Home अभी-अभी ट्रंप के ख़िलाफ़ तनकर खड़ा मीडिया क्यों करता है भारतीय पत्रकारों को...

ट्रंप के ख़िलाफ़ तनकर खड़ा मीडिया क्यों करता है भारतीय पत्रकारों को शर्मिंदा !

SHARE

नितिन ठाकुर


तानाशाही प्रवृत्ति का नेता जब जीतता है तो बदतर होता है, लेकिन जब वो हारता है तो बदतरीन साबित होता है। अमेरिका में ट्रंप ने इस बात को एकदम सही साबित किया। मध्यावधि चुनाव में उन्होंने मात क्या खाई वो तो बौखला ही गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच जब सीएनएन के जिम एकोस्टा ने सेंट्रल अमेरिका की तरफ से रोज़गार की तलाश में आ रही हजारों की भीड़ के बारे में ट्रंप से पूछा तो वो आक्रामक हो गए। ट्रंप ने शरण लेने आ रही भीड़ को आक्रमणकारी कहा। एकोस्टा ने इस शब्द का विरोध करना चाहा तो ट्रंप ने उखड़ते हुए कहा कि देश मुझे चलाने दो और तुम सीएनएन चलाओ और अगर तुमने उसे ठीक से चलाया तो टीआरपी भी आएगी।

सीएनएन के बारे में ऐसी रूखी और चलताऊ टिप्पणी एकोस्टा के लिए नई नहीं थी। वो दो साल से इसे झेल रहे हैं। खैर, एकोस्टा फिर भी बैठे नहीं, बल्कि वो किया जो रिपोर्टर अक्सर करते हैं। उन्होंने कुरसी पर वापस बैठने के बजाय तुरंत दूसरा सवाल दागा, लेकिन ये सवाल राष्ट्रपति महोदय के लिए सबसे ज्यादा चुभनेवाला बना हुआ है। एकोस्टा ने अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप को लेकर चल रही जांच पर कुछ कहना चाहा पर उससे पहले ही व्हाइट हाउस की एक इंटर्न ने उनसे माइक लेने की कोशिश की। एकोस्टा ने माइक नहीं दिया तो उसने छीनना चाहा। इस छीनने की कोशिश में ही एकोस्टा का दूसरा हाथ इंटर्न से टकराया। इंटर्न हट गई और एकोस्टा ने सवाल पूरा किया जिसका जवाब ट्रंप ने उसी बेरुखी से एक लाइन में दे दिया। जवाब के बाद ट्रंप ने ‘दैट्स एनफ’ बोला मगर जब एकोस्टा क्रॉस सवाल कर रहे थे तो उन्होंने पोडियम से हट जाने का तमाशा किया। फाइनली इंटर्न ने माइक लिया और एनबीसी के पीटर एलेक्ज़ेंडर को थमा दिया।

तब तक ट्रंप का गु्स्सा थमा नहीं था। अब माइक भी एकोस्टा के हाथ में नहीं था। मौका देखकर ट्रंप ने कहा कि ‘सीएनएन को तुम पर शर्म आनी चाहिए, तुम अशिष्ट और भयानक आदमी हो।’ ट्रंप इतने पर ही नहीं रुके बल्कि उन्हें एकोस्टा और अपनी प्रेस सचिव सारा हकाबी सैंडर्स की एक तनातनी भी याद आ गई तो लगे हाथ उस बात पर भी ताना मारा। उन्होंने एकोस्टा को नसीहत दी कि उन्हें लोगों के साथ खराब व्यवहार नहीं करना चाहिए।

