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कुजियारी से उठाया गया इशराक पांच दिन बाद कोर्ट में पेश, प्रताड़ना के बाद गंभीर मुकदमे

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आजमगढ़/लखनऊ: शनिवार को दोपहर 2 बजे के करीब इशराक को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। इस दरमियान रिहाई मंच के राजीव यादव की इशराक से बात हुई। इशराक ने बताया कि 7 नवंबर को शाम 7 बजे के करीब पुलिस ने उसे उसके घर (ग्राम कुजियारी, आज़मगढ़) से उठाकर फरिहा रेलवे पुलिस चौकी ले गई जहां तीन घंटे रखने के बाद रात दो बजे बरदह थाने ले गई, जहां एसओजी ने उससे अबू जैद के बारे में पूछताछ की।

उससे बार-बार जैद के बारे में और उससे लिंक के बारे में पूछा गया। दो दिन बरदह थाने और दो दिन गंभीरपुर थाने में उसे रखा गया। इस दौरान पुलिस ने उसको प्रताडि़त किया। उसके साथ मुहम्मद तारिक पुत्र फिरोज, तलहा पुत्र बदरे आलम और अशरफ पुत्र भुक्कड़ अंसारी को भी उठाया गया था जिनसे पुलिस ने रुपया लेकर छोड़ दिया था। उसने यह भी बताया कि उसके भाई अबू आमिर समेत चाचा के पासपोर्ट और अन्य कागजात भी पुलिस उठा ले गई। सभी पुलिसवाले सादे कपड़े में कार्रवाई करने आए थे।

इशराक के मुताबिक पुलिस ने लूटपाट और मुठभेड़ के दौरान पुलिस पर गोली चलाने के फर्जी आरोप में उसे गिरफ्तार किया है। उसे निजामाबाद और गंभीरपुर के बीच पुलिस पर कट्टे से फायर करता दिखाया गया है। उसके ऊपर 411, 392, 307 और आर्म्स एक्ट के फर्जी मुकदमे लादे गए हैं।

गौरतलब है कि दो दिन पहले रिहाई मंच की ओर से उत्‍तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को आज़मगढ़ से उठाए गए इशराक अहमद के संबंध में एक पत्र लिखा गया था। पत्र में कहा गया था:

”कुछ वक्त पहले तकरीबन साढ़े तीन बजे के करीब मोबाइल नंबर 8795320577 से एक फ़ोन आया जिन्होंने अपना नाम नेहा खातून, ग्राम कुजियारी, जनपद आज़मगढ़ बताया। उन्होंने बताया कि उनके पति इशराक अहमद को मंगलवार (7 नवम्बर) को मगरिब के बाद जब वे अपने घर पर कुछ और लड़कों के साथ लूडो खेल रहे थे तभी 4-5 आदमी जो खुद को पुलिस वाला बता रहे थे उन लोगों ने उन सभी के हाथ खड़े करवा दिए और और पूरे घर को तहस-नहस कर दिया और उन सबको उठा ले गई। वो लोग जिस तरह से धमकी दे रहे थे उससे मैं अपनी एक साल की बेटी के साथ दहशत के मारे घर छोड़कर भाग गई। उसी रात थाने पर फोन कर पूछा तो उन्होंने डांट दिया और कहा कि आइंदा से फोन मत करना।”

नेहा ने रिहाई मंच को बताया था कि उन्‍हें अपने पति की जान को लेकर डर है। उनके घर में कोई मर्द नहीं है। उनके ससुर शब्बीर अहमद की मृत्यु हो चुकी है और सत्तर वर्षीय सास फिरदौस बहुत बीमार और चलने-फिरने की स्थिति में नहीं हैं। पत्र में रिहाई मंच की ओर से अनुरोध किया गया था कि उक्त मामले का संज्ञान लिया जाए क्योंकि ”नेहा खातून के मुताबिक उनके पति इशराक अहमद को तीन दिन पहले उठाया गया था और आज तक उनके संबंध में उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई कि उनके पति कहां हैं जिससे पूरा परिवार किसी अनहोनी की आशंका से डरा सहमा है।”

आज़मगढ़ एक्‍सप्रेस नामक साइट पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें इशराक की मां को रोते दिखाया गया है। ख़बर कहती है कि ”कुजियारी, आजमगढ़ में छापा मारने गई पुलिस ने इशराक की बूढ़ी मां को धक्का दे कर गिरा दिया था। अब उनको दवा लेने वाला कोई नही है। घर वालों के गुमान में भी नहीं कि उनके बेटे को आतंकवाद के शक़ में पकड़ा गया है जबकि घर वाले ज़मीन का मामला बता रहे हैं। रोती दादी को उनकी छोटी पोती चुप कराने की हरकत को देख सब इमोशनल हो गए थे।” देखें वीडियो:

इस पत्र के दो दिन बाद इशराक को अदालत में पेश किया गया है। इससे पहले अबू जैद की गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ के युवाओं से लगातार हो रही पूछताछ के बारे में भी रिहाई मंच की ओर से कुछ गंभीर सवाल उठाए गए थे और रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने छाऊं और कुजियारी गांव का दौरा किया था।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल मसीहुद्दीन संजरी, तारिक शफीक़, सालिम दाऊदी और ग़ुलाम अम्बिया के मुताबिक अबु जैद के पिता अलाउद्दीन और गांव के लोगों ने ताया था कि उनके गांव के चार लड़कों को मुंबई में पुलिस ने पूछताछ के लिए 7 तारीख को उठाया था और रात में 11 बजे करीब यह कह कर जाने दिया था कि अगले दिन उन्हें फिर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के बुलाने के हिसाब से पहुंच जाना होगा। यह सिलसिला तीन दिनों तक जारी रहा। हासिम, फरहान, खालिद और फहीम से लगातार पूछताछ हो रही है। गांव में इस पूछताछ की घटना से भय और आक्रोश का माहौल था।

रिहाई मंच का प्रतिनिधिमंडल कुजियारी गांव भी गया था। कुजियारी में 7 नवम्बर की रात में करीब 9 बजे गांव को चारों तरफ से घेर कर चार युवकों को पुलिस पकड़ कर अपने साथ ले गई थी जिसमें इशराक भी शामिल था। दूसरे दिन उनमें से तीन युवकों तलहा पुत्र बदरे आलम, तारिक पुत्र फि़रोज़ और अशरफ पुत्र भुक्कड़ को छोड़ दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इशराक के घर पर ताला बंद पाया था।


रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित

1 COMMENT

  1. Musalmaan hogan to terrorist hi hoga– UP Police. Police can’t be of 99% in a bourgeois democracy, specifically Hindu fascist part of it.

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