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एक ‘हिंदूवादी’ संपादक ने लिखा – शर्म के चार साल ! हिंदुओं को बुद्धिहीन साबित किया मोदी ने !

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नया इंडिया के संपादक और अरसे से हिंदुत्ववादी खेमे के दुलरुआ पत्रकार हरिशंकर व्यास ने मोदी के चार साल के शासन को शर्म करार दिया है। उनका कहना है कि मोदी की वजह से दुनिया ने जाना कि हिंदुओं को राज करना नहीं आता। यह लेख उस विराट मोहभंग का प्रतीक है जो 2014 में मोदी के ज़रिए एक नये युग के जन्म का सपना देख रहे थे- संपादक

 

 

शर्म के चार साल

 

इसलिए कि इन चार सालों में दुनिया ने जाना, समझा, देखा कि हिंदुओं को राज करना नहीं आता!  मेरे इस निष्कर्ष से कोई सहमत हो या न हो लेकिन चार साल की जो दास्तां है उससे क्या दुनिया ने यह नहीं जाना कि भारत का प्रधानमंत्री, हिंदूओं का पृथ्वीराज चौहान गधों से प्रेरणा लेता है! वह हार्वड मतलब ज्ञान का सम्मान करने के बजाय हार्ड वर्क की डुगडुगी बजा कर पकौड़ा बेचने को रोजगार सृजन बताता है। जिसका अर्थशास्त्र नोटबंदी है,बैंकों का लगातार दिवालिया होना है। जिसके राज ने सवा सौ करोड़ नागरिकों पर यह चाबुक चलाया कि तुम सब चोर हो, टैक्स नहीं देते हो इसलिए तुम लोग पहले लेन-देन का व्यवहार सुधारो। कैसलेश बनो! इधर चाबुक, उधर इनकम टैक्स, सरकारी एजेंसियों के नोटिसों का वह सिलसिला जिसने  उद्यमशीलता,काम की इच्छा और जोश सबको सोख डाला है।

सोचें,एक फुदकती, दौड़ती आर्थिकी के खून को सोख कर उसे डायलिसिस पर ला डालने का जो अर्थशास्त्र नरेंद्र मोदी-अरूण जेतली ने पिछले चार सालों में दिखलाया है वैसा दुनिया के किसी देश में क्या पहले कहीं देखने को मिला और यदि नहीं तो इससे क्या दुनिया में मैसेज नहीं बना होगा कि हिंदुओं को राज करना नहीं आता!

तभी मैं नोटबंदी की घोषणा और उसके असर को समझते हुए यह थीसिस लिए हुए हूं कि इससे बड़ा हिंदूओं से दूसरा कोई विश्वासघात नहीं हो सकता कि आए थे हिंदूओं का मान बढ़ाने मगर उलटे आपने उन्हे चोर करार दिया। आए थे मुसलमानों को ठीक करने और ठोक दे रहे हैं हिंदू व्यापारियों को! आए थे हिंदूओं को एकजुट बनाने के लिए और करोड़ो-करोड़ हिंदूओं को टीवी चैनलों से जयचंद, राष्ट्रद्रोही करार करवा दे रहे हैं। आए थे पाकिस्तान को ठीक करने और चीन को औकात दिखलाने के लिए लेकिन बिना गैरत के लाहौर जा कर नवाज शरीफ के यहां पकौड़े खा लिए तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ झूला झुले!

क्या तो अर्थ नीति, क्या सुरक्षा नीति, क्या विदेश नीति और क्या समाज नीति और क्या धर्म नीति और क्या शासन नीति!

हां, है कोई बात जिससे झलका हो कि 90 साल से जिस संघ ने हिंदू वैकल्पिक राजनैतिक ख्याल में अपने प्रचारक तैयार किए, विचार बनाए और नेहरू के आईडिया ऑफ इंडिया के विकल्प में हिंदुओं ने मोदी के आईडिया ऑफ इंडिया को 2014 में जो अभूतपूर्व जनादेश दिया तो उसके बाद देश के चाल, चेहरे, चरित्र में बुनियादी परिवर्तन का कोई काम हुआ है! जो मौलिक हो, कांग्रेस से चुराया हुआ नहीं हो?

