Home अभी-अभी इ्स्लामोफ़ोबिया फैलाने को ‘रेप गेम’ की ‘फर्ज़ी’ कहानी सुना रहा है टीवी...

इ्स्लामोफ़ोबिया फैलाने को ‘रेप गेम’ की ‘फर्ज़ी’ कहानी सुना रहा है टीवी टुडे का लल्लनटॉप !

SHARE

धरती का कोई कोना नहीं है जो बलत्कृत स्त्रियों के आँसुओं से भीगा नहीं है। किसी भी धर्म, नस्ल या जाति के पुरुष इस अपराध से बरी नहीं हैं। लेकिन अगर इसका इस्तेमाल किसी धर्म विशेष को बदनाम करने के लिए किया जाए तो  नीयत पर गंभीर सवाल उठेंगे। सबसे तेज़ चैनल ‘आज तक’ वाले ग्रुप टीवी टुडे की वेबसाइट दि लल्लनटॉप.कॉम पर ‘तहर्रुश जमाई’ के बारे में एक ख़बर छापी गई है। कहा गया है कि यह अरब देशों में प्रचलित खेल है जिसमें पुरुष किसी स्त्री का सामूहिक बलात्कार करते हैं। 13 जून को प्रकाशित यह ख़बर लगातार उतराती रहती है जिससे पता चलता है कि मौजूदा माहौल में नफ़रत ख़ूब ‘हिट्स ‘दिलाती है, यानी यह एक  कारोबारी नुस्खा भी है। युवा पत्रकार फ़हद सईद ने इस ख़बर की प्रामाणिकता पर कई गंभीर सवाल उठाये हैं जिसे हम नीचे छाप रहे हैं। अगर लल्लनटॉप पत्रकार भी मीडिया विजिल पर अपना पक्ष रखना चाहे तो उसका स्वागत है–संपादक      

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले और काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने हाल ही में इस्लामोफोबिया पर एक शोध रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट बताती है कि डर और नफ़रत फैलाना अब एक धंधा है। 2008 से 2013 के बीच 74 संगठनों में दो सौ छह मिलियन डॉलर इसलिए बांटे गए ताकि वे घृणा फैला सकें। इन संगठनों की ज़िम्मेदारी थी कि अमेरिका में मुसलमानों के प्रति नफ़रत फैलाई जाए और उन्हें ख़तरनाक कहकर आम लोगों को डराया जाए। दुनिया भर में मशहूर और प्रतिष्ठित अख़बार ‘दि गार्जियन’ के इस लिंक पर इसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

(https://www.theguardian.com/us-news/2016/jun/20/islamophobia-funding-cair-berkeley-report)

मगर इस्लामोफोबिया की यह बीमारी अब दूसरे मुल्क़ों में भी पहुंच गई है। मुसलमानों को बुरा या कमतर साबित करने के सुनियोजित अभियान चल रहे हैं जहां मीडिया एक टूल बनकर रह गया है। ज़माने तक यह गंदा काम टीवी चैनल करते रहे और उसी नक्श-ए-कदम पर अब डिजिटल मीडिया है। मुसलमानों के प्रति घृणा बेचना इस मीडिया के लिए सफ़लता का शॉर्टकट बन गया है।

नया नाम टीवी टुडे ग्रुप की वेबसाइट लल्लन टॉप का है। आम धारणा है कि यहां काम करने वाले पत्रकार किसी मुद्दे की तह तक नहीं जाते। उन्हें पत्रकारिता की बुनियादी तमीज़ या विषयों की गहरी समझ नहीं है। हाल ही में इस वेबसाइट ने यूरोप और अमेरिका में सक्रिय एंटी रिफ्यूजी लॉबी के एक प्रोपगंडा तहर्रुश जमाई को ख़बर के रूप में छापा है। साथ ही टीवी टुडे के वातानुकूलित मीडियाप्लेक्स में बैठकर दावा भी कर दिया है कि तहर्रुश जमाई अरब की एक बीमारी है जो अब दुनियाभर में फैल रही है।

