Home पड़ताल पत्रकार देश के युद्ध प्रयासों के आवश्यक अंग हैं !

पत्रकार देश के युद्ध प्रयासों के आवश्यक अंग हैं !

SHARE

 भारतीय पत्रकारिता आत्म-विनाश के पथ पर है-शेखर गुप्ता

पाकिस्तानी पत्रकार और टिप्पणीकार प्राय: कहते हैं कि जब विदेश और सैन्य नीतियों की बात आती है तो भारतीय मीडिया उनके मीडिया की तुलना में सत्ता के सुर में अधिक सुर मिलाता है। कड़वा सच तो यह है कि कुछ पाकिस्तानी पत्रकार (ज्यादातर अंग्रेज़ी के) साहसपूर्वक सत्ता प्रतिष्ठानों की नीतियों व दावों पर सवाल उठाते रहे हैं। इनमें कश्मीर नीति में खामी बताना तथा आतंकी गुटों को बढ़ावा देने जैसे मुद्‌दे शामिल हैं। इसके कारण कुछ पत्रकारों को निर्वासित होना पड़ा (रज़ा रूमी, हुसैन हक्कानी) या जेल जाना पड़ा (नज़म सेठी)।

भारतीय पत्रकारों की अपनी दलील है : भारत में कहीं ज्यादा असली लोकतंत्र है व सेना राजनीति से दूर है, इसलिए तुलना अप्रासंगिक है। जहां जरूरत होती है, हम सवाल खड़े करते ही हैं। श्रीलंका सरकार के खिलाफ लिट्‌टे को पहले ट्रेनिंग व हथियार देने में सरकार का अंध समर्थन करने (इंडिया टुडे ने 1984 में मुझे यह स्टोरी ब्रेक करने दी थी। इंदिरा गांधी ने तब मुझे राष्ट्र विरोधी कहा था।) और बाद में भारतीय शांतिरक्षक बल के वहाँ हस्तक्षेप करने के समर्थन का भारतीय मीडिया पर कोई आरोप नहीं लगा सकता। किंतु यह परिपाटी अब बदल रही है और यह सिर्फ उड़ी हमले के बाद नहीं हुआ जब इंडिया टुडे के करण थापर ही एकमात्र ऐसे पत्रकार थे, जिन्होंने सवाल उठाया कि कैसे चार ग़ैर-सैनिक ब्रिगेड मुख्यालय की सारी सुरक्षा को चकमा देने में कामयाब हुए। लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस ढिल्लो आलोचनात्मक आकलन करने वाले एकमात्र रिटायर्ड जनरल थे। वे उन पांच ब्रिगेड में से एक के कमांडर थे, जो 1987 के अक्टूबर में सबसे तेज गति से जाफना पहुंची थीं। वह भी न्यूनतम नुकसान के साथ।

मैं स्वीकार करूँगा कि बदलाव करगिल के साथ हुआ। करगिल युद्ध तीन हफ्तों के इनकार के बाद शुरू हुआ। पाकिस्तानियों ने इनकार किया कि वे वहां मौजूद हैं, हमारी सेना ने इतनी गहराई और विस्तार में हुई घुसपैठ से इनकार किया। जनरलों के पहले जर्नलिस्ट वहाँ पहुँच गए। वहाँ पत्रकारों और सैन्य इकाइयों में एक-दूसरे के लिए फ़ायदेमंद रिश्ता स्थापित हो गया। अंतिम नतीजा सबके लिए अच्छा रहा : भारत की विश्वसनीयता बढ़ी, क्योंकि इसने स्वतंत्र प्रेस को रणभूमि में बेरोक-टोक पहुँचने की अनुमति दी। सेना को यह फ़ायदा हुआ कि उसके असाधारण पराक्रम की कहानियाँ पूरे देश में पहुँचीं। इस सारी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण खबर रह गई : इतने सारे पाकिस्तानी इतने भीतर तक कैसे घुस आए, हमें इसका पता लगने में इतना वक्त क्यों लगा, हमने इसकी आधे-अधूरे मन से (छोटे गश्ती दलों का इस्तेमाल कर) पड़ताल क्यों की या ऐसे विमान क्यों इस्तेमाल किए, जो कंधे से चलाई जा सकने वाली मिसाइलों का निशाना बन सकते थे, जबकि बेहतर विकल्प मौजूद थे। नतीजा यह हुआ कि किसी की बर्खास्तगी नहीं हुई। स्थानीय ब्रिगेड कमांडर सशस्त्र बल न्यायाधीकरण में भेजे गए और बच गए। युवा अफ़सरों व सैनिकों की वीरता की ख़बरें देकर हमने ठीक ही किया, लेकिन राजनीतिक व सैन्य प्रतिष्ठानों को अपना कर्तव्य निभाने में लापरवाही चाहे न भी कहें, बहुत बड़ी अक्षमता के साथ बच निकलने देकर ठीक नहीं किया। सैन्य कमांडरों की नाकामी से बढ़कर ख़तरनाक कोई नाकामी नहीं होती और यही वजह है कि परम्परागत सेना जवाबदेही पर इतना जोर देती है। इस बीच भारतीय मीडिया को ताकत बढ़ाने वाले तत्व (फोर्स मल्टीप्लायर) के रूप में सराहना मिल रही थी। हम उस पल में डूब गए, लेकिन ग़लत छाप भी छोड़ गए : पत्रकार देश के युद्ध प्रयासों के आवश्यक अंग हैं, उसकी सेना की शक्ति बढ़ाने वाले कारक। वे दोनों हो सकते हैं, लेकिन सच खोजने की चाह दिखाकर, सेवानिवृत्त पाकिस्तानी जनरलों पर चीखकर नहीं या चंदमामा शैली के सैंड मॉडल के साथ स्टूडियो को वॉर रूम में बदलकर नहीं। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे यहां सिरिल अलमिडा और आयशा सिद्दीका नहीं हैं, जो ‘शत्रु’ के प्रवक्ता घोषित होने का जोखिम मोल लेकर कड़वा सच बोलने को तैयार हों। भारतीय न्यूज टीवी सितारों (मोटतौर पर) का बड़ा हिस्सा स्वेच्छा से प्रोपेगैंडिस्ट बनकर रह गया है।

