Home पड़ताल thequint.com बनाम TOI : पाठक की ‘आस्‍था’ और ‘सूत्रों’ की पत्रकारिता के...

thequint.com बनाम TOI : पाठक की ‘आस्‍था’ और ‘सूत्रों’ की पत्रकारिता के बीच लापता सच!

SHARE

बुधवार आधी रात वेब पत्रिका ‘द क्विंट‘ पर नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर के भारतीय फौज द्वारा आतकियों पर किए गए ‘सर्जिकल’ हमले की खबर प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की ऐसी बाढ़ आ गई कि वेबसाइट को दबाव में गुरुवार सुबह दोबारा अपने ‘सूत्रों’ से इसकी पुष्टि करनी पड़ी। जो लोग इस खबर को फर्जी मान रहे थे, उन्‍होंने सुबह होते-होते इसके जवाब में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक खबर का सहारा लेकर अपनी बात को मज़बूती दी कि सेना ने ऐसे किसी ऑपरेशन से इनकार किया है। दिलचस्‍प बात यह है कि टाइम्‍स की ख़बर भी सैन्‍य सूत्रों पर आधारित है।


अपनी-अपनी आस्‍था के हिसाब से ‘सर्जिकल’ हमले की खबर को सच या झूठ मानना एक बात हो सकती है, लेकिन द क्विंट ने पूरी खबर ‘सूत्रों’ के हवाले से चलाई है जिससे स्‍वाभाविक तौर पर संदेह पैदा होता है। शिव अरूर इस बारे में लिखते हैं कि अगर यह ख़बर सच भी हो, तो भी कोई इसे रिपोर्ट कैसे कर सकता है क्‍योंकि ये तो ”कोवर्ट” यानी प्रच्‍छन्‍न ऑपरेशन था और इससे देश की सुरक्षा को ख़तरा पैदा होता है।

 

 

 

 

टाइम्‍स ऑफ इंडिया का हवाला देकर ख़बर को झूठा बता रहे लोग इस बात पर ध्‍यान नहीं दे रहे कि उसमें भी सैन्‍य ‘सूत्रों’ के हवाले से ही लिखा गया है। हद तो यह है कि इसे अतिरंजित करते हुए कई जगह सेना का आधिकारिक बयान बताया जा रहा है।

रिटायर्ड कर्नल और रणनीतिक मामलों के जानकार अजय शुक्‍ला ने लिखा है कि कुछ पत्रकार जान-बूझ कर खबर प्‍लान्‍ट कर रहे हैं जबकि ”सेना ने आधिकारिक रूप से इसका खंडन किया है”।

 

 

 

इस दौरान एक महत्‍वपूर्ण घटनाक्रम में रक्षा मंत्रालय ने मीडिया से कहा है कि सेना के बारे में किसी भी ख़बर को संपादकों को अपने डिफेंस रिपोर्टरों के माध्‍यम से सेना के कोर मुख्‍यालय या कमान में स्थित मीडिया सेंटर से ”प्री-वेरिफाइ” करवाना होगा।

 

 

 

यह निर्देश दि इंडियन एक्‍सप्रेस में प्रकाशित एक ख़बर की प्रतिक्रिया में आया है जिसमें 21 सितंबर को उरी हमले के संबंध में डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह के उस दावे को गलत बताया गया था कि हमलावर चारों आतंकियों के हथियारों पर ”पाकिस्‍तानी निशान” थे।

दि वायर इस संबंध में प्रकाशित अपनी ख़बर में कहता है कि रक्षा मंत्रालय की इस मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है। अकेले इज़रायल ऐसा देश है जहां ख़बरों के प्रकाशन पर सेना का सेंसर लागू है।

बहरहाल, सरहद के दोनों ओर लगातार बढ़ते तनाव के बीच सूत्रों के हवाले से छापी जा रही ख़बरों ने पाठकों के बीच संदेह का माहौल कायम कर दिया है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर दो अहम सवाल उठ रहे हैं। अगर सेना ने वाकई कोई ‘कोवर्ट ऑपरेशन’ एलओसी के पार चलाया है तो इसके बारे में मीडिया को क्‍यों बताएगी। दूसरा सवाल टाइम्‍स की ख़बर के संदर्भ में यह है कि अगर सेना के सूत्रों ने हमले की ख़बर का खंडन किया है, तो यह अस्‍वाभाविक कैसे है।

कुल मिलाकर स्थिति यह बनती है कि सूत्रों पर टिकी रक्षा पत्रकारिता के इस खेल में सारा मामला अपनी-अपनी आस्‍था पर आकर टिक जा रहा है। जिन्‍हें हमले से संतोष मिला है, वे क्विंट की खबर को सही मान रहे हैं और जो उसे सही नहीं मान रहे, वे टाइम्‍स की ख़बर का हवाला दे रहे हैं। विडंबना यह है कि दोनों ही ख़बरें अनधिकारिक हैं।

शिव अरूर इस समूचे घटनाक्रम को ”मनोवैज्ञानिक युद्धकौशल” यानी साइकोलॉजिकल-ऑप्‍स का नाम देते हुए संक्षेप में कुछ तरह एक ट्वीट में समझाते हैं:

 

 

तस्‍वीर साभार 123rf.com

8 COMMENTS

  1. Fantastic website you have here but I was curious about if you knew of any message boards that cover the same topics discussed in this article? I’d really like to be a part of group where I can get feed-back from other experienced people that share the same interest. If you have any recommendations, please let me know. Many thanks!

  2. You made some first rate points there. I seemed on the internet for the problem and found most people will go together with along with your website.

  3. It’s really a nice and useful piece of info. I’m glad that you shared this helpful info with us. Please keep us up to date like this. Thanks for sharing.

  4. I’m usually to blogging and i genuinely appreciate your content material. The article has seriously peaks my interest. I am going to bookmark your web page and maintain checking for new information.

  5. Immediately after study some of the blog posts in your internet site now, and I really like your way of blogging. I bookmarked it to my bookmark web site list and will be checking back soon. Pls take a look at my web site too and let me know what you think.

LEAVE A REPLY