सभी जानते हैं कि 2011 से सीरिया में चल रहे युद्ध ने यूरोपीय देशों पर शरणार्थियों को जगह देने का दबाव बढ़ा दिया है। ताक़तवर एंटी रिफ्यूजी लॉबी इन्हें रोकने के लिए हथकंडे अपना रही हैं। मीडिया की मदद से इन शरणार्थियों को हिंसक, अपराधी, यौनाचारी साबित किया जा रहा है। साल 2011 से ही ये लॉबी कई बार ‘तहर्रुश जमाई’ जैसे फर्ज़ी जुमले उछाल चुकी है और लल्लनटॉप पत्रकार ने इसी प्रोपगंडा को अरब संस्कृति का हिस्सा बताकर छाप दिया है।

क्या सचमुच अरब में तहर्रुश जैसा कुछ है?

तहर्रुश अरबी का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ उत्तेजना या उकसावा है लेकिन असल में इसका अनुवाद उत्पीड़न है। मगर लल्लनटॉप पत्रकार ने इसका अनुवाद ग्रुप रेप गेम किया है।

पश्चिमी मीडिया में यह शब्द 2011 में पहली बार तब आया जब मिस्र के तहरीर स्क्वायर पर आवाम क्रांति का जश्न मना रही थी। रिपोर्टिंग के लिए सीबीएस की पत्रकार लारा लोगान भी तहरीर स्क्वायर पर थीं। उन्होंने दावा किया कि तहरीर स्क्वायर के निकट कुछ पुरुषों ने घेरकर उनके साथ यौन हिंसा की।  लारा लोगान के दावे पर कोई सवाल खड़ा करना ठीक नहीं है। यह मानकर चला जाना चाहिए है कि अगर वो ऐसा कह रही हैं तो उनकी बातों में ज़रूर सच्चाई होगी लेकिन क्या उनके या उनके जैसे कुछ अनुभवों को ‘अरब की गैंगरेप संस्कृति’ करार दे दिया जाएगा?

लल्लनटॉप इसी मामले को आधार बनाकर यूरोप और अमेरिका के हवाले से इसके लिए अरब को ज़िम्मेदार बता रहा है। साथ ही कह रहा है कि इन देशों में ‘रेप गेम’ के फैलने की वजह शरणार्थी हैं।

लल्लनटॉप ने इसी साल जर्मनी के कोलोन शहर में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ हुई यौन हिंसा का भी ज़िक्र किया है। यहां महिलाएं नए साल का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर थीं और इस हिंसा के लिए मीडिया में बड़े पैमाने पर शरणार्थियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया और इसे तहर्रुश बताया। लल्लनटॉप ने इस केस को भी ‘रेप गेम’ करार देते हुए ठीकरा अप्रवासियों पर फोड़ दिया है।

मगर लल्लनटॉप इन मामलों के अदालती फैसलों को शायद नहीं पढ़ रहा है। कोर्ट के फैसलों से पता चलता है कि हमलावरों का इरादा जश्न में डूबी महिलाओं के महंगे सामानों की चोरी और लूट करना था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक अभी तक फैसला आए 9-10 मामलों में चोरी और लूट के अपराध पर भी सज़ा हुई है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शरणार्थियों की तरफ़ से जर्मन महिलाओं पर किया गया हमला नहीं था। बीबीसी जर्मनी के संवादताता पॉल हेनली अपनी एक रिपोर्ट में लिखते हैं, ‘कोलोन पुलिस इस बात को स्वीकार को राज़ी नहीं थी कि नए साल के मौक़े पर हुई घटना में शरण चाहने वालों की कोई भूमिका थी।’ मगर लल्लनटॉप इन तथ्यों को पचा गया।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े ईरानी स्तंभकार एलेक्स शम्स ने हफिंगटन पोस्ट पर तहर्रुश प्रोपगंडा के बारे में एक लंबा लेख लिखा है। यह लेख बताता है कि कैसे यौन हिंसा दुनिया के हर मुल्क़ की एक क्रूर सच्चाई है लेकिन जर्मनी समेत दूसरे देशों में एंटी रिफ्यूजी लॉबी इसका इस्तेमाल अपने हितों के लिए कर रही हैं।

