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नमक रोटी कांड : PCI ने पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई पर योगी सरकार से मांगी रिपोर्ट

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भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के एक स्कूल में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) में ‘नमक-रोटी’ परोसे जाने का मामला उजागर करने वाले पत्रकार पवन जयसवाल के खिलाफ दायर आपराधिक आरोपों का संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार से एक रिपोर्ट मांगी है.

पीसीआई के अध्यक्ष चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में मध्याह्न भोजन की रिपोर्टिंग करने को लेकर पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने किए जाने की खबरों पर चिंता प्रकट की है.

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पीसीआई ने एक बयान में कहा, “इस मामले की जांच के लिए एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया गया है.” प्रेस एसोसिएशन ने इस विषय में प्रदेश सरकार की मनमानी कार्रवाई का भी सख्त निंदा करते हुए कहा है कि वह अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा रहे एक पत्रकार को इस तरह चुनिंदा तरीके से निशाना बनाये जाने पर सख्त ऐतराज जताता है.

पीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘इस मामले की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग समिति का गठन किया गया है.’

प्रेस एसोसिएशन ने इस विषय में प्रदेश सरकार की मनमानी कार्रवाई की भी सख्त निंदा करते हुए कहा है कि अपनी जिम्मेदारी निभा रहे एक पत्रकार को इस तरह चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना बिल्कुल गलत है.

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प्रेस एसोसिएशन कहा है कि मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में गड़बड़ी को सुधारने के बजाय मिर्जापुर जिला प्रशासन ने पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर मीडिया को खामोश करने का विकल्प चुना.

बता दें कि, सोमवार को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी इस घटना की निंदा की थी और इसे निर्मम तथा संदेशवाहक को ही निशाना बनाने का अनूठा मामला बताया था.

बीते 23 अगस्त को मिर्जापुर के एक सरकारी स्कूल में बच्‍चों को नमक और रोटी बांटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

1 COMMENT

  1. उमेश चंदोला

    मध्याह्न भोजन में नमक रोटी देने से कई गुना ज्यादा बढ़ा एक घोटाला पूरे भारत में चल रहा है । वह है 2000 रुपए में 6 घंटे तक खटने वाली भोजन माताएं । भारत में 1990 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी 25 हजार थी। हालाकि मजदूर नंबर एक मोदी ने इसे साढ़े चार हजार कर दिया है। सफाई से लेकर तमाम निजी काम इन्हें करने पड़ते हैं। इन्हें इतने पैसे भी नहीं मिलते कि यह नमक रोटी भी खा सकें । विशेषकर उत्तराखंड जैसे राज्य में काम करने वाली भोजन माताओं को तो लकड़ी की व्यवस्था भी खुद ही करनी पड़ती है । बाघ बघेरों से जान बचाते ,बरसात में भीगी हुई लकड़ी को सुखाते , चूल्हे के धुएं में आंखें फोड़ते ,सांसो की बीमारियों से ग्रसित होते भोजन माताओं की कहानी भी एक अलग ही दुख की कहानी है । इस मजदूरी पर भी हरे राम हरे कृष्ण के साथ जुड़ी अक्षय पात्र गैंग की नजर है। हाल ही में प्रगतिशील भोजन माता संगठन उत्तराखंड के नाम से एक संगठन का गठन हुआ है । जो कि भोजन माताओं की लड़ाई नए सिरे से लड़ने की तैयारी कर रहा है ।
    ( रजनी जोशी, महासचिव, प्रगतिशील भोजन माता संगठन से वार्तानुसार )

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