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हिंसक अनुभवों के मानसिक परिणाम: कश्मीर में `जन्म लेती एक और अदृश्य तबाही

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मैं एक छोटे तंग कमरे में फर्श पर बैठा मरीज़ों को देख रहा था, जब मैंने कमरे के बाहर किसी के गिरने की आवाज़ सुनी। एक युवती बेहोश होकर गिरी हुई थी। मैंने फर्श पर ही उसकी जांच की, क्योंकि जहां मैं दवाखाना चला रहा था वहां उन्हें लिटाने की कोई और व्यवस्था नहीं थीI वह कमज़ोर दिख रही थी पर उसकी नब्ज़ स्थिर थी। उसका रक्तचाप थोड़ा कम था, पर वो ठीक ही लग रही थी। वह कुछ मिनटों में होश में लौटी।

एक सप्ताह पहले, उस इलाके में ‘सांप्रदायिक दंगा’ हुआ था।  स्थानीय लोगों के एक विरोध प्रदर्शन के बाद, एक सुनियोजित भीड़ ने उनके घरों पर हमला बोल दिया था, हाथ में पत्थर और घर जलाने के लिए मशाल लिए। फिर पुलिस आई। और उसने वही किया जो स्थिति पर ‘नियंत्रण’ के लिए हमेशा करती है। आंसू-गैस के गोले दागे, लाठी चार्ज किया और कुछ .303 गोलियां दागीं, उस कुख्यात प्रथम विश्वयुद्ध की एनफील्ड राइफलों से जो दिल्ली पुलिस को 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘बाग़ियों’ से लड़ने के लिए दी गई थीं। उसके बाद बस्ती की घेराबंदी की गई और इस संवेदनशील इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया। युवा लड़कों को पुलिस मनमाने ढंग से उठाने लगी। उनमें से कई अगले कुछ सालों तक फिर दिखाई नहीं दिए।

‘संवेदनशील इलाका’ ऐसी जगह को कहा जाता है जहां धार्मिक अल्पसंख्यक या दलित/आदिवासी समुदायों के गरीब लोग रहते हैं। (उदाहरण के लिए जोर बाग, गोल्फ लिंक्स, सुंदर नगर और वसंत विहार ‘संवेदनशील इलाके’ नहीं हैं।)

खैर, जिस दिन कर्फ्यू में कुछ ढ़िलाई हुई, हम कुछ कार्यकर्ताओं के साथ दंगा प्रभावित क्षेत्र में गए थे। जो दृश्य हमने वहां देखा, वैसा ही था जैसा 1947 के बारे में मेरे माता-पिता ने मुझे बताया था या 1984 में जो मैंने खुद देखा था, बस शुक्र है कि यह थोड़ा छोटे पैमाने पर था। अधजले घरों में बीमार और कमज़ोर लोग।  शरीर, दिल और आत्मा से घायल पुरुष, नाउम्मीद बैठे हुए, हिम्मत हारे हुए, अपनी उदास आँखों से हमें देख रहे थे। महिलाएं तो खैर कहीं दिखाई नहीं दे रही थीं। हमें तुरंत लगा कि हमें ‘कुछ करना चाहिए’। हमने लोगों से बात करने की कोशिश की और उनमें से कुछ जो बोल सके, उनसे पता चला कि उनके घर में या पड़ोस में कोई न कोई बीमार व्यक्ति है जिसे तुरंत चिकित्सकीय सहायता की ज़रुरत है। हमने ज़रूरत की चीज़ों की सूची बनायी ताकि हम प्रथमोपचार जैसा कुछ शुरू कर सकें। हमने कुछ बुनियादी दवाएं खरीदीं, जो अधिक मात्रा में खरीदी जाएँ तो बहुत सस्ती आती हैं।

स्थानीय लोगों ने एक कमरे की व्यवस्था की जो ऐसे घर में था जिसका कुछ हिस्सा जला हुआ था। हमने अपना अस्थाई दवाखाना वहां शुरू किया। हमने खांसी के सिरप, एंटीबायोटिक्स अथवा दर्द निवारक गोलियां, दमे की दवाइयां आदि बांटना शुरू की, और कभी कभार ज़ख्मों पर पट्टी कर दिया करते थे।

उस महिला पर लौटें जो बेहोश हो गयी थी- मैंने उन्हें पानी दिया, एक कप चाय पिलाई और थोड़ा दिलासा व दवाएं देकर विदा किया।