जब पत्रकार अपने लिए ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ की परिभाषा स्वीकार कर लेते हैं, तो प्रश्नों के लिए कोई गुंजाइश नहीं बचती। बेशक उड़ी और बाद की घटनाएँ इस लेख की वजह हैं। इसने मीडिया को दो ध्रुवों में बाँट दिया है, एक तरफ अत्यंत प्रभावी पक्ष उनका है, जो न सिर्फ कोई प्रश्न नहीं पूछते बल्कि वे दावे करने में सरकार व सेना से भी आगे निकल जाते हैं। इन दावों को भरोसेमंद बनाने के लिए रात्रिकालीन कमांडो कवायद के ‘सांकेतिक’ फुटेज का इस्तेमाल किया जाता है। साफ कहें तो कोई भी विश्वनीयता के साथ यह बताने की स्थिति में नहीं है कि तीन हफ्ते पहले हुआ क्या था। या तो हमारी सरकार तथ्यों को गोपनीय बनाए रखने में माहिर हो गई है या हम पत्रकारों ने उन्हें खोजना बंद कर दिया है।

दूसरी तरफ बहुत ही छोटा और सिकुड़ता ध्रुव है, खुद को दूसरों से बेहतर समझने वाले संदेहवादियों का। वे सरकार के किसी दावे पर भरोसा नहीं करते, लेकिन कोई तथ्य नहीं रखते, खोजकर कोई बड़ा धमाका नहीं करते। वे बहुत ही मार्मिक ढंग से सरकार से अपने दावों की पुष्टि करने वाले सबूत देने को कहते हैं। पत्रकारिता महाविद्यालय में जाने वाले हर युवा को सिखाया जाता है कि सरकार छिपाती है और पत्रकार को खोजना होता है। यहाँ हमारे सामने संदेहवादी खेमे में सबसे उदार, श्रेष्ठतम शिक्षा पाए, प्रतिष्ठित, ख्यात सेलेब्रिटी पत्रकार हैं, वे धमाकेदार खबर खोजते नहीं, बल्कि प्रेस कॉन्फ्रेंस की मांग करते हैं। वे खबर नहीं प्राप्त कर सकते, लेकिन वे मानक तय कर देते हैं, जिनका दूसरों को पालन करना ही चाहिए। एक समूह कहता है, आप मुझे जितना बता रहे हैं, उससे ज्यादा में भरोसा करता हूँ, मुझे सबूत नहीं चाहिए। दूसरा कहता है, आप जो भी कह रहे हैं, उसमें किसी बात पर मुझे भरोसा नहीं है, इसलिए सैन्य अभियान को सार्वजिनक करें वरना मैं मान लूंगा कि आप झूठ बोल रहे हैं। अब यह न पूछें कि मैं क्यों कह रहा हूँ कि भारतीय पत्रकारिता आत्म-विनाश के पथ पर है। जब यह नारा लगाने को कहें : ‘प्रेम से बोलो, जय भारत माता की’ तो कौन भारतीय इसमें दिल से शामिल नहीं होना चाहेगा, लेकिन यदि आप आपकी सरकार को मातृभूमि और राष्ट्र मान लें तो आप पत्रकार नहीं, भीड़ में शामिल एक और आवाज भर हैं।

