Home अभी-अभी युनाइटेड फ्रंट की कवायद में आम चुनाव से पहले पालाबदल का सबसे...

युनाइटेड फ्रंट की कवायद में आम चुनाव से पहले पालाबदल का सबसे बड़ा अखाड़ा बनेगा बिहार!

SHARE

केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) की पहल पर दिल्ली में 20 मई को एक बड़ा आयोजन निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण पर किया गया था. “हल्ला बोल दरवाज़ा खोल” नाम के सम्मलेन में बिहार से कई नेता हिस्सा लेने आये. उन्हीं में पार्टी के एक बड़े नेता थे जितेन्द्र नाथ, जो फिलहाल RLSP के बिहार उपाध्यक्ष हैं और इससे पहले चार दशक कम्युनिस्ट पार्टी में बिता चुके हैं. मीडियाविजिल से अभिषेक श्रीवास्तव ने बिहार और देश की राजनीति पर सामाजिक न्याय के नज़रिए से उनसे लम्बी बात की.  

 

यह भी पढ़ें: 

मंडल 3.0 : ‘मीडिया में आरक्षण’ की आवाज़ उठाने वाले सामाजिक न्‍याय के उभरते चेहरे से मुलाकात

पहले चार साल की बधाई, फिर नोटबंदी पर सवाल! सुशासन बाबू, फिर से यू-टर्न का ख़याल?

1 COMMENT

  1. जब आप ने इन पर लेख लिखा था तो विषय की वजह से इन से एक उम्मीद जगी थी. इस इंटरव्यू से वह धूमिल हो गयी. आरक्षण हक़ है, इस पर पूर्ण सहमती है. लेकिन जिस अस्पष्टता के साथ इन्होंने इस विषय को रखा है, उस से लोकप्रियता भुनाने की शाश्वत झलक ही मिलती है. कॉलेजियम सिस्टम अस्सी के दशक में लागू हुआ है. उस से पहले राजनैतिक दलों के शह पर ही नियुक्ति होती थी. भाजपा ने कॉलेजियम सिस्टम के विरुद्ध एक आयोग का स्थापना किया, जिसे असंवैधानिक करार दिया गया. इनकी पार्टी अभी भाजपा के साथ सत्ता में है. इनके इस कदम को बैकडोर तरीका क्यों ना माना जाए? भाजपा के मंसूबों से संविधान में तबदीली स्पष्ट झलकती है तथा न्यायपालिका को लोकप्रियता से दूर रहना ही चाहिए (जो अभी भी नहीं है). दूसरी बात रोजगार जनन के लिए सब मिल कर लड़ेंगे की बात इन्होंने एक लाइन में निकाल दी. वह प्रमुख सवाल है क्योंकि जितनी निजी-सार्वजनिक क्षेत्रों में व्यवस्थित/ संगठित नौकरियां हैं अभी- उन सब में इमानदारी से आरक्षण लागू (जो लगभग असंभव है क्योंकि केवल मंशा ही नहीं क्रियान्वन की समस्या भी है) फिर अभी के हालात में मामूली फर्क ही आएगी. निजी क्षेत्रों में बड़ा हिस्सा असंगठित नौकरियों का है. कुल मिला कर किसी कोने से कोई स्पष्ट नीतिगत बात सुनाई नहीं देती केवल आरोप-प्रत्यारोप और रहस्यवाद ही पेश होता दिखता है.

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.