बस्ती में हर दिन मैंने अपने देश के बारे में, लोगों के बारे में और जीवन के बारे में नयी-नयी बातें देखीं, जो मैं पहले नहीं जानता था। मैं गरीबी को प्रत्यक्ष रूप से अपने सामने देख रहा था। मैं अपने समय के कई बड़े कलाकारों से, संगीतकारों से मिला जो उपेक्षा की वजह से ख़तम हो रहे थे, और भी कई किस्से हैं, पर वह मैं और किसी दिन सुनाऊंगा।

दवाखाने में लगभग रोज़ जो मैंने अद्भुत बात देखी वह युवतियों का दवाखाने में या घर में अचानक बेहोश होकर गिर पड़ने की घटनाएं थीं। पहले दिन मैंने एक युवती को अचानक बेहोश हुए देखा था, दो हफ्ते बीतते-बीतते यह संख्या बढ़कर रोज़ लगभग चार-पांच हो गयी। मैं हैरान हो गया। चिकित्सकीय जांच में मैंने उन्हें ठीकठाक पाया। सभी युवा थीं, 20 वर्ष की उम्र से 40 वर्ष की उम्र के अन्दर ही होंगी, पर फिर भी वह बेहोश होतीं। वह सब गरीब थीं पर उनके परिवारों के पुरुष कोई भुखमरी के शिकार नहीं थे, तो फिर समस्या क्या थी? उस इलाके के पुरुष आम तौर पर रेहड़ी-पटड़ी वाले, साइकिल पंक्चर ठीक करने वाले, कारीगर, बढ़ई, मेकैनिक, बिजली का काम करने वाले, रिक्शा खींचने वाले, बस कंडक्टर और अन्य तरह की दिहाड़ी पर काम करने वाले थे, जो कर्फ्यू के कारण काम पर नहीं जा पा रहे थे और इसीलिए कमा नहीं पा रहे थे। जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे उनकी मामूली बचत गायब होती जा रही थी। जाड़े की गुनगुनी धूप में पुरुष बेकार, हताश भटकते रहते थे, पर फिर भी ठीकठाक दिखते थे। कभी कभार मज़ाक भी कर लेते थे। भुगतना औरतों को पड़ता था। उन्हें अपना चूल्हा जलाए रखने के लिए, अपने बच्चों की देखभाल के लिए, और जिन्हें पुलिस उठा ले गयी थी उन अपनों के लिए बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। मैं हालांकि फिर भी औरतों के बेहोश होने की घटनाओं के सिलसिले को समझ नहीं पा रहा था। जब तक एक के बाद एक महिलाओं ने मेरे सामने वही कहानी नहीं दोहराई। वह लगभग नहीं के बराबर खाती थीं, चाहे घर में खाना उपलब्ध हो, और पानी भी बहुत कम पीती थीं। पर क्यों?

बाद में मुझे बताया गया कि महिलायें पेशाब तो घर के किसी कोने में कर लेती थीं, जहाँ से पानी की निकासी हो। पर शौच के लिए केवल अँधेरा होने के बाद और पौ फटने से पहले ही जा पाती थीं। चूंकि रात का कर्फ्यू जारी था इसलिए वह तब तक खाना टाल देतीं थीं जब तक भूख से मरने की नौबत न आ जाए, ताकि उन्हें शौच के लिए जाना ना पड़ें। बस्ती में मैंने जो छह महीने बिताए उनमें मैंने महिलाओं के बारे में, उनकी चिंताओं, उलझनों और डर के बारे में काफी कुछ जाना। दुनिया के बारे में उनके नज़रिए, समाज में उनकी भूमिका, हौसले और दृढ़ निश्चयता के बारे में। इसके बावजूद उनकी नाज़ुक स्थिति बिलकुल साफ़ रूप से दिख रही थी। वह टूट रही थीं। बच्चों को और पुरुषों को सँभालने (जो चरम हताशा और गुस्से की अवस्था में थे) में रातों को सो नहीं पाने के अलावा, अपने गायब बेटों और परिजनों के लिए भी चिंतित और भयभीत थीं।

