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अडानी चढ़े ग्रिपेन पर, तो सरकार की नज़र में भी बढ़ गई कंपनी की औक़ात !

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सितंबर की पहली तारीख़ को तीन ख़बरें छपी हैं जो जुदा होते हुए भी महीन धागे से बँधी हैं। पहली ख़बर ये कि फ़ोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक़ भारत एशिया का सबसे भ्रष्ट देश बन गया है। दूसरी ये कि भारत अब फ्रेंच लड़ाकू विमान रफाल का सौदा आगे नहीं बढ़ाएग। अब दाँव स्वीडन के लड़ाकू विमान ग्रिपेन पर लगेगा। तीसरी ये कि पीएम मोदी के बेहद क़रीबी और उद्योगपति गौतम अडानी ग्रिपेन कंपनी में साझीदार बन गए हैं।पढ़िए, इन ख़बरों के पीछे की ख़बर पर  मुकेश असीम का विश्लेषण- संपादक

2012-13 में भारतीय वायुसेना के लिए सवा सौ फ्रांसीसी रफाल युद्धक विमान खरीदने के सौदा तय हुआ था जिसका उस वक्त की विपक्षी बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारी विरोध किया था और उस वक्त की मनमोहन सिंह सरकार पर सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए फ्रेंच कम्पनी को ब्लैक लिस्ट में डालने की माँग की थी| लेकिन जम्मू कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के बाद पैदा हुई भारत-पाकिस्तान की तनातनी के बीच फ्रांस के साथ रफाल फाइटर प्लेन को लेकर पिछले चार साल से चली आ रही डील को मोदी सरकार ने अचानक पहले से दुगुनी से भी ज्यादा कीमत देकर फायनल कर दिया था। इस विशालकाय रक्षा सौदे को मीडिया द्वारा फायदे का सौदा बताया गया था। भक्त टाइप पत्रकार इस खबर को इस तरह प्रचारित कर रहे थे कि जैसे डील पर मुहर लगते ही पाकिस्तान नेस्तनाबूद हो जाएगा। जबकि इन विमानों के आते आते चार साल लगने वाले थे।

चार साल पहले जब फ्रांस के साथ फाइटर प्लेन की खरीद के लिए समझौता हुआ था तो तब इस प्लेन की कीमत करीब 715 करोड़ रूपये थी, लेकिन अब मोदी सरकार दोगुने से भी ज्यादा कीमत 1600 करोड़ रूपये प्रति प्लेन 36 विमान खरीद रही है। इस हिसाब से यह सौदा दोगुनी से ज्यादा कीमत पर करीब 60 हजार करोड़ रूपये में हुआ| साथ ही बाद में 36 विमान और खरीदने का भी विकल्प इस सौदे में है| मोदी सरकार ने भारत को मिलने वाली टैक्नोलॉजी पर भी समझौता किया। मेक इन इंडिया वाली शर्तों को हटा दिया जिससे विमान कंपनी की मौज हो गई। कंपनी ने बड़ा फायदा उठाया उससे शेयर बाजा़र में भी उसकी मौज हो गई। इस सौदे में अनिल अंबानी को भी बड़ा फायदा हुआ। जानकारी के मुताबिक विमान बेचने वाली कंपनी ने अनिल अम्बानी अंबानी की कम्पनी के साथ साझीदारी का समझौता किया हुआ है जिसके अंतर्गत इस सौदे की रकम का एक हिस्सा अम्बानी की कम्पनी को भी मिलने वाला है|

महँगे रफाल खरीदते वक़्त तर्क था कि यह सर्वोत्तम तकनीक वाला उच्चस्तरीय विमान है जिससे एयरफोर्स की क्षमता बढ़ेगी तथा आगे और विमान भी ख़रीदे जा सकेंगे। लेकिन अब नई खबर यह है कि एयर फोर्स कह रही है कि और रफाल खरीदने की योजना ही नहीं है। कुछ समय पहले चर्चा चली थी कि भारत अब अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन का बनाया एफ-16 खरीदेगा जिस पर अमेरिकी सरकार भी राजी है| लेकिन इसके पीछे की खबर यह थी कि पिछले वर्ष पेरिस हवाई प्रदर्शनी के दौरान अमेरिकी कम्पनी ने भारत के टाटा समूह की कम्पनी को अपना साझीदार बना लिया था|

लेकिन अब चर्चा है कि स्वीडिश युद्धक विमान ग्रिपेन को खरीदने की संभावना प्रबल हो गई है क्योंकि उसको बनाने वाली कंपनी साब, जो अमेरिकी कंपनी की प्रतिद्वंद्वी है, ने गौतम अडानी की कम्पनी से भागीदारी का समझौता कर लिया है। इससे क्या समझा जाये? पहले भारतीय अस्त्र-शस्त्र खरीदी में दलाली और रिश्वत के आरोप लगते रहे हैं| लेकिन अब लगता है कि विदेशी हथियार निर्माताओं ने इसका तोड़ भी निकाल लिया है| वे अब इसके लिए भारतीय सत्तातंत्र में दखल रखने वाले पूँजीपति समूहों के साथ हिस्सेदारी कर रहे हैं जो उनके लिए भारतीय नेताओं/अफसरों से बिक्री की बात कर सकें और बदले में कमीशन कमाएं|

अब प्रधानमंत्री मोदी की गौतम अडानी से नजदीकी की बात सभी जानते हैं जो मोदी की अब तक की हर विदेश यात्रा में साथ नजर आये हैं| ऐसे में यह शक स्वाभाविक है कि जिस कम्पनी का समझौता अडानी से हो उससे बेहतर जहाज कोई हो सकता है क्या? वैसे भी अडानी का जहाज तो सबसे अच्छा होता ही है तभी तो खुद प्रधान सेवक जी उसमें अक्सर सवारी करते पाये जाते रहे हैं!



 

1 COMMENT

  1. ग्रिपेन अगर भारत में बनता ही तो अदानी की भागीदारी से एतराज क्यों?
    विमान भारत में बनेगा तो एतराज क्यों?
    ग्रिपन जहाज से भारत में अदानी भागीदार होतो आमदनी भारत में रहेगी आईएस का एतराज है क्या

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