा नाम क्या है ,उपनाम या गोत्र क्या है।अभी तो शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने लगी है आरक्षित वर्ग में उनमे से कुछ व्यक्ति नोकरी में है ,उनको देख कर आगे बढ़ने और पुराने चले आ रहे करए को छोड़ने की जागरूकता बढ़ने लगी है ओर यही रोकना चाहते है।प्राइवेट नोकरियो में आज भी योग्यता को दरकिनार कर के जातिगत भेदभाव के कारण नोकरी नही दी जाती है।श्री गुलाब कोठारी ने सिर्फ आरक्षण को गलत तरीके से पेश करके समाज मे वैमनस्यता फैलाई है और भड़काने ओर उकसाने का कार्य किया है।

  28. जहां तक मैं जानता हूं SC/ST आरक्षण जाती आधारित ही है l OBC का इन्कम आधारित है और बाकी unreserved है यानी सभी के लिये ।
    ST 07%
    SC 15%
    OBC 27% (Creamy layer/non creamylayer)
    Unreserved 51% (now 10% reserved for Gen)
    पढ़ लिख कर SC ST OBC वाले अधिकतम 49% तक ही ले सकते हैं । किसी में ज्यादा दम हो तो 4-5% unreserved मैं आ सकते है, वो भी OBC वालो के ज्यादा चांस है। SC ST वाले तो विरले ही unreserved में आते है कभी कभार।
    OBC वाले reservation का लाभ तो लेते है लेकिन ऊठना-बेठना , खाना-पीना जनरल के साथ। शोषण, छुवाछूत व दूरव्यवहार के वक्त जनरल के साथ।
    ईस लिये OBC में Creamy layer/ non-creamy layer यानी समर्थ/असमर्थ बनाये और अब तो 10% सवर्ण गरीबों को भी reservation दे दिया।
    अब तो सभी पिछड़ो/गरीबों को भी आरक्षण दिया है फिर केवल SC ST का ही विरोध क्यौं ? बचा हुआ 51% (1-2% विरले को छोडकर) आपका ही तो है ।
    स्वतंत्रता के पहले भी सवर्ण ही सत्ता में थे, स्वतंत्रता के बाद यानी आज भी सत्ता में सवर्ण ही है। देश का विकास भी इनके हाथों हुआ और यदि विनाश हुआ तो वो भी इन्हीं के हाथों हुआ, इसमे sc st और आरक्षण का स्तर तो आज भी नगण्य है फिर आरक्षण से देश बर्बाद कैसे हुआ। इसलिये गुलाब कोठारी जी हम आपका विरोद्ध करतें है। अपनी कलम का प्रयोग मानवता के लिये करिये वेमनश्यता के लिये नहीं । जय हिन्द, जय भारत।

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