‘पी.टी.एस.डी’* के बारे में मुझे किताबों और अखबारों से (खासकर पूर्वोत्तर की ख़बरों के कारण) जानकारी थी, पर यहाँ जो था वो सतत जारी रहने वाला तनाव था। उनमें हर संभव मनोवैज्ञानिक विकार देखा जा सकता था। पहली दिक्कत जो तनाव, भूख और पानी की कमी पैदा करती है, वह है मासिक धर्म में समस्या। सभी महिलायें यह जानती हैं। परीक्षाओं, यात्रा, तनाव, शोक आदि के दौरान पीरियड नियमित नहीं रहते। हर वह औरत जिसका मासिक धर्म कुछ दिन भी देरी से होता है, जानती हैं कि यह कितना तकलीफदेह हो सकता है, और यहाँ तो कई महिलाओं को महीनों से मासिक धर्म हुआ ही नहीं था। ‘पी.टी.एस.डी’ के बारे में मैंने जो भी पढ़ा था, सब मेरी आँखों के सामने हो रहा था, रोज़।

मैं जब यह लिख रहा हूं, चार सप्ताह से अधिक हो चुके हैं कि कश्मीर में लगभग 80 लाख लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ, कार्यकर्ता, एक आइ.ए.एस अधिकारी जिसने इस्तीफा दे दिया- सब ने कश्मीर के लोगों की पीड़ा के बारे में बोला या लिखा है। हर किसी ने, सिवाए तथाकथित पत्रकारों के। जो कहा गया है उसमें मैं और कुछ जोड़ने में सक्षम नहीं हूं I पर मैं ठोस अनुमान लगा सकता हूं कि वहां की महिलाओं पर क्या गुज़र रही होगी। ऊपर लिखे मेरे अपने पेशेगत अनुभव के विपरीत, मैं यह समझता हूँ कि सब महिलाएं एक ही सामाजिक वर्ग से नहीं आतीं। कुछ उन महिलाओं जितनी गरीब होंगी जैसी मैंने 27 साल पहले देखी थीं, और कुछ अमीर। वह डॉक्टर, वकील, पत्रकार, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर या गृहणियां हो सकतीं हैं , पर उनकी समस्याएं लगभग एक जैसी होंगी। हाँ, भुखमरी और शौचालयों की कमी की स्थिति सब में एक जैसी नहीं होगी। पर तनाव, भय और असुरक्षा समान होगी। जो स्वास्थ्य-संबंधी समस्याओं से जूझ रही होंगी, उन्हें चिकित्सकीय देखभाल – रोज़मर्रा और आपातकालीन दोनों – नहीं मिल पा रही होंगी। जो एक महीना पहले पूरी तरह स्वस्थ रहीं होंगी, उन्हें आने वाले कई वर्षों तक, या हो सकता है ज़िन्दगी भर भी, गंभीर समस्याएं होंगी। आपको एक उदहारण देना चाहूँगा।  मध्यम-स्तर के उच्च रक्तचाप (हाइपर-टेंशन) या मधुमेह (डाइबिटीज़) वाले एक पुरुष और एक महिला जो गर्भवती नहीं है, दवाईयों के कुछ डोज़ न मिलने से भी शायद बच जाएँ। पर इन्हीं रोगों से ग्रस्त एक गर्भवती महिला इन दवाओं का केवल एक डोज़ न मिलने पर अपनी ज़िन्दगी और बच्चा खो सकती हैं।

इतनी बड़ी आबादी के एक साथ और इतनी लम्बी अवधि तक पी.टी.एस.डी का सामना करने के नतीजे भीषण होंगे। सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक समस्याएं इतनी ज़्यादा हैं कि यहाँ समझाना मुश्किल है। यह सेनिटरी नैपकिन की उपलब्धता जितनी साधारण बात से लेकर, व्यापक डिप्रेशन की महामारी और आत्महत्याओं तक हो सकती हैं। परिणाम नरसंहार जितने भयानक हो सकते हैं। सरकार को एक मिनट अधिक के लिए भी इस घेराबंदी को जारी रखने की सलाह देना गलत होगा। एक मामूली चिकित्साकर्मी का आज की शक्तिशाली सरकार से यही कहना है – समय रहते सुनिए वरना हम सब तबाह होने वाले हैं! पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है। हम सब इस दिन के लिए उम्र भर पछतायेंगे।

