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दिल्ली के दंगे कवर करने में निशाना बने पत्रकार, JK 24*7 के रिपोर्टर को लगी गोली

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पिछले डेढ़ दिन से दिल्ली में हो रहे दंगे कम होने का नाम नहीं ले रहे। सोमवार को मीडिया डोनाल्ड ट्रम्प की ख़बर में फंसा रहा, लेकिन आज जब कुछ पत्रकार दंगे को कवर करने ग्राउंड पर गए तो वे भी हिंसा का शिकार हो गए।

जेके न्यूज़ 24*7 के एक पत्रकार आकाश को मौजपुर में कवरेज के दौरान गोली लगी है। उसकी हालत अस्थिर है। वह अस्पताल में भर्ती है।

इसके अलावा एनडीटीवी के दो पत्रकारों को चोट आयी है। एनडीटीवी के पत्रकार अरविंद गुनाशेखर उत्तर पूर्वी दिल्ली में कवरेज कर रहे थे कि दंगाइयों ने उन्हें पीट दिया जिससे उनका एक दांत टूट गया। उन्हें बचाने आए चैनल के दूसरे रिपोर्टर सौरभ शुक्ला को भी पीटा गया।

दि इंडियन एक्सप्रेस की सौम्या लखानी ने लिखा है कि अरविंद को पिटते देख न्यूज़ 18 की पत्रकार रुनझुन शर्मा ने दंगाइयों से अनुरोध किया कि वे उन्हें छोड़ दें।

कुछ और पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनायी है। टाइम्स नाउ की पत्रकार परवीना पुरकायस्थ ने भी खुद पर हुए हमले के बारे में लिखा हैः

न्यूज़ एक्स की पूर्व पत्रकार श्रेया चटर्जी ने कहा है कि उन्हें मौजपुर में कवरेज करने से रोका गया। वे जिन पत्रकारों के साथ थीं, उन्हें सीएए समर्थक दंगाइयों ने पीटने की धमकी देते हुए कहाः

“हिंदुओं की लड़ाई है, हमारा साथ दीजिए, रिकॉर्ड मत कीजिए, हम फंस जाएंगे।”

चटर्जी ने दि प्रिंट को बताया है कि रायटर्स के दानिश सिद्दीकी पर भी कवरेज के दौरान हमला हुआ था। दानिश की दो तस्वीरें सोमवार को काफी वायरल हुई थीं जिसमें एक व्यक्ति को घेरकर भीड़ मारते हुए दिख रही है।

प्रेस क्लब आँफ इंडिया और इंडियन विमेंस प्रेस कोर्प्स ने पत्रकारों पर हुए हमले की निंदा करते हुए एक साझा बयान जारी किया है जिसे नीचे अविकल दिया जा रहा हैः

The Press Club of India and Indian Women’s Press Corps express serious concern that journalists on duty have come under attack while covering the communal violence rocking northeast Delhi since last Sunday.

Several of them have been hospitalized. They have been punched and attacked by communal mobs, and police were either absent or have not come to help. Shockingly, mobs were checking religious credentials of journalists.

A television journalist has sustained gunshot injuries. Another has been hit in the face and has several teeth missing. A woman journalist has also sustained injuries. Television media seem to have been specially targeted.

We have little doubt the attackers actively sought to prevent videography or photography that may lead to them being identified.

A lethargic police and politicians instigating communal violence cannot escape blame for attacks on the media.

A few weeks ago, journalists were physically assaulted by the police themselves when reporting the violence that attended the Jamia protests.

Earlier, police stood mutely while supporters of right-wing mobs that had attacked JNU heckled and hit journalists.

We expect the authorities, particularly the police and the Union home ministry, to be alive to democratic sensibilities and ensure that media are not brought under physical assault.

Anand K Sahay

President, Press Club of India

Jyoti Malhotra,

President, IWPC

 

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