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पंजाब में पांच दिन तक पचास हज़ार किसान धरने पर बैठे रहे, एक ने जान दे दी लेकिन मीडिया सोता रहा!

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पिछले दिनों राजस्‍थान में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर तेरह दिन आ्रंदोलन किया, तो एकदम आखिरी मौके पर जाकर मीडिया की नींद खुली। जब तक कोई कवरेज दिल्‍ली से हो पाती, सरकार के साथ बातचीत कर के आंदोलन को वापस ले लिया गया। पंजाब में पांच दिनों से सात किसान संगठनों के पचास हजार से ज्‍यादा किसान धरने पर बैठे रहे और आखिरकार 26 सितंबर को उठ गए, लेकिन अब तक इसकी खबर मीडिया में नहीं आई है।

स्‍थानीय अखबारों टिब्‍यून और अंग्रेज़ी के अखबारों को छोड़ दें तो पाठकों को कानोकान खबर तक नहीं हुई कि पटियाला के बाहरी इलाके और बठिंडा से 21 सितंबर तक 300 किसानों को गिरु्तार किया जा चुका था और सारे नाके बंद कर दिए गए थे। हाइकोर्ट के निर्देश पर चंडीगढ़ और पटियाला में किसानों का आंदोलन रोकने के लिए पैरामिलिटरी फोर्स लगा दी गई थी।

पांच दिन चले कर्ज माफी के इस आंदोलनन में एक किसान की मौत भी हुई है। एक और किसान को पूरी देह में लकवा मार गया। क्रांतिकारी किसान यूनियन के राज्‍य अध्‍यक्ष छिंदर पाल सिंह सीधे जेल से धरनास्‍थल पर भाषण देने आए थे, लेकिन भाषण देने के बाद वे वहीं बेहोश हो गए। वे आइसीयू में फिलहाल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

पंजाब के किसान कुल 13 लाख किसानों को पूरी तरह कर्ज माफी की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। उन्‍होंने फैसला कर लिया है कि सरकार के साथ अब कोई भी बातचीत नहीं करनी है। उन्‍होंने 27 अक्‍टूबर का अल्‍टीमेटम राज्‍य सरकार को दिया है। आंदोलन का नेतृत्‍व सात किसान संगठन कर रहे हैं- भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां), बीकेयू दकौंदा, बीकेयू क्रांतिकारी, क्रांतिकारी किसान यूनियन, कीर्ति किसान यूनियन, किसान संघर्ष समिति (आजाद) और किसान संघर्ष समिति (पन्‍नू)।

सरकारी योजना के तहत करीब साढ़े दस लाख किसानों के लिए 2 लाख तक के कर्ज माफी की योजना की गई है लेकिन अतिरिक्‍त ढाई लाख किसानों को इसके दायरे में लाने के लिए सरकार को 80,000 करोड़ रुपये की जरूरत होनी है। किसान धान की भूसी को जलाने की भी मांग कर रहे हैं। इसके अलावा माझा क्षेत्र के किसानों की चिंता का एक और कारण ट्यूबवेल पर मीटर लगाया जाना है जिससे उन्‍हें आशंका है कि बबिजली के बिल भरने को उनसे बाद में कह दिया जाएगा।

पिछले हफ्ते आंदोलनरत किसानों से बात करने के लिए सरकार ने कथित रूप से तीन विधायकों की एक कमेटी बनाई थी, लेकिन हिंदुस्‍तान टाइम्‍स में आए बयान के मुताबिक किसान नेता दर्शन पाल का कहना है कि कमेटी ने उनसे कभी भी कोई संवाद स्‍थापित करने की कोशिश नहीं की।

 

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