Home काॅलम चुनाव चर्चा: आम चुनाव के लिए रेडी स्टेडी गो…

चुनाव चर्चा: आम चुनाव के लिए रेडी स्टेडी गो…

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चंद्र प्रकाश झा 

भारत की 17 वीं लोकसभा के मई  2019 के पहले निर्धारित चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित कर दिए जाने की संभावना है। मौजूदा 16 वीं लोकसभा की पहली बैठक चार जून 2014 को हुई थी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, पांच वर्ष का उसका निर्धारित कार्यकाल तीन जून 2019 को स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसलिए निर्वाचन आयोग को ऐसा चुनाव कार्यक्रम तैयार करना है कि उसके पहले 17 वीं लोक सभा का गठन हो जाए। देश भर में विभिन्न चरण में चुनाव कराने में करीब दो माह लग सकते हैं। इसलिए निर्वाचन आयोग को अगले माह तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करनी पड़ सकती है।

नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा कह चुके हैं कि आम चुनाव के लिए तैयारियां पहले से जारी हैं। वह इन तैयारियों के बारे में भली -भांति अवगत हैं, क्योंकि वह इससे पहले 31 अगस्त 2017 से तीन -सदस्यीय निर्वाचन आयोग के आयुक्त थे। निर्वाचन आयोग के आयुक्त के दूसरे आयुक्त अशोक लवासा है जिन्हें जनवरी 2017 में नियुक्ति किया गया था।

पिछले तीन लोक सभा चुनाव तकरीबन समान अवधि में हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के तहत पहले चरण का मतदान सात अप्रैल को और अंतिम चरण का मतदान 12 मई को हुआ था। उसके पहले 2009 के चुनाव में पहले चरण का मतदान 16 अप्रैल को और अंतिम चरण का मतदान 13 मई को कराया गया था। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान 20 अप्रैल को और अंतिम चरण का मतदान 10 मई को हुआ था। निश्चय ही आगामी आम चुनाव का कार्यक्रम पहले से लंबा नहीं तो छोटा भी नहीं होगा। निर्वाचन आयोग, यह कार्यक्रम घोषित करने के पहले चुनाव संपन्न कराने के लिए आवश्यक सुरक्षाबलों, मतदान और मतगणना में तैनात किये जाने वाले कर्मियों, इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीनों आदि की जरुरत के आकलन और  उनकी उपलब्धता के बारे में सम्बद्ध हल्कों से जानकारी हासिल करने में जुटा बताया जाता है। समझा जाता है कि पिछले कुछ लोकसभा चुनावों की ही तरह आगामी आम चुनाव के लिए भी मतदान देश भर के निर्वाचन क्षेत्रों में छह -सात चरणों में कराये जाएंगे। इसके लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा के बाद करीब दो माह का समय लग सकता है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही आदर्श चुनावी आचार संहिता लागू हो जाएगी। आदर्श चुनावी आचार संहिता के तहत सरकारी घोषणाओं पर लगभग रोक लग जाती है।

कुछ विधान सभा चुनाव भी

लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश , ओड़ीसा , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की विधान सभा के भी नए चुनाव कराये जाने की संभावना है। सिक्किम विधान सभा का 27 मई, अरुणांचल प्रदेश विधान सभा का एक जून , ओड़िसा विधान सभा का 11 जून और आंध्र प्रदेश विधान सभा का 1 मौजूदा कार्यकाल 8 जून को समाप्त होगा। जिन राज्यों की मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल शेष है वहाँ की भी सरकारें अपने मंत्रिमंडल से प्रस्ताव पारित करवा कर नया चुनाव कराने की अनुशंसा कर सकती हैं। तत्काल स्पष्ट नहीं है कि किस राज्य में समय से पहले चुनाव कराने की संभावना है। गौरतलब है कि हाल में तेलंगाना में राज्य सरकार की अनुशंसा पर समय से कुछ पहले ही विधान सभा चुनाव मिजोरम , राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ कराये गए।

जम्मू -कश्मीर विधान सभा के भी नए चुनाव लंबित हैं, जो नवम्बर 2018 से भंग है। उसकी विधानसभा को भंग करने के छह माह के भीतर यानि आगामी मई तक नए चुनाव कराये जाने हैं। जम्मू -कश्मीर की विधान सभा का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। इसलिए पिछले चुनाव के बाद गठित उसकी विधान सभा का कार्यकाल मार्च 2021 में समाप्त होना था। लेकिन राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र वहाँ नए चुनाव कराने में जटिलताएं है। मौजूदा लोकसभा में राज्य की अनंतनाग सीट पर उपचुनाव सुरक्षा कारणों से ही 2016 से ही लंबित है। अनंतनाग, जम्मू कश्मीर की छह लोकसभा सीटों में शामिल है। अनंतनाग लोकसभा सीट जम्मू -कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ( पीडीपी ) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती के इस्तीफा से रिक्त हुई थी , जो उन्होंने अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद के निधन के बाद उनकी जगह राज्य का मुख्यमंत्री बन जाने के बाद दिया था। जम्मू -कश्मीर विधानसभा की 111 सीटों में से 24 पाकिस्तान अधिकृत हिस्से में हैं जहां राज्य के संविधान की धारा 48 के तहत चुनाव कराने की अनिवार्यता नहीं है। इसी बरस 16 जून को भाजपा की समर्थन वापसी से महबूबा मुफ्ती सरकार गिर जाने के बाद वहाँ पहले विधान सभा को निलंबित किया गया और फिर भंग कर दिया गया।