रिपोर्ट कहती है कि जर्मनी में 1997 तक पुरुष को अपनी पत्नी के साथ बलात्कार करने का कानूनी हक़ था। अभी भी वहां की अदालतों में रेप के 10 फीसदी से भी कम मामलों का निपटारा हो पाता है। बड़ी संख्या में यौन हिंसा की शिकार पीड़ित रिपोर्ट दर्ज नहीं करवातीं। रिपोर्ट में 2013 के एक ग्लोबल सर्वेक्षण का भी हवाला है। इसके मुताबिक दुनिया की हर तीसरी महिला अपने जीवन में यौन हिंसा का शिकार होती है। मध्य पूर्व में अगर यह आंकड़ा 36 फीसदी है तो हाई इनकम वाले जर्मनी जैसे देशों में लगभग 33 फीसदी महिलाएं मर्दवादी हिंसा झेलती हैं। अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी महिलाएं यौन हिंसा से पीड़ित हैं। 20 फीसदी बलात्कार का शिकार होती हैं और कॉलेज जाने वाली हर पांचवी छात्रा का यौन शोषण होता है। रिपोर्ट का ज़ोर इस बात पर है कि रेप कल्चर पर किसी एक मुल्क़ का कॉपी राइट नहीं है। इसे आयातित नहीं किया जा रहा बल्कि यह दुनिया के हर मुल्क़ों की सच्चाई है मगर हमारे लल्लनटॉपों ने लिख मारा है कि यूरोप और अमेरिका में यह बीमारी अरब से आयातित हो रही है। एलेक्स शम्स का पूरा लेख यहां पढ़ें।

क्या लल्लनटॉप इस लेख को पढ़कर अपने भीतर बजबजाती गंदगी को साफ़ कर पाएगा या फिर क्या वह समझ पाएगा कि कोलोन हिंसा में शरणार्थियों को क्यों घसीटा गया?

तमाम ख़बरें पढ़कर मुझे ऐसे लल्लनटापों की बौद्धिकता पर गहरा शक है। कई बार मन में सवाल उठता है कि नहीं आती पत्रकारिता तो मत करो। क्या कुत्ते ने काटा है या फिर कोई और मजबूरी है जिसकी वजह से पत्रकारिता करनी पड़ रही है?

जर्मनी दुनिया के उन देशों में शुमार है जहां मध्य पूर्व, अफगानिस्तान और सीरिया से सबसे ज़्यादा शरणार्थियों के आवेदन स्वीकार किए गए हैं। बीते साल आवेदनों की संख्या 11 लाख थी और इस साल भी यह आंकड़ा कम होता नहीं दिख रहा है। मगर इन सबके बीच शरणार्थी विरोधी समूहों को समर्थन भी जर्मनी में तेज़ी से बढ़ रहा है जिनके लिए ऐसी ख़बरें प्लांट करना उनकी स्ट्रैटजी का हिस्सा होता है। खेल दरअसल यही है जहां लल्लनटॉप छाप पत्रकार हीरो बनने के चक्कर में बतौर टूल इस्तेमाल होते हैं।

हम जानते हैं कि सीरिया समेत मध्यपूर्व का एक बड़ा हिस्सा युद्ध की चपेट में है। विस्थापितों की संख्या जब हर दिन नए-नए रिकॉर्ड बना रही है तो दुनियाभर में इससे निजात के उपायों पर मंथन चल रहा है। यह नाज़ुक घड़ी होने के साथ-साथ ख़ुद को इंसान साबित करने का एक मौका है जहां हम किसी रूप में शरणार्थियों की मदद और उनकी ज़रूरतें पूरी करने के लिए कुछ कर सकते हैं। मगर इतिहास उनका भी दर्ज होगा जो शरणार्थियों के विरुद्ध चल रहे दुष्प्रचार का हिस्सा बनकर अपनी शैतानियत का प्रमाण दे रहे हैं

ऐसे पत्रकारों को समझाना वक्त की बरबादी है, फिर भी ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर तारिक़ रमादान का एक बयान उनके लिए छोड़े जा रहा हूँ। शरणार्थियों के संकट पर उन्होंने कहा था-​​‘हमारे दुश्मन शरणार्थी नहीं बल्कि वो हैं जो शरणार्थी पैदा कर रहे हैं।’

क्या लल्लनटॉप पत्रकार इस वाक्य का मतलब समझ पाएंगे? मुझे संदेह है।

 

फ़हद सईद

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

22 COMMENTS

  1. Hi! This is my 1st comment here so I just wanted to give a quick shout out and say I really enjoy reading through your posts. Can you recommend any other blogs/websites/forums that go over the same topics? Thanks!