एक काम, एक बात कोई बताए जो देश की बुनियादी तासीर के सत्व-तत्व को बदलने वाली हो। वहीं नौकरशाही वाला ढर्रा, नौकरशाही की फाइलों में बनती योजनाओं, उससे बनते फर्जी-झूठे आंकड़े और जनता रामभरोसे! आंकडों, योजनाओं की फेहरिस्त, जुमलों को ले कर नरेंद्र मोदी, अमित शाह के रट्टे में कुछ भी मौलिक, नया नहीं है। पंडित नेहरू की विशाल पंचवर्षीय योजनाओं से ले कर अटलबिहारी वाजपेयी के शाईनिंग इंडिया आज के वक्त से ज्यादा जनता की फील लिए हुए आंकड़े बने थे।

और नोट करें, तब किसी ने यह नहीं सुना कि पकौड़े बेचो, पान की दुकान खोलो तो देश बनेगा या यह कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्री अपनी कर्मवीरता इन बातों से साबित करेंगे कि वे कितने घंटे काम करते हैं या कितने पुश अप, दंड-बैठक लगाते हैं।

सचमुच शर्म के इन चार सालों में वह सब है जो हम हिंदूओं को बुद्धिहीनता, कर्महीनता में कनवर्ट कर दे रहा है। 2014 में मुझे उम्मीद थी कि हिंदूओं के बुद्धि युग, कर्म युग और साहस युग में प्रवेश का वक्त आया! मगर सोचें, इन चार सालों में क्या हुआ?  मानों नरेंद्र मोदी के राज के साथ सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा सभी का हम हिंदुओं को श्राप लगा जो भारत से, भारत के विचार-बहस और नेरैटिव से बुद्वि विलुप्त हुई पड़ी है और उसकी जगह संकल्प है हिंदुओं को मूर्ख बनाने का। उन्हे भक्त बनाने का, उन्हे डराने का। तभी आज जो बुद्धि, विचार, सोच के संस्कार लिए हुए है उनका न पढ़ने का मन होता है, न टीवी चैनल देखने का होता है और न बहस में हिस्सा लेने का।

भारत में आज बुद्धि रूठ गई है। सरस्वती का श्राप ऐसा लगा है कि जिन नरेंद्र मोदी की जुबां चार साल पहले भरोसे, विश्वास, कर्म के तर्क लिए हुए थी वह अब काली हुई, चिल्लाती हुई, बेसुरी, बेतरतीब घटिया जुमलों को उगलती लगती है तो उनके साथ उनके भक्तों की सोशल मीडिया पर दशा सिर्फ रूदाली और गालियों वाली हो गई है। देवी सरस्वती रूठ गई हैं, इसलिए हिंदू आज सरस्वती, बुद्वि का पुजारी नहीं मूर्खताओं में जी रहा तो लक्ष्मीजी का रूठना भी नोटबंदी की बुद्धिहीनता के चलते जैसे जो हुआ इसे बूझना मुश्किल नहीं है। साहस युग याकि देवी दुर्गा के रूठने, उनके श्राप की हकीकत यह है कि इन चार सालों में प्रमाणित हुआ है कि दुनिया के सर्वाधिक कायर, गुलाम, डरपोक जीव यदि कोई है तो वह हिंदू है।

हां, यह शर्म का सबसे बड़ा बिंदु है कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह नाम के दो लोगों ने अपनी सत्ता भूख में ऐसा आंतक बना डाला कि संघ हो, उसके संगठन हो, भाजपा के नेता हो सब साष्टांग लेटे हुए है। मैं पहले भी इस बात को लिख चुका हूं कि सत्ता से हिंदू कितना डरता है। हिंदू की हजार साल की गुलामी ने उसके ऐसे डीएनए बना डाले है कि उसमें देवी दुर्गा की निडरता का आशीर्वाद फल ही नहीं सकता। कितने कायर है हम हिंदू यह पिछले चार सालों में न केवल मीडिया, उद्योगपतियों, अफसरों, जजों, समाजसेवियों, धर्मगुरूओं ने जाहिर किया है बल्कि इसे सर्वाधिक किसी ने जाहिर किया है तो वह संघ परिवार और भाजपाई हिंदूओं ने किया है। सोचें, चार सालों के मोदी-शाह के राज में ऑमेजन-वालमार्ट-रिटेल की जो परिघटना है उससे क्या संघ, उसके स्वदेशी संगठनों को हिल नहीं जाना चाहिए था। पर चूँ करने की हिम्मत तक नहीं। मोदी-शाह का चार साल का व्यवहार सचमुच में संघ की कथित सामाजिकता, पारिवारिकता, बुर्जगों का मान-सम्मान, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की ईंट-ईंट पर बुलडोजर है। क्या नहीं लगता कि चार साल में लालकृष्ण आडवाणी, डा मुरलीमनोहर जोशी सहित तमाम बुजुर्गों की जो अनदेखी हुई, जो उनका असम्मान हुआ वह संघ, भाजपा के कथित संस्कारों के लिए जहां शर्मनाक है वहीं इस जमात के चुपचाप सहते जाने की कायरता का प्रतिमान भी है? ँ