मैं नास्तिक हूं इसलिए प्रार्थना भी नहीं कर सकता, लेकिन आप में से जो कर सकते हैं ज़रूर दुआ कीजये इन लोगों के लिए जो बिना अपनी किसी गलती के ऐसे अमानवीय हालात झेल रहे हैं । चाहे हिन्दू हों, सिख हों, मुस्लिम, ईसाई, जैन, बौद्ध या फिर नास्तिक। भारतीय हों या प्रवासी भारतीय या फिर गैर भारतीय, हम सब आज के दिन को उम्र भर पछताएंगे। यह सालों तक हमारे सामूहिक अन्तरात्मा पर बोझ बना रहेगा। देश की घायल आत्मा को ठीक करने का कोई मरहम नहीं है।

इस चरण में यह लंबा संदेश साझा करें और उम्मीद करें कि यह भद्दी योजना जो कुछ संकीर्ण लेकिन ताकतवर लोगों ने बनायी है, जल्दी समाप्त हो जाए।

वीकीपीडिया पर  पोस्ट ट्रामाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के बारे में पढ़ें। 

*पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पी.टी.एस.डी) उस मनोरोगिक अवस्था को कहते हैं जो दर्दनाक या ख़ौफ़नाक घटनाओं के अनुभव या साक्ष्य से पैदा होती है। ख़ौफ़नाक घटनाएं जैसे प्राकृतिक आपदा, बड़ी दुर्घटना,आतंकित करने वाले हमले, युद्ध, हिंसक वारदात जैसे बलात्कार, हिंसक हमले, सामूहिक हिंसा, यौन शोषण, दंगे आदी इस तरह की मानसिक स्थिति पैदा करते हैं । निरनतर हिंसा का अनुभव या सामना करने से (चाहे व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से)  इंसान के अंदर उस अनुभव से जुड़ी तीव्र और तकलीफदेह विचार और भावनाएं आने लगती हैं, जो कि उन खौफनाक अनुभवों के ख़त्म होने के बहुत बाद तक भी ज़िंदा रहती हैं।  इसके लक्षणों में शामिल है अतीतावलोकन, भयावह सपने, घटना के बारे में बेकाबू रूप से विचार आना, और अत्यधिक उदासी, चिंता व बेचैनी।
वह अन्य लोगों के साथ और अपनी ज़िंदगी से अलगाव और कटा हुआ महसूस कर सकते हैं। और ऐसे अनुभवों से दूर रहने की कोशिश करते हैं जो उन्हें उन दर्दनाक घटनाओं की याद दिलाएं।  इस अवस्था का गहरा असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर होता है।

डॉक्टर पुनीत बेदी दिल्ली में गायनोकॉलोजिस्ट और ओब्स्टेट्रीशियन हैं (स्त्री-रोग व प्रसूति विशेषज्ञ) जिन्हें पिछले 35 सालों का अनुभव है। 
डॉक्टर पुनीत बेदी के फेसबुक पोस्ट का उनकी अनुमति से अनुवाद ‘कश्मीर ख़बर‘ द्वारा किया गया है

28 COMMENTS

  1. ये सब ठीक है लेकिन कश्मीर की जनता को भी समझ ऑना | जाहिऐ की वे भारत सरकार की ज्युडी शिअरी मे रहते है तो भारत सरकार का साथ दे न की अलगाव वादी का

    • हा भाई जिस के पास ताकत नहीं होती उसे ही समझदार बनना पड़ता है |
      और जिस के पास ताकत होती वह अपनी बात मनवाना ही जानता है |
      और इसी को तो अहंकार कहते है | है ना? तो अब जिस भी धर्म के मानने वाले हो उस मे अहंकार और अहंकारी के बारे मे पढ़ लो……..

      • सही है…..1990 में मस्जिदों के लाउड स्पीकर से कश्मीरी पंडितों के लिए हुए एलानों का याद है य्या भूल गए…वैसे जो नीच होता है,वो अपने किये कुकर्मों को भूल जाता है ! और जब समय माकूल जवाब देता है तो वही नीच छाती कूटता है

        • It’s easy for you to comparison Kashmir with Assam. ..did u mention how many soldiers martyr in kashmir. .unki families kesi hogi..kitni pida hoti hai..easy for us write here Jai Hind uske baad sari Umar kese rhte hai ..what abt kashmiri pandits…u r talking abt manshik pida but not rape, killing kashmiri pandits ..wht the rubbish

          • Yess.. I agree to you .. but will you tell me that if one of member of any family does the wrong doer otwent to against of rule of law , the whole member of that family should be punished… is it right? Throughout country many of Groups are doing and going against of law , Many of police officers have been attacked and killed by groups members.. but the whole society can’t be punished because of some of wicket persons…

            NEED TO WAKE UP YOUR CONSCIENCE..