  2. hey there and thank you for your info – I have certainly picked up something new from right here. I did however expertise a few technical points using this web site, as I experienced to reload the site lots of times previous to I could get it to load properly. I had been wondering if your web hosting is OK? Not that I am complaining, but sluggish loading instances times will often affect your placement in google and can damage your high-quality score if ads and marketing with Adwords. Well I’m adding this RSS to my e-mail and could look out for much more of your respective fascinating content. Ensure that you update this again very soon..

  3. Excellent beat ! I would like to apprentice whilst you amend your website, how could i subscribe for a weblog web site? The account helped me a appropriate deal. I have been tiny bit acquainted of this your broadcast offered brilliant transparent concept

  4. wonderful points altogether, you just won a new reader. What may you suggest in regards to your submit that you made a few days ago? Any sure?

  5. Heya i’m for the first time here. I found this board and I find It really useful & it helped me out a lot. I hope to give something back and help others like you aided me.

  6. I feel this is among the so much significant information for me. And i am glad studying your article. However want to remark on some general issues, The site style is great, the articles is really nice : D. Just right job, cheers

  7. Thank you for the good writeup. It in fact was a amusement account it. Look advanced to far added agreeable from you! However, how can we communicate?

  8. Excellent post. I was checking continuously this blog and I am impressed! Extremely helpful info specially the last part 🙂 I care for such information much. I was looking for this certain information for a long time. Thank you and best of luck.

  9. naturally like your web site but you need to check the spelling on several of your posts. Several of them are rife with spelling problems and I find it very bothersome to tell the truth nevertheless I’ll certainly come back again.

  10. Excellent read, I just passed this onto a friend who was doing some research on that. And he just bought me lunch since I found it for him smile So let me rephrase that: Thanks for lunch!

  11. Do you have a spam issue on this website; I also am a blogger, and I was curious about your situation; many of us have created some nice practices and we are looking to trade strategies with other folks, why not shoot me an e-mail if interested.

  12. Pretty section of content. I just stumbled upon your site and in accession capital to assert that I acquire actually enjoyed account your blog posts. Any way I’ll be subscribing to your augment and even I achievement you access consistently fast.

  13. I precisely had to thank you so much once again. I am not sure what I would’ve done in the absence of those methods revealed by you relating to this field. This was an absolute intimidating case in my view, but being able to see a specialized avenue you dealt with the issue forced me to leap over joy. I am thankful for the work and thus trust you realize what an amazing job you are accomplishing teaching the others using your website. Most likely you’ve never got to know any of us.

  14. Hello there! Do you know if they make any plugins to assist with SEO? I’m trying to get my blog to rank for some targeted keywords but I’m not seeing very good success. If you know of any please share. Thanks!

  15. I do agree with all the ideas you’ve presented in your post. They are very convincing and will certainly work. Still, the posts are very short for beginners. Could you please extend them a little from next time? Thanks for the post.

  16. Oh my goodness! an amazing article dude. Thank you Nevertheless I am experiencing challenge with ur rss . Don’t know why Unable to subscribe to it. Is there anyone getting an identical rss downside? Anybody who is aware of kindly respond. Thnkx

  17. It’s laborious to seek out educated people on this subject, but you sound like you already know what you’re talking about! Thanks

  18. It’s arduous to search out educated folks on this matter, but you sound like you understand what you’re talking about! Thanks

  19. Howdy! Do you know if they make any plugins to help with SEO? I’m trying to get my blog to rank for some targeted keywords but I’m not seeing very good success. If you know of any please share. Thank you!

  20. I do like the way you have framed this specific matter and it does provide us some fodder for consideration. Nevertheless, coming from just what I have seen, I only hope as the responses pile on that folks keep on issue and not start upon a soap box associated with some other news of the day. Still, thank you for this fantastic point and while I do not necessarily agree with it in totality, I value the point of view.

  21. It’s actually a great and useful piece of information. I am glad that you shared this helpful information with us. Please keep us up to date like this. Thanks for sharing.

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.