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मुस्लिम आबादी का मुद्दा देने वाले अमेरिकी थिंक टैंक PEW का खेल और RSS !

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पिछले दिनों मुस्लिम आबादी के मिथ पर आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा और वरिष्ठ पत्रकार क़मर वहीद नक़वी के शास्त्रार्थ के बारे में मीडिया विजिल ने आपको जानकारी दी थी। दोनों ने ही प्यू रिसर्च के आँकड़े के हवाले से अपनी बात रखी थी। सवाल यह है कि प्यू रिसर्च है क्या ? युवा पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की पड़ताल के मुताबिक यह संगठन दरअसल एक अमेरिकी थिंक टैंक है जिसका अमेरिका के तमाम फासिस्ट और अति दक्षिणपंथी संगठनों से  करीबी रिश्ता रहा है। मुस्लिम आबादी को लेकर उसका सर्वे भी किसी ख़ास मक़सद से किया गया। आरएसएस अगर प्यू को पिया मानकर बलि-बलि जा रहा है तो उसकी वजह दोनों के मक़सद की समरूपता है। बहरहाल, पढ़िये अभिषेक का यह लेख जो कभी उनके ब्लॉग जनपथ में छपा था–संपादक  

प्‍यू रिसर्च सेंटर वॉशिंगटन स्थित एक अमेरिकी थिंक टैंक है जो अमेरिका और बाकी दुनिया के बारे में आंकड़े व रुझान जारी करता है। इसे प्‍यू चैरिटेबल ट्रस्‍ट्स चलाता और वित्‍तपोषित करता है, जिसकी स्‍थापना 1948 में हुई थी। इस समूह में सात ट्रस्‍ट आते हैं जिन्‍हें 1948 से 1979 के बीच सन ऑयल कंपनी के मालिक जोसेफ प्‍यू के चार बेटे-बेटियों ने स्‍थापित किया था। सन ऑयल कंपनी का ब्रांड नाम सनोको है जो 1886 में अमेरिका के पेनसिल्‍वेनिया में बनाई गई थी। इसका मूल नाम पीपुल्‍स नैचुरल गैस कंपनी था। कंपनी के मालिक जोसेफ प्‍यू के सबसे बड़े बेटे जे. हॉवर्ड प्‍यू (ट्रस्‍ट के संस्‍थापक) 1930 के दशक में अमेरिकन लिबर्टी लीग की सलाहकार परिषद और कार्यकारी कमेटी के सदस्‍य थे और उन्‍होंने लीग को 20,000 डॉलर का अनुदान दिया था। यह लीग वॉल स्‍ट्रीट के बड़े अतिदक्षिणपंथी कारोबारियों द्वारा बनाई गई संस्‍था थी जिसका काम अमेरिकी राष्‍ट्रपति रूज़वेल्‍ट का तख्‍तापलट कर के वाइट हाउस पर कब्‍ज़ा करना था। विस्‍तृत जानकारी 1976 में आई जूलेस आर्चर की पुस्‍तक दि प्‍लॉट टु सीज़ दि वाइट हाउस में मिलती है। हॉवर्ड प्‍यू ने सेंटिनेल्‍स ऑफ दि रिपब्लिक और क्रूसेडर्स नाम के फासिस्‍ट संगठनों को भी तीस के दशक में वित्‍तपोषित किया था।
प्‍यू परिवार का अमेरिकी दक्षिणपंथ में मुख्‍य योगदान अतिदक्षिणपंथी संगठनों, उनके प्रचारों और प्रकाशनों को वित्‍तपोषित करने के रूप में रहा है। नीचे कुछ फासिस्‍ट संगठनों के नाम दिए जा रहे हैं जिन्‍हें इस परिवार ने उस दौर में खड़ा करने में आर्थिक योगदान दिया:
1. नेशनल एसोसिएशनऑफ मैन्‍युफैक्‍चरर्स: यह फासीवादी संगठन उद्योगपतियों का एक नेटवर्क था जो न्‍यू डील विरोधी अभियानों में लिप्‍त था और आज तक यह बना हुआ है।
2. अमेरिकन ऐक्‍शन इंक: चालीस के दशक में अमेरिकन लिबर्टी लीग का उत्‍तराधिकारी संगठन।
3. फाउंडेशन फॉर दि इकनॉमिक एजुकेशन: एफईई का घोषित उद्देश्‍य अमेरिकियों को इस बात के लिए राज़ी करना था कि देश समाजवादी होता जा रहा है और उन्‍हें दी जा रही सुविधाएं दरअसल उन्‍हें भूखे रहने और बेघर रहने की आज़ादी से मरहूम कर रही हैं। 1950 में इसके खिलाफ अवैध लॉबींग के लिए जांच भी की गई थी।
4. क्रिश्चियन फ्रीडम फाउंडेशन: इसका उद्देश्‍य अमेरिका को एक ईसाई गणराज्‍स बनाना था जिसके लिए कांग्रेस में ईसाई कंजरवेटिवों को चुनने में मदद की जाती थी।
5. जॉन बिर्च सोसायटी: हज़ार इकाइयों और करीब एक लाख की सदस्‍यता वाला यह संगठन कम्‍युनिस्‍ट विरोधी राजनीति के लिए तेल कंपनियों द्वारा खड़ा किया गया था।
6. बैरी गोल्‍डवाटर: वियतनाम के खिलाफ जंग में इसकी अहम भूमिका थी।
7. गॉर्डन-कॉनवेल थियोलॉजिकल सेमिनरी: यह दक्षिणपंथी ईसाई मिशनरी संगठन था जिसे प्‍यू ने खड़ा किया था।
8. प्रेस्बिटेरियन लेमैन: इस पत्रिका को सबसे पहले प्रेस्बिटेरियन ले कमेटी ने 1968 में प्रकाशित किया, जो ईसाई कट्टरपंथी संगठन था।
जोसेफ प्‍यू की 1970 में मौत के बाद उनका परिवार निम्‍न संगठनों की मार्फत अमेरिका में  फासिस्‍ट राजनीति को फंड कर रहा है:
1. अमेरिकन इंटरप्राइज़ इंस्‍टीट्यूट, जिसके सदस्‍यों में डिक चेनी, उनकी पत्‍नी और पॉल उल्‍फोविज़ जैसे लोग हैं।
2. हेरिटेज फाउंडेशन, जो कि एक नस्‍लवादी, श्रम विरोधी, दक्षिणपंथी संगठन है।
3. ब्रिटिश-अमेरिकन प्रोजेक्‍ट फॉर दि सक्‍सेसर जेनरेशन, जिसे 1985 में रीगन और थैचर के अनुयायियों ने मिलकर बनाया और जो दक्षिणपंथी अमेरिकी और ब्रिटिश युवाओं का राजनीतिक पोषण करता है।
4. मैनहैटन इंस्टिट्यूट फॉर पॉलिसी रिसर्च, जिसकी स्‍थापना 1978 में विलियम केसी ने की थी, जो बाद में रीगन के राज में सीआइए के निदेशक बने।
.अभिषेक श्रीवास्तव