            IN NAGALAND THERE WERE MANY OF GROUPS LYING ND DOING ABSOLUTE AGAINST OF COUNTRY… SO BE HUMAN AND SUPPORT HUMANITY.. OTHER WISE AAJ KASHMIRI KE SATH KAL MERE SATH FIR AANE WALE DINO MAI AAP KE SATH… YEH SAYASATDAH HAIN INHE APNI KURSI SE JYADA KISI CHIJ SE MOHABBAT NHI…

          • Right. No one cares for kashmiri pandits. When it is matter of mualims everyone showing their concern

        • To accha hai badla lene ka samay hai … aapki sonch bahoot Umda hai..

        • Itni sari army aur police tainat hai waha to kyun kashmiri pandito ko wapas nahi bhejti ye sarkar.. aur jaha par unko rakhe waha par bhi unko suraksha di jaye… agar pure state ko is tarah baan me le sakte hai to pandito ki suraksha nahi kar sakte kya?
          Niyyat kuchh aur hai aur dikha kuchh aur rahe hai..

    • Aur yeh Kaise Samazh aayega????? Iss tarah se???? Solutions bahut ho sakte hai… par kya sahi solution hoga??? Aapke pas jawab hai lagta hai…isliye puch liya!!!!

  2. Love you sir … really heart broken

  3. सही है…..1990 में मस्जिदों के लाउड स्पीकर से कश्मीरी पंडितों के लिए हुए एलानों का याद है य्या भूल गए…वैसे जो नीच होता है,वो अपने किये कुकर्मों को भूल जाता है ! और जब समय माकूल जवाब देता है तो वही नीच छाती कूटता है !
    कश्मीर में कभी पंडित भी हुआ करते थे ….कहाँ गए वो सब ???

    बस भड़वागिरी करने की कह दो

  4. log kashmiri pandito ke naam per , zulm ko justify karne me lage hai, khus hai , mene aajtak kahi nahi padha kya hua unka kon zimmedaar tha ? ye kattar panthi vichardhara ithihas ko kyu dhora rahi hai, kya pura desh khoon ki holi khelga ek dusre se , Muslimo ka bi katleaam hua, sikho ka bhe katleaam hua , kya unhe bhe badla lene ki bhawna qayam karni chye? Sikh aur Muslim log ise bhul gye kyunki wo aage badhna chahte hai ?aur ek manuwad farji bhusakhyank (sab nahi) kaum hai jo hai badla lena chahti hai…

  5. Sir me A nhi kah rha hu . ki 1990 me Kashmiri Hindu ke sath kya julm huwa . sir kya aapne un Kashmir ab tak ki taklif ho samjha he kbhi . jo apne hi desh me sarnarthi ki tarah rah rhe he . apne kbhi un garibo ke bare me socha he jo garib tabke se aate he vo des me gader ki jindgi ji rhe he . des me badti jansankhya ke karan des me sansadhano ki kami he .lekin aap logo ka dil un rohingya muslimo .or bangadesi musalmano ke liye dhadkta he. Sahi bat to A He ki aap desh me sab jagah ke rohingya ko bsa kr Jihadiyo ko begunah bta . kr desh me islam thopna chahte ho .

  6. Sir me A nhi kah rha hu . ki 1990 me Kashmiri Hindu ke sath kya julm huwa . sir kya aapne kabhi un Kashmiri Hindu ki ab tak ki taklif ko samjha he kbhi . jo apne hi desh me sarnarthi ki tarah rah rhe he . apne kbhi un garibo ke bare me socha he jo garib tabke se aate he vo des me gater ki jindgi ji rhe he . des me badti jansankhya ke karan des me sansadhano ki kami he .lekin aap logo ka dil un rohingya muslimo .or bangadesi musalmano ke liye dhadkta he… Sahi bat to A He ki aap desh me sab jagah ke Muslimo ko bsa kr..or Jihadiyo ko begunah bta kr
    ..desh me islam thopna chahte ho .