मगर कायर, गुलाम, भक्त के डीएनए और यह बुद्धिहीनिता कि इस पृथ्वीराज के साथ ही हिंदूओं का मरना-जीना है वाली सोच में राष्ट्रवादी हिंदू भी उतना ही डरा हुआ है जितना आम हिंदू हाकिम के आगे डरा हुआ रहता है।

डर, गुलामी, भक्ति क्योंकि हिंदू का इतिहास अनुभव है इसलिए इसमें अस्वभाविकता नहीं। मगर इनसे भी गंभीर चार साल का त्रासद मसला यह है कि मोदी-शाह राज मतलब हिंदू शर्म का यह अनुभव कि हिंदूओं को राज करना नहीं आता!

हां, 15 अगस्त 1947 से ले कर 26 मई 2018 का भारत राष्ट्र-राज्य का बार-बार रेखांकित होता तथ्य है कि अवसर बार-बार आए। सबकों मिले लेकिन वह उम्मीदों, वक्त-दुनिया के विकास, उसकी चाल की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। वह भयावह तौर पर जाया हुआ और तभी चार सालों के अनुभव ने अपनी यह थीसिस बनाई है कि हिंदूओं को राज करना नहीं आता। 90 साल के हिंदू आईडिया अनुष्ठान का यदि यह हश्र है तो बतौर कौम हम हिंदूओं को क्या सोचना नहीं चाहिए? पर हम हिंदू सोच भी कैसे सकते हैं?  हमें सरस्वती का जो श्राप है और भक्ति जो नियति है!

 

नया इंडिया से साभार प्रकाशित 



 

35 COMMENTS

  1. अपने सृजनकाल का इस्लाम है मोदीपंथ, यानि दीन-ए-मोदीहिलाई। सारे हथकण्डे वसूल वाले हैं, वसूली में जनता जमात होत रही दीन, और भी हीन। इसके बाद बताया जाएगा कि संतोष ही जीवन है। बस रसूल की हर जीत पर, उत्कोच से या नये मसलबाण से, बजाएँ ताली; इससे खुद पर चले मसलबाण की पीड़ा कम कर लें।

    दसमुखी है मुखिया अपना – कभी हँसता है, गाता है, कभी भिक्षु बनकर आता है; क़ैद कर अपने वैभव बतलाता है, गिन गिन कर रोटी भिजवाया है – सीधे बैंक अकाउंट में, अपनी सैल्फी के संग! आप तो बस वोट करो, नहीं तो नज़र कुछ नोट करो, आपकी बोटी बोटी गिरवी है, मेरी जेब में।

    ला इलाहाइल राससंघे
    आओ मिलकर सब गधेहम रंभे
    नमो नमें हम, नमो नमें।

  2. हिंदुओं की हालत ऐसी है जैसे सौतेले परिवारजनों से च्युत कर पडौसी अंकल बंबई ले जाते हैं, “तू तो री, हिरोइन बनेगी।” फिर अपनी दिलजोई कर, डांसबार में बेच देते हैं। हिरोइन के हाथ उसकी सैल्फियाँ पकड़ा देते हैं, कि भेज लो अपने घरवालों को कि मैं तो ठाट से हूँ, नहीं तो बेकार तुम्हारा उपहास होगा..और जबजब मैं फ़ोन करूँ प्रिया, वोट देने आ जाना।

  3. पी के भारद्वाज ,आपको इस्लामो फोबिया ह क्या ।हर बात में इस्लाम को ले आते हसि आप जैसे पाखंडी लोग,इस्लाम तो वोट देने नई आया था मोदी को,आप लोगो ने मंदिर तथा अन्य हिन्दू धार्मिक मुद्दों पर बी जे पी को वोट दिया था।अब जब उम्मीद टूट रही है तो इस्लाम यदि याद आ रहा है।इतना ही अगर गायत्री मंत्र याद करे होते और बर बार बोलते तो कुछ पुण्य कमा लेते। और एक बात क्या किसी मुसलमान ने आपके साथ कबि कोई बुरा कार्य किया है जो इतना विरोध है।

