Home पड़ताल फासीवादी विचारधारा के प्रशिक्षण के लिए होगा RSS का सैन्य स्कूल -‘सैनिक...

फासीवादी विचारधारा के प्रशिक्षण के लिए होगा RSS का सैन्य स्कूल -‘सैनिक विद्या मंदिर’ ?

SHARE

आरएसएस 2020 से सैन्य स्कूल की श्रृंखला ‘सैनिक विद्या मंदिर’ के नाम से खोलने जा रहा है। इसकी पहली शाखा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के शिकारपुर में खोली जा रही है।  इस स्कूल का नाम “रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर” होगा। इन स्कूलों को आरएसएस की शिक्षा शाखा ‘विद्या भारती’ चलाएगी। आरएसएस की इस सैन्य स्कूल की योजना से संघ के एक भूले बिसरे लेकिन बहुत प्रभावी नेता याद आते है जिनका नाम था- डॉ बालकृष्ण शिवराम मुंजे, दरसअल मुंजे को हिंदुस्तान के राजनीति में फासीवाद के बीज बोने के लिए जाना जाता है।

एक समय मुंजे कांग्रेस में बाल गंगाधर तिलक के सहयोगी भी रहे, लेकिन 1920 में ‌तिलक की मृत्यु के बाद मुंजे कांग्रेस से अलग हो गए। वह महात्मा गांधी की नीतियों से शुरू से वह असहमत रहे और बाद में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बन गए। 1930 और 1931 के गोलमेज सम्मेलनों में वे हिन्दू महासभा के प्रतिनिधि के रूप में गए थे। गोलमेज सम्मेलन के बाद उन्होंने यूरोप का भ्रमण किया वो कुछ समय तक इटली में भी रुके। वहाँ वे उस शख्स से मिले जिसके कारण संघ के बड़े से बड़े नेता उनका जिक्र करने से बचते हैं वह था इटली का तानाशाह मुसोलिनी।

इतालवी लेखिका मार्जिया कोसालेरी ने ‘Hindutva’s foreign tie-up in the 1930s: Archival evidence’ शीर्षक से लिखे एक आलेख में लिखा है कि बीएस मुंजे पहले हिंदूत्ववादी नेता थे, जो ‌द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले की इटली की फासीवादी सरकार के संपर्क में आए।

मुसोलिनी को विश्व राजनीति में फासीवाद का संस्‍थापक माना जाता है। मुंजे शुरू से ही उसके मुरीद थे इटली में मुंजे ने कई महत्वपूर्ण मिलिट्री शिक्षण संस्‍थानों का दौरा किया, जिसमे द बलीला और अवांगार्दिस्त ऑर्गेनाइजेशन प्रमुख थी। ये दोनों ही संस्‍थान फासीवादी राजनीति के केंद्र थे, जहां युवाओं को फासीवादी विचारधारा का प्रशिक्षण दिया जाता।

मुसोलिनी

भारत वापस आने पर मुंजे नें ‘द मराठा’ को साक्षात्कार में कहा “वास्तव में, नेताओं को जर्मनी के युवक आन्दोलन और इटली के बलिला और फासीवादी संगठनों का अनुसरण करना चाहिए- मैं सोचता हूँ कि विशेष परिस्थितियों को अनुकूल बनाकर भारत में लागू किए जाने के लिए वे बहुत उपयुक्त हैं।” (‘द मराठा’, 12अप्रैल, 1931)।

1934 में मुंजे ने अपनी एक संस्था “भोंसला मिलिट्री स्कूल” की नींव रखी उसी साल मुंजे ने “केन्द्रीय हिन्दू सैन्य शिक्षा समाज’, जिसका मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं के सैन्य उत्थान और हिन्दू युवाओं को अपनी मातृभूमि कि रक्षा करने योग्य बनाना था, की बुनियाद भी रखी।

मुंजे को हेडगेवार का मेंटॉर भी माना जाता है। दोनों गहरे दोस्त भी थे, उन्हीं की सलाह का अनुसरण करते हुए पहले सरसंघचालक हेगड़ेवार ने संघ के सांगठनिक ढांचा को मुसोलिनी और हिटलर की पार्टी की तरह से आकार दिया।

मुंजे

जैसे फ़ासीवादी पार्टी में ‘ड्यूस’ के नाम पर तथा हिटलर की नात्सी पार्टी में ‘फ़्यूहरर’ के नाम पर ऐसे ही संघ में हर पदाधिकारी को सरसंघचालक के प्रति पूर्ण कर्मठता और आदरभाव से हर आज्ञा का पालन करने की शपथ दिलाई जाती है  कोसालेरी ने भी लिखा हैं कि, फासीवादी संस्‍थानों की प्रशिक्षण पद्धति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रशिक्षण पद्घति में अद्भुत समानताएं हैं।

मुंजे एक जगह लिखते हैं – ‘फासीवादी का विचार स्पष्ट रूप से जनता में एकता स्‍थापित करने की परिकल्पना को साकार करता है। भारत और विशेषकर ‌हिंदुओं को ऐसे संस्‍थानों की जरूरत है, ताकि उन्हें भी उन्हें भी सैनिक के रूप में ढाला जा सके। नागपुर स्थित डॉ हेडगेवार का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसा ही संस्‍थान है।’

मुंजे और आर.एस.एस. की करीबी और इनकी फ़ासीवादी विचारधारा की पुष्टि 1933 में ब्रिटिश सूत्रों में छपी खुफ़िया विभाग की रिपोर्ट से हो जाती है। इस रिपोर्ट का शीर्षक था “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर टिप्पणी” जिसमें संघ के मराठी भाषी क्षेत्रों में पुर्नगठन का ज़िम्मेदार मुंजे को ठहराया गया है।

इस रिपोर्ट में आर.एस.एस. के चरित्र, इनकी गतिविधियों के बारे में कहा था कि – “यह कहना सम्भवतः कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि संघ भविष्य में भारत के लिए वह बनना चाहता है जो फ़ासीवादी इटली के लिए हैं और नात्सी लोग जर्मनी के लिए हैं।”

एक बार फिर RSS मुंजे की विरासत को सहेजती हुई दिख रही है।

मुंजे के “भोंसला मिलिट्री स्कूल”की तर्ज़ देश भर में सैन्य स्कूल खोलने जा रही हैं लगता है निकट भविष्य में ब्रिटिश शासन के खुफिया विभाग की रिपोर्ट सच साबित होकर रहेगी।

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.