अब माइक पीटर एलेक्ज़ेंडर के हाथ में था जो इतनी देर से खड़े होकर अपने सवाल की बारी का इंतज़ार कर रहे थे। ट्रंप को लगा कि अब सब सामान्य है मगर अपनी साथी के अपमान से आहत पीटर ने सवाल पूछने से पहले दो टूक कहा कि ‘मैं जिम के समर्थन में बोल रहा हूं कि मैं उसके साथ काफी सफर कर चुका हूं और हम सबकी तरह ही वो बहुत मेहनत करनेवाला रिपोर्टर है।’ ट्रंप ने अब अपनी तोप का मुंह पीटर की तरफ खोल दिया और बोले- ‘वैसे मैं तुम्हारा भी फैन नहीं हूं।’ पीटर ने भी कहा कि मुझे पता है तो ट्रंप फिर बोले- ‘तुम बेस्ट नहीं हो।’ ट्रंप के पूरे व्यवहार से जहां लग रहा था कि वो कोई छोटा बच्चा हैं जो बस लड़ने के लिए लड़ रहा है तो वहीं पत्रकारों के व्यवहार से ज़ाहिर हो रहा था कि जैसे उन्होंने ट्रंप के प्रति सम्मान को खो दिया है।

इसके बाद एकोस्टा बिना माइक के ही बोलने लगे तो ट्रंप ने सीएनएन को फेक न्यूज़ चलाने पर लोगों का दुश्मन करार दे दिया, जो कि वो अक्सर कहते हैं ताकि उनके समर्थकों को सीएनएन के विरोध का एक आधार मिला रहे।

इस पूरे नाटक के बाद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस सामान्य नहीं चली। ट्रंप ने पीटर को भी जिम की तरह व्यवहार करने का ताना मारा, फिर एक अश्वेत महिला पत्रकार के सवाल को रेसिस्ट बताया।

थोड़ी ही देर में मालूम चला कि व्हाइट हाउस से बाहर निकलकर लाइव प्रसारण करके लौट रहे जिम एकोस्टा को सुरक्षाकर्मियों ने इमारत में घुसने से रोक दिया है। उनसे व्हाइट हाउस का एंट्री कार्ड भी वापस ले लिया गया। व्हाइट हाउस की कार्रवाई को सीएनएन ने पत्रकारिता पर हमला करार दिया, लेकिन ट्रंप ने अपना ट्रंप कार्ड बचाकर रखा था। राष्ट्रपति के खेमे ने हवा उड़ा दी कि एकोस्टा ने माइक वापस लेते वक्त महिला इंटर्न को मिसहैंडल किया। ये बात और है कि वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एकोस्टा की ना ऐसी नीयत थी और ना हरकत। ऊपर से वो उस इंटर्न से भी माइक ना लौटाने के लिए माफी मांगते हुए सवाल पर टिके हैं।

खैर, इससे किसी को क्या फर्क पड़ता है कि ट्रंप दरअसल किस बात से चिढ़े हुए हैं, सबकी नज़र बस तमाशे पर है। सबसे बुरा ये है कि जीतनेवाले ट्रंप जितने खराब थे वो शायद हारने पर और खराब साबित होनेवाले हैं। दुनियाभर में जवाबदेही से मुक्ति पाने की चाहत रखनेवाले नेताओं के लिए मीडिया की गलतियां उभारकर खुद को बचा ले जाना नया पैंतरा है। इसे ध्यान से समझने की ज़रूरत है। बावजूद इस सबके मैं ट्रंप की तारीफ करना चाहूंगा क्योंकि वो सवालों का जवाब चाहे जैसे भी दे रहे हों लेकिन कम से कम देशभर के पत्रकारों के सामने खड़े होकर सवाल सुनने की हिम्मत तो रखते ही हैं। एक ऐसे देश का नागरिक और पत्रकार होने के नाते जहां का पीएम पूरे कार्यकाल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की हिम्मत नहीं रखता मुझे ट्रंप भी तुलनात्मक रूप से अधिक लोकतांत्रिक नज़र आ रहे हैं, शायद इससे ज़्यादा शर्म की बात कुछ हो नहीं सकती।


वीडिये देखें–

लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार और टीवी पत्रकार हैं।

 



 

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.