    • इस्लामोफोबिया नहीं हुआ; मैं कह रहा हूँ कि मुझे हिंदू लेबल में मोदीपंथ या इस्लाम-२.० नहीं चाहिए। जो ऑफ़र करना है, सही लेबल संग करो, तिसपर मेरी स्वेच्छा मैं लूँ न लूँ। बाकी, आपके इस्लाम पर चलने में कोई आपत्ति नहीं – स्वेच्छा ही स्वधर्म है, हिंदू धर्म का आधार है, as far as i’m concerned।

      हाँ सही है कि उम्मीद की नींद टूट गई, तो सब तरफ़ आँख खुली है – मसलन, कि रामदेव की जड़ी बूटी घी असल में कुछ और है; जो अपनी जगह होगा अच्छा, पर हमने अपनी तरफ़ से यह नहीं ख़रीदा था। हाँ आपने वोट नहीं दिए थे, हम अपनी ही छाती पीट रहें हैं, आपको दोष नहीं दे रहे, कि सोमरस बता के रूह अफ़्जा बेच दिया, जो हमें लेना होता तो आप से डायरैक्ट ले लेते, इतने महँगे बिचौलियों की क्या ज़रूरत थी…

  4. इस बन्दे की मानसिकता हिल चुकी है। इस का अभिप्राय कट है कि पृथ्वीराज चौहान की वुद्धि गधे के समान थी।अरे महामूर्ख व्यास तेरे कुल में कितने ज्ञानी हुए और क्या किया इस देश के लिए।पृथ्वीराज चौहान शब्द भेदी वाण का ज्ञाता था।जिस की पताका चारों तरफ थी।तुझे वो ही उदाहरण देने के लिए मिला।तुझ जैसे इंसान पहले भी गुलाम थे और आज भी उसी मानसिकता के गुलाम है।कोई हिन्दू अगर हिन्दुत्व का पताका लहरा रहा है तुम पर देखा नही जा रहा

    • सहमत हूं मुकेश जी की बात से पूरी तरह से।
      व्यास जी का दिमागी दिवालियापन उन्हें किसी और सीमा पर ले गया है जो उन्होंने पृथ्वीराज चौहान जैसी शख्सियत पर उंगली उठाने की जरूरत की।

    • घोरी ने अंधा कर दिया था चौहान को, सो चंद बरदाई के बताए पर ज़रा सा बाण चूक गया। पृथ्वीराजकी बुद्धि गधे समान बिलकुल न थी, व्यास आज के पृथ्वीराज को लांछन दे कहे हैं, कि आँखें होते हुए भी न जाने किधर को बाण फेंक रहा है मार्किटिंग सम्राट ए फेंकू।

      पृथ्वीराज इसलिए अति प्रासंगिक है, क्योंकि उनकी दुर्भाग्यपूर्ण चूक के बाद १००० वर्ष हम ग़ुलाम हो गए। यहाँ कोई अंधापन भी न था, बस अक़्ल का अंधापा है, कि चीन जैसी निम्न भृति एक्सपोर्ट ईकॉनमी बनाऊँगा, सारा बाहुबल मिडिल क्लास और हिंदुओं को अपने क़दमों में झुकाने में व्यय कर डाला। आपका तो सर, पूरा वर्ण ही बस के नीचे फेंक दिया, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर। तब, बाईदिवे, राजपूतों के बाद ब्राह्मणों ने व्यक्त किया साफसाफ, कि यह ग़लत है। मीडिया ने बताया नहीं। बातचीत में छोटे स्केल के वणिक भी मानते हैं।

      लेख पढ़कर मुझे तो ऐसा लेशमात्र अहसास न हुआ कि पृथ्वीराज की तौहीन हुई है। बल्कि यह कहा जा रहा है कि आँखें रहता वीर पृथ्वीराज समझ कर तिलक किया था, गर्दभ निकला, पता नहीं कहाँ उलट पुलट तीर चला रहा है।
      सादर,

    • व्यास जी के लेखो का मैं नियमित पाठक हू, उनका आशय यह है कि मोदी ने चौतरफा निराशा दी है। हिंदुत्व के मुद्दे को ले, भाजपा के पाँच कोर मुद्दे थे पहला.धारा370 खत्म करना,दूसरा. कश्मीरी पंडितो को घाटी. मे बसाना, तीसरा जेहादी. आतंकवाद का.खात्मा चौथा. राम मंदिर का निर्माण पाचँवा समान नागरिक संहिता। अब.मोदी की पूर्ण बहुमत की सरकार है, बताओ इनमें से कौन सा काम पूरा हुआ है या अगले चुनाव तक हो जायेगा। मोदी ने जिस तरह से बिना कोई पुख्ता कार्य योजना बनाये नोटबंदी और GST लागू की उससे रोजगार, व्यवसाय, उद्योग,बैंकिंग और आर्थिकी का भठ्ठा बैठ गया। विदेश नीति फेल है।देश मे व्यापक सामाजिक तनाव है।

