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लोकतंत्र या डरपोकतंत्र ? जज की हत्या की आशंका से मीडिया ‘लघुशंका’ में !

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हिंदी और अंग्रेज़ी कारोबारी मीडिया की आपराधिक चुप्पी के बावजूद जस्टिस बृजगोपाल लोया की संदिग्ध मौत का मसला दब नहीं पाएगा। जस्टिस लोया सीबीआई जज थे और सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के शामिल होने के मामले में फ़ैसला देने वाले थे। पत्रिका की इस सनसनीख़ेज़ स्टोरी को मीडिया विजिल, जनचौक, स्क्रोल, द वायर समेत कुछ वेबसाइटें और एनडीटीवी लगातार फ़ालो कर रहे हैं। टीवी पत्रकारिता के ‘अपवाद कुमार’ यानी रवीश कुमार ने कल यानी 23 नवंबर को एनडीटीवी पर अपना प्राइम टाइम शो लगातार दूसरे दिन इसी मुद्दे पर किया। इस शो में दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस ए.पी.शाह ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए  जाँच को ज़रूरी बताया। रवीश ने तमाम अहम सवालों को उठाते हुए एक तीखी टिप्पणी यह भी की कि यह चुप्पी लोकतंत्र को डरपोकतंत्र में बदल देगा।

इस शो को देखिए और ख़बर को शेयर करके फैलाइए ताकि मसला दबने न पाए और हत्यारे आज नहीं तो कल बेनक़ाब होकर रहें।

5 COMMENTS

  1. ChoopRahegiGarJabaaneKhanzar , LahooPukaarega ( Doesn’t matter if knife is silent, someday blood will speak for itself). High time an alternative print and social media come up. At once. Let this thing happen quickly.

  2. Silence of Amit sah, P M, justice sah who allegedly offered money is raising doubt. And bjp spokesperson? C J I of h c and supreme Court may take suomotu ( waiting another murder your honour!)

  3. Remember Bhagat Singh of our time AvtarSinghPash. In his poem MehnatKiLoot a line is – – – – SabseKhatarnakVoChaandHotaHai…..JoHarekHatyakandKeBadSooneAagano MeUtarataHaiAurApkiAnkhoMe NahiChubhta

  4. Avoid going to extreme. Check how many times and in how caravan, ndtv etc behaved in past. For example – – rampant
    la bour laws violations since 25 years. Maruti 18 July 2012 accident in which a pro worker H R manager died.

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