.शेखर गुप्ता

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और टीवी प्रस्तोता हैं।यह लेख दैनिक भास्कर में ‘प्रेम से बोल जय भारत माता की’ शीर्षक से छपा जिसे हमने यहाँ बदल दिय है-संपादक)

26 COMMENTS

  1. Hi I am so happy I found your web site, I really found you by accident, while I was researching on Google for something else, Regardless I am here now and would just like to say thanks for a tremendous post and a all round entertaining blog (I also love the theme/design), I don’t have time to read it all at the moment but I have book-marked it and also included your RSS feeds, so when I have time I will be back to read much more, Please do keep up the great work.

  2. Very good written story. It will be supportive to anybody who employess it, as well as yours truly :). Keep doing what you are doing – i will definitely read more posts.

  3. Write more, thats all I have to say. Literally, it seems as though you relied on the video to make your point. You obviously know what youre talking about, why throw away your intelligence on just posting videos to your weblog when you could be giving us something enlightening to read?

  4. This really is the proper blog for any one who desires to locate out about this subject. You recognize so much its nearly difficult to argue with you (not that I really would want…HaHa). You absolutely put a brand new spin on a topic thats been written about for years. Terrific stuff, just wonderful!

  5. Hello there, just became aware of your blog through Google, and found that it’s really informative. I am gonna watch out for brussels. I’ll appreciate if you continue this in future. Numerous people will be benefited from your writing. Cheers!

  6. Hi! This is my first comment here so I just wanted to give a quick shout out and say I genuinely enjoy reading your posts. Can you suggest any other blogs/websites/forums that deal with the same subjects? Thanks for your time!

  7. Thank you for all of your hard work on this blog. Kate takes pleasure in conducting investigation and it is easy to understand why. I notice all of the compelling mode you offer functional things by means of this blog and as well attract participation from some others on that theme while our own daughter is certainly studying a lot of things. Take advantage of the rest of the year. You’re doing a terrific job.

  8. I know this if off topic but I’m looking into starting my own blog and was wondering what all is required to get setup? I’m assuming having a blog like yours would cost a pretty penny? I’m not very web savvy so I’m not 100 positive. Any tips or advice would be greatly appreciated. Many thanks

  9. I want to voice my affection for your kind-heartedness supporting those individuals that really want assistance with this one subject. Your special commitment to getting the message along came to be surprisingly insightful and has regularly encouraged those much like me to reach their ambitions. The interesting help means this much a person like me and far more to my office colleagues. Thank you; from each one of us.

  10. great post, very informative. I wonder why the other experts of this sector do not notice this. You should continue your writing. I am sure, you’ve a great readers’ base already!

  11. Right now it looks like Drupal is the best blogging platform out there right now. (from what I’ve read) Is that what you are using on your blog?

  12. My wife and i ended up being now more than happy that Louis managed to deal with his survey because of the ideas he grabbed from your very own web page. It is now and again perplexing just to happen to be making a gift of tips and tricks which often some people may have been selling. And we all acknowledge we need the website owner to give thanks to for that. Those illustrations you made, the simple website navigation, the friendships you will help to engender – it is most exceptional, and it’s really facilitating our son and our family reckon that that matter is satisfying, and that is wonderfully serious. Many thanks for all!

  13. Hello! I just wanted to ask if you ever have any problems with hackers? My last blog (wordpress) was hacked and I ended up losing months of hard work due to no backup. Do you have any solutions to prevent hackers?

  14. Can I just say what a aid to seek out someone who truly is aware of what theyre talking about on the internet. You undoubtedly know how you can convey a problem to light and make it important. More folks have to learn this and understand this side of the story. I cant consider youre not more standard because you definitely have the gift.

  15. Today, I went to the beachfront with my kids. I found a sea shell and gave it to my 4 year old daughter and said “You can hear the ocean if you put this to your ear.” She put the shell to her ear and screamed. There was a hermit crab inside and it pinched her ear. She never wants to go back! LoL I know this is totally off topic but I had to tell someone!

  16. Wow, wonderful blog layout! How long have you been blogging for? you make blogging look easy. The overall look of your site is wonderful, as well as the content!

  17. Thanks for the auspicious writeup. It in truth was once a leisure account it. Look complicated to more delivered agreeable from you! However, how could we be in contact?

  18. Excellent read, I just passed this onto a friend who was doing a little research on that. And he actually bought me lunch since I found it for him smile Thus let me rephrase that: Thanks for lunch!

  19. Thanks a bunch for sharing this with all of us you actually know what you are talking about! Bookmarked. Kindly also visit my web site =). We could have a link exchange arrangement between us!

LEAVE A REPLY