  5. I read your article as it was RTed by Kejriwal and boy you do qualify in whatever parameters he has. You just like him have used a lot of words but given no reference to any data. You have lamented in the whole article about state of economy but nowhere referred to facts. Seems your IQ is inversely related to the prices of petrol. As It goes up your IQ goes down.

  6. #harishankar_का_सच
    गोरखपुर में ‘हाता’और ‘मंदिर’ प्रतिद्वंद्विता के दो शिखर प्रतीक रहे हैं। ‘हाता’ यानी हरिशंकर तिवारी का घर और ‘मंदिर’ यानी गुरु गोरखनाथ मंदिर। हरिशंकर तिवारी पूर्व मंत्री और विधायक वगैरह रहे हैं, लेकिन उससे पहले वे पूर्वांचल के बड़े माफ़िया बतौर कुख़्यात रहे हैं। साथ-साथ वे ब्राह्मणों की शक्ति का भी प्रतीक रहे जिनके विरोध में कभी वीरेंद्रप्रताप शाही जैसे माफ़िया क्षत्रियों की नुमाइंदगी करते थे। समय के साथ यह नुमाइंदगी मंदिर से होने लगी और तमाम पाखंड को तोड़ने वाले नाथ संप्रदाय के इस केंद्र को क्षत्रियों का शक्तिकेंद्र के रूप में नई पहचान मिली। यह संयोग नहीं कि गुरु दिग्विजयनाथ के बाद अवैद्यनाथ और अब आदित्यनाथ क्षत्रिय हैं। बहरहाल, काफ़ी दिनों से हाता हाशिये पर था। तिवारी परिवार के लोग बीएसपी के ज़रिये राजनीति में सक्रिय थे। लेकिन इधर ‘मंदिर’ के हाथ पूरे सूबे की कमान आ गई और 22 अप्रैल को हाता पर पुलिसिया छापा पड़ गया। इस छापे से गोरखपुर में सनसनी फैल गई। साथ ही यह आशंका भी कि कहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्चस्व की नई जंग ना शुरु हो जाए। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही जिस तरह तमाम अहम पदों पर क्षत्रिय अफ़सरों की तैनाती हुई उससे दबी ज़बान में ही सही यह चर्चा वैसे भीहोने लगी है। हाते पर हुई कार्रवाई के ख़िलाफ़ आज गोरखपुर में प्रदर्शन है। यह प्रदर्शन कम शक्तिप्रदर्शन ज़्यादा हो सकता है जिस पर सबकी नज़र है। नीचे पढ़िये, 22 अप्रैल को पड़े इस छापे की गोरखपुर न्यूज़लाइन में छपी रिपोर्ट-

    पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के आवास पर पुलिस का छापा, 6 हिरासत में
    गोरखपुर, 22 अप्रैल। चिल्लूपार के बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी एवं प्रदेश के पूर्व काबीना मंत्री हरिशंकर तिवारी के आवास पर शनिवार को पुलिस के छापे ने गोरखपुर में राजनीतिक भूचाल ला दिया। पुलिस ने छापे को अक अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई बताया तो तिवारी परिवार ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। तिवारी परिवार ने पुलिस छापे के खिलाफ सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन का एलान भी कर दिया।

    • . And after raking up this made up insecurity, they are not even delivering any secular or Hindu achievements, only devastation of our wages, jobs, and savings* with measures like demonetization, and themselves adding dhamadham Rohingya and Bangladeshi and stoking MORE insecurity. And we have to clap at BJP’s Hindu and Secular statistic jumlas. Vyasji is right, we are looking like idiots both as Hindus (bcos we voted as Hindu for this guy) and as Indians, especially the waged middle class.

      * forcing them into risky stockmarket by destroying bank interest rates.

