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मिर्जापुर: बरकछा में फैले विकास के अंधेरे से अनुप्रिया को बाहर निकालने आए हैं मोदी

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रामानुज का घर जहां अनुप्रिया का कैलेंडर टँगा है

लोकसभा चुनाव अपने अन्तिम दौर में पहुंच गया है। इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल है जहां प्रधानमंत्री सहित कई मंत्रियो की किस्मत दांव पर है जिसमें बनारस से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चंदौली से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंदर नाथ पान्डे और गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ की इज्जत दांव पर है जहां फिल्‍म अभिनेता रवि किशन भाजपा प्रत्‍याशी हैं। ऐसे में सबकी नजरें पूर्वांचल पर लगी हुई हैं जहां के चंदौली, मऊ और मिर्जापुर में आज नरेंद्र मोदी की रैली है।

मिर्जापुर से सांसद हैं एनडीए में शामिल अपना दल (सोनेलाल गुट) की अनुप्रिया पटेल। मिर्जापुर सीट बारी-बारी से सबके खाते में आती रही है लेकिन 2104 के चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के हिंदुत्व का दांव चला और उसकी सहयोगी अपना दल की अनुप्रिया पटेल यहां से सांसद बनीं। 2014 में बड़े अंतर से जीतने वाली अनुप्रिया पटेल को इस बार दो तरफ कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

लालमणि के घर खाली पड़ा उज्‍ज्‍वला योजना के तहत मिला सिलिंडर

पहली चुनौती उनकी मां और बहन हैं जो कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं और अनुप्रिया भाजपा के साथ। इस कारण मिर्जापुर पक्ष-विपक्ष के साथ पारिवारिक लड़ाई का केंद्र भी बना हुआ है। चुनावी मुकाबले में अनुप्रिया का गठबंधन के प्रत्याशी राम चरित्र निषाद से और कांग्रेस प्रत्याशी ललितेश त्रिपाठी से है। निषाद गठबंधन में आने से पहले बीजेपी के मछलीशहर से सांसद हैं। बीजेपी ने निषाद को टिकट नहीं दिया जिसके कारण उन्होंने गठबंधन का दामन थाम लिया।

‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ वाली कहावत मिर्जापुर पर पूरी तरह से लागू होती है। यहां के लोगों ने बड़ी उम्मीद के साथ अनुप्रिया पटेल को सांसद बनाया था कि शायद अब कुछ हो। हर बार की तरह इस बार भी उनकी उम्मीदें फ़ेल हो गईं। मिर्जापुर-बनारस हाइवे पर ढाबा चलाने वाले राजू पाल का कहना है कि अनुप्रिया जी से बहुत उम्मीदें थीं, वे चाहतीं तो क्षेत्र का विकास हो सकता था, लेकिन वे मंत्री पद के नशे में कुछ नहीं किया।

मिर्जापुर-राबर्ट्सगंज रोड पर बीएचयू के दक्षिणी परिसर के नजदीक एक गांव है बरकछा। करीब दो हजार की आबादी वाले सिटी ब्‍लॉक के इसी गांव में प्रधानमंत्री मोदी की आज अनुप्रिया पटेल के समर्थन में सभा हो रही है। इस गांव में मूल रूप से ठाकुर, ब्राह्मण और दलित बस्तियाँ हैं जिसमें से अधिकांश दलित बस्तियां गांव के बाहर हैं। गांव के बाहर रहने वाली लालमणि का ऐसा ही परिवार है जो घास की बनी झोपड़ी में रहता है। इसके अलावा इस बस्ती में करीब 10 घर हैं लेकिन सबकी हालत एक जैसी है।

लालमणि

लालमणी घर की हालत दिखाती हुए कहती हैं ये घर हमको सरकार से मिला है। सरकार की योजना के किसी लाभ के बारे में पूछने पर बताती हैं कि करीब 6 महीने पहले गैस सिलिंडर मिला था जिसको एक केवल एक बार भराया है। वहीं सरिता का कहना है गैस मिली ठीक है लेकिन काम भी तो मिले, 10 किमी दूर से लकड़ी बीनकर लाते हैं तब जाकर काम चलता है।

रामानुज कहते हैं कि मैने आखिरी बार 500 रुपए एक साथ कब देखे थे याद भी नहीं है, अब तो केवल कुआं खोदो और पानी-पियो वाली स्थिति है। इसके अलावा इस बस्ती में रहने वालों को किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल है। आयुष्यमान भारत को लेकर सरकार के तमाम दावे हैं, स्वयं प्रधानमंत्री इसको लेकर बहुत सारे दावे करते हैं लेकिन मोतियाबिंद के इलाज के लिये तरस रहीं सरिता इसकी पोल खोलती हैं।

सरिता का घर

चुनाव प्रचार और आचार संहिता के बीच मिर्जापुर में एक अफवाह तैर रही है कि बीजेपी गांव-गांव में मोबाईल फोन बांट रही है। जीतन पटेल का कहना है कि मोबाईल मिलने के बारे में सुना तो है लेकिन इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

जातिगत रूप से देखा जाए तो मिर्जापुर में सवर्ण और दलित मतदाता ही मुख्य रूप से हैं जो विभिन्न जातियों में बंटे हैं, उसके बाद करीब 2 लाख के लगभग मुस्लिम मतदाता हैं। ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी राम चरित्र निषाद का पूरा जोर दलित और मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने का है। वहीं कांग्रेस ब्राह्मण-मुस्लिम वोट के सहारे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश कर रही है।

मिर्जापुर इस समय राजनीति हॉट प्वाइंट है, हर कोई इसको जीतने की कोशिश में लगा है। हर दिन कोई बड़ा नेता यहां का रैलियां कर रहा है। 16 तारीख को नरेन्द्र मोदी रैली करेंगे तो 17 को मायावती और प्रियंका गांधी यहां के मतदाताओं को लुभाएंगी।


अमन मीडियाविजिल के संवाददाता हैं और उत्‍तर प्रदेश के ज़मीनी हालात का जायज़ा ले रहे हैं

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