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चुनावी पहेली 2019: भाजपा की सदस्‍य और प्रत्‍याशी प्रज्ञा ठाकुर का प्रचारात्‍मक बयान ‘निजी’ कैसे?

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कोई व्‍यक्ति किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्‍य और चुनाव में प्रत्‍याशी हो उसका बयान ‘निजी’ हो सकता है क्‍या? वो भी तब जब चुनाव प आचार संहिता लागू हो और प्रचार का मौसम हो? ऐसा गज़ब केवल भारतीय जनता पार्टी के मामले में हो सकता ह।

भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल से अपनी प्रत्‍याशी और ज़मानत पर बाहर आतंकवाद की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर के विवादास्‍पद बयान का बचाव करते हुए एक विज्ञप्ति जारी की है जिसमें कहा गया है कि यह प्रज्ञा का ‘निजी’ बयान है।

प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव ब्‍लास्‍ट में आतंकवाद की आरोपी है और उसे भाजपा ने भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ लोकसभा चुनाव का टिकट दिया है। प्रज्ञा ठाकुर ने देश में एक विवादास्‍पद बयान देकर हड़कम्‍प मचा दिया है कि मुंबई एटीएस के प्रमुख अशोक चक्र विजेता हेमंत करकरे की मौत उनके ‘शाप’ से हुई।

हेमंत करकरे 26/11 के मुंबई हमले में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। उन्‍हें भारत सरकार ने बाद में अशोक चक्र दिया था।

प्रज्ञा ठाकुर के अपमानजनक बयान की चारों ओर निंदा हो रही ह। आइपीएस असोसिएशन ने भी बयान जारी करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। मामला शुक्रवार की शाम तक जब मीडिया में गरमा गया तो भाजपा के प्रवक्‍ता अनिल बलूनी की ओर से बयान जारी किया गया कि यह प्रज्ञा ठाकुर का ‘निजी’ बयान है।

इस बीच मध्‍यप्रदेश के मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त को प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान पर शिकायत प्राप्‍त हुई है। अधिकारी ने इसका संज्ञान ले लिया है और इस मामले में जांच की जा रही है।

 

2 COMMENTS

  1. और RSS के सुनील जोशी ? अमित शाह के शाप से जज लोया ?

  2.     हरिद्वार के निकट रूड़की क्षेत्र में लोधीपुरा में पतंजलि नेचुरल कम्पनी स्थित है। इस में 8 साल से पुष्पा काम कर रही थी जो बिहारीगढ़ सहारनपुर (उ.प्र.) की रहने वाली है। उसके घर में चार बेटियां हैं। घर के आर्थिक हालात काफी खराब हैं। पुष्पा 8 साल से ठेका श्रमिक के रूप में काम कर रही थी। 14 मार्च को पुष्पा की तबियत खराब हुई तो 4 दिन की छुट्टी ही प्रबंधन वर्ग ने पास की। तबियत सही नहीं होने पर 18 मार्च को पुष्पा ने अपने ठेकेदार दीपक को फोन करके बताया कि मेरी छुट्टियां बढ़ा दी जायें तो ठेकेदार ने एच.आर. विभाग को नहीं बताया। जब 22 मार्च को पुष्पा काम पर लौटी तो उन्हें प्रबंधन वर्ग ने इसलिए काम से निकाल दिया कि आपने तीन दिन छुट्टी बिना बताये कर ली। 

        पुष्पा एच.आर. विभाग में जाकर गिड़गिड़ायी परन्तु कोई भी सुनने को तैयार नहीं था। इसके बाद पुष्पा अपने सहकर्मियों के बीच में गयी कि साथियो आज मेरे साथ अन्याय हो रहा है, कल आपके साथ भी होगा, अतः आपको मेरे साथ आना चाहिए। सभी महिलाओं ने काम छोड़ दिया और कम्पनी के मैदान में आ गयीं। परन्तु कुछ देर बाद एच.आर. विभाग ने महिलाओं को डरा-धमकाकर काम पर भेज दिया। और पुष्पा को घर भेज दिया। इसके बाद पुष्पा छोटे-बड़े नेताओं के पास गयी लेकिन किसी ने भी कोई सुझाव नहीं दिया। फिर किसी एवरेस्ट कम्पनी में काम करने वाले मजदूर साथी ने इंकलाबी मजदूर केन्द्र हरिद्वार के साथियों से सम्पर्क करवाया। 18 अप्रैल को ए.एल.सी. हरिद्वार के यहां पर एक प्रार्थना पत्र लगाया तो हरिद्वार के अधिकारियों ने कहा कि रुड़की श्रम प्रवर्तन अधिकारी के पास प्रार्थना पत्र लगवाओ। यदि रुड़की से न्याय नहीं मिलेगा तो आप हरिद्वार ए.एल.सी. कार्यालय में आ सकते हो। 

        पुष्पा की इस घटना से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि मालिक तभी तक हमें काम पर रखते हैं जब तक हम मालिकों की इच्छा अनुरूप काम करते हैं। जब हम बैलों की तरह काम करते हैं। तो हम सबको अच्छे लगते हैं। यदि हम बीमार पड़ जायें तो हमें दूध में मक्खी की तरह निकाल देते हैं। यह है रामदेव की कम्पनियों में महिला कामगारों की हालात जो ‘स्वदेशी अपनाओ, देश को मजबूत बनाओ’ का नारा देकर अपनी कम्पनियों में सारे श्रम कानूनों का धड़ल्ले से उल्लंघन कर रहे हैं।

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