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सरकारी पैसे से पार्टी रैलियाँ करने को चेकपोस्ट तक का उद्घाटन करने में जुटे मोदी!

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रवीश कुमार

केरल में 13 किमी बाइपास का उद्घाटन तो मुंबई में भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय के नए भवन का उद्घाटन। सिल्वासा में मेडिकल कालेज की आधारशिला रखी तो मणिपुर के साओमबंग में भारतीय खाद्य निगम के गोदाम का उद्घाटन। ओडिशा में छह नए पासपोर्ट सेवा केंद्रों का शुभारंभ तो मणिपुर में एकीकृत चेकपोस्ट का उद्घाटन। ओडिशा के नील माधव और सिद्धेश्वर मंदिर के नवीनीकरण और सुन्दरीकरण का शुभारंभ तो केरल के तिरुवनंतपुरम में एक पट्टिका का अनावरण कर स्वदेश दर्शन योजना का शुभारंभ। साइंस कांग्रेस,वाइब्रेंट गुजरात, शॉपिंग फ़ेस्टीवल का उद्घाटन। हजीरा में टैंक में बैठ कर फ़ोटो खींचाई तो मुंबई में मेट्रो के नए चरणों की आधारशिला।

पाँच साल में सरकार के काम के विज्ञापन पर पाँच हज़ार करोड़ से अधिक ख़र्च करने और लगातार रैलियाँ करते रहने के बाद भी प्रधानमंत्री सरकारी ख़र्चे से सौ रैलियाँ कर लेना चाहते हैं। आचार संहिता से पहले उन्होंने सौ रैलियाँ करने की ठानी है। इस लिहाज़ से सौ ज़िलों में उनकी रैली की तैयारी चल रही होगी। एक रैली पर कितना सरकारी ख़र्च आता है इस लिहाज़ से उनके कार्यकाल में हुई सभी रैलियों का हिसाब मिल जाता तो हम जान पाते कि प्रधानमंत्री ने सिर्फ रैलियाँ करने में कई हज़ार करोड़ फूँक डाले हैं।

रैली करना प्रधानमंत्री का अधिकार है। लेकिन वे इसे काम समझ कर करने लगे हैं। जिन चीज़ों की सूची शुरू में गिनाई उनके शिलान्यास से लेकर उद्घाटन का काम उनके मंत्री और सांसद कर सकते थे। लेकिन जब प्रधानमंत्री मंदिर के नवीनीकरण के काम का शुभारंभ करने ओडिशा चले जा रहे हैं तो स्वदेश दर्शन योजना की पट्टिका लगाने केरल चले जाएँ तो फिर इन रैलियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठना चाहिए। ये सभी सरकारी रैलियाँ हैं। इसलिए तरह तरह की योजनाएँ शामिल की जा रही है ताकि जनता को लगे कि प्रधानमंत्री काम से उसके शहर आ रहे हैं।

पिछले एक महीने में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों की प्रेस विज्ञप्तियाँ पढ़ें तो पता चलेगा कि इस वक़्त पोस्ट ऑफ़िस से लेकर बाइपास तक का उद्घाटन प्रधानमंत्री ही कर रहे हैं। पत्र सूचना कार्यालय PIB ने वेबसाइट पर सारी विज्ञप्तियाँ प्रकाशित की हैं। बेशक कई जगहों पर बड़ी योजनाएँ है मगर कई ऐसी हैं जिनका ज़िक्र अभी-अभी किया।

आगरा की रैली में गंगाजल की योजना का शिलान्यास तो समझ आता है लेकिन पूरे आगरा शहर में सीसीटीवी लगाए जाने की योजना की आधारशिला प्रधानमंत्री रखेंगे यह समझ नहीं आता है। यह काम तो स्थानीय सांसद के हिस्से आना चाहिए था। भाषण में प्रधानमंत्री कहते हैं कि सी सी टी वी लगने से आगरा को विश्वस्तरीय स्मार्ट सिटी बनने में मदद मिलेगी! सच्ची ! सी सी टी वी से कोई शहर स्मार्ट सिटी हो सकता है तो हर खिलौने और कपड़े की दुकान को स्मार्ट शॉप घोषित कर देना चाहिए क्योंकि वहाँ सीसीटीवी लगा है। एटीएम को स्मार्ट एटीएम घोषित कर देना चाहिए क्योंकि वहाँ सीसीटीवी लगा है!

शिलान्यास और उद्घाटन की सूची इसलिए लंबी की जा रही है ताकि उसे सरकारी कार्यक्रम का आवरण दिया जा सके। मगर बारीक डिटेल देखने से लगता है कि प्रशासन किसी तरह उनकी रैली को सरकारी बनाने के लिए योजनाएँ जुटा रहा है। क्योंकि इस वक़्त इन रैलियों का आयोजन तो सरकारी ख़र्चे से ही हो रहा है।

प्रधानमंत्री 20 राज्यों की 122 संसदीय सीटों पर सौ रैलियाँ करेंगे। एक ख़बर के अनुसार फ़रवरी तक पचास रैलियाँ ख़त्म कर लेंगे। ऐसा लगता है कि किसी डॉक्टर ने दवा की तरह रैलियों की संख्या लिख कर दे दिया है। एक रैली सुबह और एक रैली शाम को कर लें आप बेहतर फील करेंगे। लगेगा कि आपके पास काम है। लोगों को भी लगेगा कि आपके पास काम है। इसीलिए प्रधानमंत्री कभी आगरा होते हैं तो कभी बोलांगीर तो कभी सिलवासा तो कभी कोल्लम।