17 COMMENTS

  1. नकवी  साहब  ने  जिस  तरह  से  PEW  के आंकड़ों  को  धर्म-आधारित नहीं  अपितु  सामाजिक-आर्थिक हालात-आधारित बता कर विश्लेषण किया था, वह  विश्लेषण  तो  संघ  के  खिलाफ  जाता  था. नकवी साहब  की व्याख्या  से  दर्शक  को  यह  सन्देश गया कि PEW आंकड़ों का मतलब धार्मिक प्रोपगंडा करना नहीं है. अब इस लेख द्वारा  PEW  को एक खलनायक के रूप में पेश किया जा रहा है. mediavigil के माध्यम से  लोगों  ने  PEW को  दो रूपों में देखा. यह दोहरापन क्यों. PEW  ने अगर फ़ासिस्ट संघठनों  को  पोषित किया है, तो उससे इसके जनगणना आंकड़ों का क्या सम्बन्ध है, कृपया यह स्पष्ट करें.    

  2. सांख्यिकीय का इस्तेमाल तो कोई भी करता है पक्ष मे और विरोध मे भी ,PEW निश्चय ही अभिषेक श्रीवास्तव के विष्लेषणो के अनुरूप होगा परंतु इसके सर्वेक्षण बडे सेम्पल के और सटीक होते हैं, इसी ने योरोप मे बढते नास्तिको पर भी सर्वे किया था,जिसके अनुसार  लोगो का ईश्वर पर विश्वास विज्ञान  और तर्क  की ओर रुझान के कारण  था ,आंकडो का हर विचार अपने पक्ष मे इस्तेमाल करता है परंतु कुछ आंकडे ऐसे होते हैं,जिनका इस्तेमाल एक विचार को ही स्थापित कर्ता है ,उस लिहाज से  PEW विश्वसनीय है 

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