    • Bilkul galat soch rahe ho 1990 mein jo panditon ko Bahar Kiya gaya tha vah musalmanon nahi kiya vah and Tak Wadi ne kiya Jinda Koi Dharm Nahin Hai yah Baat aap Musalman Musalman aatankwadi Nahin Hota Har aadami Apne Dharm per Kar Chale 2 se and Tak Wadi banne ki jarurat Nahin Pade Kisi Jamane ke andar julm Ke bad aadami Baaghi Hota tha aaj pad aur Day ke liye Paise Ke Liye aadami Bagi Hota Hai yah musalmanon Mein Nahin Ja Kahin Yahi Kami Hai Desh Se gaddari Karte Hain se Kai Gaddar pakde gaye hain ismein sabse pahle Naam Aata Hai Nathuram Godse ka Sabse Badi Jad Jisne Mahatma Gandhi ki Hatya ki Tumhen Yad Nahin Hai 19 90 Mein Jo Hua usmein Keval Kashmiri Pandit hi hi Nahin Hue Muslim bhi Hota Tumhen vah bhi

  7. Wow, Thx for opening our eyes, have been reading your web from sometime. If i would have been rich would have surly contributed financially.

  8. Bahut bde wale dalal lagte ho dwshdrohiyo ka abhi said bura hal hone wala hai

  9. Inke iss haal ke.liye kon jimmedaar hai..khud hi na..India ko kya PADI hai ittni fauj, itna paisa waste krna Ka agar yeh shanti se reh le..but inko toh Pakistan se pyar hai..zameen India ki hai Woh toh Nahi denge, ha jis ko Pakistan se jayada pyar hai waise hi shift kr Jaye..

  10. To all my freinds Jo yhan p lad re hain Musalman hindu Kashmiri pandit r Jo Jo v bhawnayen le kr kch sawal aap logoon se
    1. Jo ye kah re hain k Musalman aatankwaadi hote hain ya zihadi hote hain. Pehle ye k Muslim bhai r hair Muslim bhai ye bta den k zihadi r zihad hota kya h. Dusra ye k mere in Bhartiya bahiyyon r bhenoon se sawal hain k agr Musalman ne dehshat phaila rkha h tw phr aaj puri dunya m Zulm ksi v mulq m ksi r qaum p hona chahiye that ya ksi r mulq m hona chahiye tha h na. Lekin mere dosto mjhe ek v example Gina do aaj Dunya m ho rhe zulm p jhan m Musalman pirit Ni h.
    Jhan v Nazar uthaoge hr zulm aaj ki tareekh m Musalman p ho ra h.puri imandari k sath vishleshan KR btayyega.

    2. Sawal no. Dusra hme Apne Mulq Ko behtar bnana h ya bahar kya ho ra h is o jyada Dhyan lgana h. Bahar m AGR Dhyan lgana hi h tw Jo v bhai Kashmiri pandit r alag alag wjah se aaj k ho re decision Ko si thahra the hain r bdle r Desh hit m h baat KR re hain. Bhayyio mjhe ek v ek v example de do present m ya past se k jis v jgah jis v mulq m Badle ki baat Hui aapas m nafraten bhdi Mulq ki Pehchan Ko chor KR log ek dusre Ko Dharm ki Pehchan se dekhne lge un mulqoon ka aaj Kiya haal hai, AGR ek v taraqqi yafta Mulq h tw btana jroor name.
    3. Kia ne kaha apse k resources ghat re hain kis ki baaten man li aapne…..kvi khd se study ki kvi khd ki aatma Ko knowledge dya…ek bar zindagi m khd se dekh lo bhayyio parh lo…q in netaoon ki baatoon m aa jate ho…q Ni inse sawal KR lete ek Baar k sir kya hote hain resources r kya Hoti hai population…zra btayenge…
    Resources km ho re hain ek Baar tw soch le mere yaar Jo 1000 crore se v jyada pichle 5 year m sirf add k name p sarkar ne kharch KR diya us ka 50% hi Janta k resources m lga deti tw aaj kis situation m Hoti jnta. …. Resources khtm ho re hain tw aap 100 crore ka project bekar k detaintion centre bnane r fr use chlane k name p Hzaroon k Hzaroon crore kharch KR doge Lekin usi Assam m behtar sikhsha swasthya r sadak sewayen Ni de skte ho is se aadhe ki lagat m ho skta h . R FR free internet r tv k jriye r daar r false Desh hit k jrye dimag m bhariye k ye desh k lye khtra h….