 एक राष्ट्र एक चुनाव

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ‘ एक राष्ट्र एक चुनाव’  का जो सुझाव दिया था उसकी चर्चा अब बंद है। उन्होंने पिछले वर्ष नीति आयोग की बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के समक्ष भी यह प्रस्ताव रखा था। नीति आयोग की बैठक के बाद उसके उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश लगातार चुनाव मोड में ही रहता है। इससे विकास कार्य पर बुरा असर पड़ता है। लोकसभा एवं विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के सुझाव पर अमल की शुरुआत देश भर में सभी चुनावों के लिये एक ही वोटर लिस्ट बनाने के कार्य से हो सकती है। नीति आयोग का सुझाव है कि वर्ष 2024 से लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ दो चरण में कराये जाने चाहिए ताकि चुनाव प्रचार से राजकाज बाधित नहीं हो. उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजकीय संस्थाओं ने ही इसे अव्यावहारिक माना है।

पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में कह दिया कि आयोग लोकसभा के साथ ही सभी राज्यों की विधान सभाओं के भी चुनाव एकसाथ कराने तैयार तो है पर यह व्यावहारिक कदम नहीं होगा। मीडिया की ख़बरों के मुताबिक़ निर्वाचन आयोग के आकलन के अनुसार लोकसभा समेत विभिन्न राज्यों की सभी निर्वाचित विधायी निकायों के चुनाव एक ही साथ कराने के लिए 23 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और 25 लाख वीवीपीएटी मशीनों की जरुरत होगी। इसके लिए ईवीएम पर 4600 करोड़ रूपये और वीवीपीएटी पर 4750 करोड़ रूपये का खर्च आंका गया है। सुरक्षा आदि कारणों से नई ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों का उपयोग 15 वर्ष तक ही किया जा सकता है। इसलिए उनकी खरीद पर हर 15 वर्ष अलग से 10 हजार करोड़ रूपये का खर्च आएगा। उनके रख -रखाव का खर्च अलग होगा। अगर ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’  पर अमल किया जाता है तो इन नई मशीनों का सिर्फ तीन बार इस्तेमाल किया जा सकेगा। अभी इन मशीनों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेज कर उनका अनेक बार इस्तेमाल किया जाता है।

ईवीएम

21 जनवरी, 2019 को लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका में राजनैतिक शरणार्थी बताये गए सैयद शुजा नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि चुनाव के दौरान इस्तेमाल होने वाली इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन ( ईवीएम ) को हैक किया जा सकता है। उनका दावा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के चुनावों में भी ईवीएम को हैक किया गया , और इस काम में सभी छोटी-बड़ी पार्टियां शामिल हैं। सैयद शुजा ने दावा किया कि वह इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ( ईसीआईएल ) का कर्मचारी रह चुका है जो भारत में ईवीएम बनाती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई गंभीर आरोप लगाने वाले सैयद शुजा ने दावा किया कि वह 2009 से 2014 तक ईसीआईएल के लिए काम कर चुके हैं। लेकिन इस कम्पनी के अनुसार सैयद शुजा कभी भी उसका कर्मचारी नहीं रहा है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 22 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि लंदन में यह प्रेस कांफ्रेंस कांग्रेस ने करवाई थी और उसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को भेजा गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैयद शुजा ने अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश नहीं किये। कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी उपस्थिति स्वीकार की पर उसके पीछे अपना हाथ होने से स्पष्ट इंकार किया। उन्होंने सफाई दी है कि वह निजी काम से लंदन गए थे और जब उन्हें बुलाया तो वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में चले गए।

निर्वाचन आयोग ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच करने और शुजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने कहा है।  उधर , कई विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि कम से कम 50 प्रतिशत ईवीएम के साथ वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल ( वीवीपीएटी ) मशीन लगाई जाएँ ताकि मतदान की संख्या आदि का दोनों से मिलान हो सके। इस मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं आया है। अभी चुनिंदा ईवीएम के साथ ही वीवीपीएटी मशीन लगाईं जाती है , जिसके जरिये वोटर स्क्रीन पर कुछ क्षणों के लिए देख तसल्ली कर सकता है कि उसका डाला वोट वहीँ दर्ज हुआ है या नहीं जिसके लिए उसने वोट डाला था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सांसद सुकोमल सेन समेत कुछ की राय है कि वोटिंग ईवीएम से ही होती रहे लेकिन उसकी गणना वीवीपीएटी की कागजी पर्ची से कराने की व्यवस्था की जाए। बहरहाल, शुजा मामले के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने जोर देकर कहा है कि आम चुनाव ईवीएम से ही कराये जाएंगे। अब यह भविष्य के गर्भ में है कि आम चुनाव निर्विवाद होते हैं या नहीं।


(मीडिया विजिल के लिए यह विशेष श्रृंखला वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश झा लिख रहे हैं, जिन्हें मीडिया हल्कों में सिर्फ ‘सी.पी’ कहते हैं। सीपी को 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण, फोटो आदि देने का 40 बरस का लम्बा अनुभव है।)


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