आचार संहिता के बाद उनकी दौ से तो कम रैलियाँ नहीं होंगी। हाल के विधानसभा चुनावों में भी पचीस तीस रैलियाँ हो चुकी होंगी। लगता है उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय छोड़ दिया है । उनके लिए पीएमओ बस अड्डे के समान रह गया है। वे एक रैली से दूसरी रैली के बीच बस बदलने या कपड़े बदलने पीएमओ आते हैं। वहाँ पहुँच कर किसी विदेशी मेहमान से मिलकर अगली रैली के लिए निकल जाते हैं।

एक रैली करने में प्रधानमंत्री को कम से कम पाँच घंटे तो लगते ही होंगे।आना-जाना, भाषण की तैयारी करना बहुत बातें होती हैं। आप इस औसत से खुद हिसाब कर लें।

सौ रैलियाँ करने में पाँच सौ घंटे लगेंगे। यानी बीस दिन। तो हिसाब कहता है कि नए साल के पहले तीन चार महीने के बीस दिन वे कोई काम नहीं करेंगे। सरकारी कर्मचारी की छुट्टी भी 28 दिनों की होती है। फिर भी ये बात प्रधानमंत्री ही कह सकते हैं कि वे दिन-रात काम करते हैं। चालीस लाख से अधिक कर्मचारी, सत्तर के आस-पास मंत्री, अनेक सचिव, संयुक्त सचिव फिर भी प्रधानमंत्री ही दिन-रात काम करते हैं। सवाल है कि बाकी लोग फिर क्या करते हैं कि वे प्रधानमंत्री को गोदाम और चेकपोस्ट के उद्घाटन के लिए भेज देते हैं ? क्या प्रधानमंत्री के पास इतना समय है? या उन्होंने यही समझ लिया है कि काम का मतलब भाषण होता है।

लेखक मशहूर टी.वी.पत्रकार हैं।

1 COMMENT

  1. lav kumar singh

    …..लेकिन इस पर भी तो विचार करें कि जब आदमी काम करवा रहा है तभी तो उद्घाटन और शिलान्यास कर पा रहा है। कोई सज्जन नीचे दिए गए आंकड़े ढूंढकर लाएं हैं। जरा इन पर भी विचार करें—–
    PM Modi is inaugurating one or other infrastructure project every few days. That too in different parts of the country. I decided to do a google search on “Modi inaugurates” and found some interesting results which I have put down here briefly. In a nutshell, this government has been finishing long pending projects and executing brand new projects in record time. I am sure there will be many more coming in the next few weeks before the election commission restrictions set in. This list itself is big, hope to see more. Nevertheless, please share this as much as possible. One question also needs to be asked, what has the Congress been doing all these many years?
    1. Bogibeel rail bridge – largest rail and road bridge in India. built in Assam. Started in 2002, languished till 2015 and then launched on 25-Dec-2018
    2. Solapur-Tuljapur-Osmanabad highway in Maharashtra – started in 2014 and finished on 9 Jan 2019
    3. Varanasi multi modal port for inland waterway project – started Aug 2016, completed 12 Nov 2018
    4. Eastern Peripheral expressway – foundation laid in Nov 2015, launched nov 2018
    5. Western Peripheral expressway – started in 2006 by Haryana govt, languished till 2016, inaugurated in November 2018
    6. India’s largest Cancer hospital in Haryana – finished in 3 years, launched on 18 Dec 2018
    7. Kollam Bypass in Kerala -13.1 km length. First foundation laid in 1972. Only 4.5 km completed till 2015. Inaugurated by Modi in Jan 2019
    8. Bhawan-Bhairon Passenger Ropeway Inaugurated For Vaishno Devi Pilgrims – launched dec 25, 2018
    9. First airport in Sikkim, first launched in 2008, work stalled till 2014 due to protests by villagers. Completed on 24th September 2018
    10. Kishanganga dam project in Kashmir – 330Mw hydroelectric power plant. Started in 2007 was scheduled to be completed in 2016, halted due to Pakistan going to Hague. Re-started in 2014 and completed on 19 may 2018.
    11. Two sewerage infrastructure projects worth Rs 199.65 crore under Namami Gange Programme in Prayagraj – 17 dec 2018
    12. Jharsguda airport – second one in Odisha – joint one by AAI and state government. Started in July 2013 – launched in Sep 2018
    13. Mundra LNG terminal in Gujarat – started 2015, launched Sep 2018
    14. Kota Chambal bridge – started in 2006, stopped due to environmental clearances and re-started in 2007. Was to be completed in 2012 but kept delaying. Finally launched in may 2017
    15. Bansagar canal project Mirzapur – agreement for water and power share between MP, UP and Bihar as well as construction. Originally started in 1978, completed and inaugurated by Modi in July 2018
    So please ask the neutral and dynasty loving friends – what has dynasty been doing for so many decades – a government in 4.5 years could achieve so much – why couldn’t they? This is called development that will make India a “developed” country, not doles or “secularism”.

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