    Mere r aapka hm SB ka Hindustaan tw Aisa Ni tha Jo Insaanoon k lye detaintion centre bnane ki krurtaoon m Shamil ho jaye Jo pabandiyaan LGA de jeene ki tariqoon m aapne mamuli haqoon tk Ko paane m…mere jaise aap hm Hindustani bhai tw aise Ni the Jo in SB ka smarthan KR te the…bhle hi hm bhaasa Dharm r jaat se bten ho or jb baat aan p aati thi tw hm ek sath khde hote the r Rajneeti har jati thi hr bar chahe FR wo Gujrat aayodhyya ya FR Punjab ya 90’s kashmir q na ho hr baat hm aam Hindustani ki Jeet hui Hindustaan ki Jeet hui…… PR ab kya hogya h aap SB Ko ye kin ki batoon m aa re ho AAP log…Abhi v waqt h bhayyio smbhal jao r bcha Ko Hindustaan ki aatma Ko tehzeeb Ko….utar phenko in jhoote r Nafratoon k chasmoon Ko….
    Q k kvi v na tw koi Dharm khtre m hota h r na hi koi Mulq khtre m hmesha proge tw bs hm AAP sb log aam log q jis aag Ko aaj lgane m hm AAP sb madad KR re hain kl in ki lapten jb failengi tw aap k ghr v in k jaad m aayenge r tb TK AAP ise rokne ki bujhane ki hr dawa hr mauqa kho chke hinge.

    Haan aane wali generations ye generation brbaad hongi jrro hongi in Nafratoon k mahaul m…. Mgr inhi m se koi ek generation aayegi Jo FR sach ka siksha ka Mohabbat ka revolution laayegi r fe lgega ki Desh khtre se bahar h Dharm khtre se bahar h ….. So Dharm r Desh tb v rhega r aaj v hai….Lekin tb khtre m wo aam Hindustani Ni honge r na hi Rajneeti hogi q ki wo v saaf suthri r Insaniyat ki raah m hogi
    But aaj khtde m kch h tw aam Hindustani ki aazadi Hindustaan ki Ruh m mitti m bse jnme un k supootoon k haq ka h….na hi Hindustaan kthde m hai na hi uska dharm q k Jung chahe border p ho chahe andar ksi v roop m mrna Hindustaan k supoot Ko hi h.Hindustaan aaj v aabad h tb v aabad rhega mgr aapne seene m ek daag le KR k kch loggon k kch jhute behkawoon m aakr meri mitti m mere hi Logoon ne kvi Nafratoon ka beej bokar meri mitti k Mohabbat k fasloon p aisi krurtayen ki thi ki m kitnoon v mitana chahoon ye daag Apne se not ta Ni h.
    Is se pehle ki Hindustaan is trah se roye Hindu-Musalman r resources k nam p laad KR Ni Bs Insaaniyat r aam Jan Hindustani bna KR Hindustaan k seene m ek r gauravsaali Kranti likh daalo Mohabbat ki. Q k ye desh tw hmesha se Krishna r raadha ShreeRam r Sita Akbar r jhodabai Saleem Anarkali r Rani padmawati ki Mohabbat ka Desh rha h.
    Ise Khilji Rawan Nadir Shah r Godse jaisoon k Nafratoon r galat Chahat ki viicharoon jaisa fr se bn ne ki raah m us se rok lo.
    Q ki Jo Ravan r Khilji aap m aaj bahr aa ea hain yaad rkhna k wo Aapke andr k Raam r Mohammad Ko mar KR bahar aa ra h.

  11. Comment:mat sata jalim kisi ko mat kisi ki aaj le …..
    dil k dukh jane se jalim ars bhi hil jayega

    • Bahut achcha likha hai aap ne

      • Bahut achcha likha hai aap ne shukriya

  12. Itni sari army aur police tainat hai waha to kyun kashmiri pandito ko wapas nahi bhejti ye sarkar.. aur jaha par unko rakhe waha par bhi unko suraksha di jaye… agar pure state ko is tarah baan me le sakte hai to pandito ki suraksha nahi kar sakte kya?
    Niyyat kuchh aur hai aur dikha kuchh aur rahe hai..

  13. मुफ्त शौचालय योजना का फायदा क्यों नही उठाया , अब स्यापा कर रहे हो ???

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