  7. व्यास जी, एक ऑफिस में बैठकर लिखना बहुत आसान होता है पर सामने वाले के दिमाग में क्या है आप उसका अंदाजा नहीं लगा सकते। आप भी वही कर रहे हैं जो आप समझते हो कि मोदी जी ने किया। वो वायदे कर रहे हैं और आप अपनी लेखनी से लोगों की ओपिनियन बदलना चाहते हैं। क्या आपको लगता है कि भारत के लोग पागल हैं जो वो एक व्यक्ति में यकीन कर रहे हैं।
    दूसरी बात ये है कि आप पृथ्वीराज चौहान की भी मर्यादा का ख्याल नही रख रहे हैं। क्या आपने उनको राज करते हुए देखा है या फिर आप जैसे किसी लेखक ने उनके बारे में लिख दिया और सब उस पर ही यकीन करते हैं।
    रही बात हिंदुओं के राज करने की तो शायद मोदी जी पिछले बहुत वर्षो से गुजरात में अच्छी तरह से शासन कर रहे थे तभी तो देशवासियों ने उन पर भरोसा किया। आप जैसे लोग भी अगर इतनी जल्दी से हार मान जाएं तो हैरानी होती है।

    • भाई जी आजाद भारत का सबसे निराशा जनक रहा पिछले चार साल अब लोग प्राथना करने लगे है जैसे तैसे बचा हुआ एक साल निकल जाए और कोई ऐसी सरकार बने जो काम भले नही करे पर कम से कम देश और अर्थ व्यवस्था को तो ऐसे चोपट न करे

    • बकवास
      जिस इंसान के अंदर बड़प्पन होता है अतः देश प्रेम धर्म तथा कर्म होता है।
      वो इंसान कभी भी अपने से छोटे मंत्री या जनता के कार्यो में बाधा नही पहूँचाता तथा अपनी शक्तियों का अनैतिक प्रयोग नही करता।

    • एक पढ़े-लिखे इंसान को अनपढ़ आदमी का यही जबाव हो सकता है.

  8. पृथ्वी राज चौहान हिंदुओं का अंतिम सम्राट माना जाता है।सोचने की बात है,क्या उसमें चन्द्रगुप्त या अशोक जैसी योग्यता थी जो महान हिन्दू साम्राज्य का निर्माण कर सके। उस मूर्ख ने तो कन्नौज के राजा जयचन्द की पुत्री का अपहरण कर लिया, जो उन दोनों के बीच दुश्मनी का कारण.बना, जिसका अंत जयचंद का गोरी से मिलने और पृथ्वीराज चौहान की मौत बनी। अभी मैं कहीं पढ रहा था कि पृथ्वीराज चौहान ने महोबा की राजकुमारी चन्द्रावल का अपहरण करने के लिये आक्रमण किया। वहाँ आल्हा ऊदल से भयंकर युद्घ हुआ जिसमे दोनों मारे गये। ऐसा बुद्धि हीन औरत खोर राजा क्या वास्तव मे गर्व की वस्तु है। दूसरी बात उसने बार बार गौरी के आक्रमण करने पर उसे हमेशा के लिये क्यों नहीं निपटाया।

  9. I don’t know i was the biggest fan of Modi, even i was fel proud called to be a Bhakt..but now i realise he is using us like a condom just use us and throw us into the dustbin….The only way out it to crush this government through our vote….we didnt vote for mob lynching, minorities harassment, killing, fuel price hike, lala ramdev , mukesh ambani, dani, nirav chota modi, they are fucking us all around the way… but we will teach u lesson on next election. aapne sahi kaha aak poora vishv hinduon ka mazak bana raha hai …hume satta chalani nhi ati …..ye sahi hai RSS BJP Murdabad..hindon ka apman karne ke liye

  10. लगता है कि इन को सरकार द्वारा कोई सम्मान नहीं मिला है या इनको जो सम्मान मिला होगा तो ये वापस कर आएहोंगे इस लिए इनकी पीड़ा झलक रही है

  11. Hai re bhakton ka widhwa vilap. inlogon ko dekhkar us churail ki yad arahi hai jiske muh se khoon to laga magar pyas nahi bujhi.
    Bhakto isbar tumlog kisi rapist ya lyncher ko vote do, modiji me to insaniyat baki hai. Shayad Shambhulal jaise khooni ya jammu ke rapist tumhari pyas bujha saken. All the best.

  12. Kamal singh aap nahi samajh pae, ye modi ji ko un karano se gali nahi derahe, inki chinta kuchh aur hai.
    Agar serious baat kijae to we Indians are fool. and will continue to be fooled until we stop voting in the name of religion,caste , region. We shud remember only onething while voting ie we r Indian first. we shud stop voting Against or in favour of any caste or religion.
    Our India is a great ccountry our people are great but we r being fooled and emotionally black mailed.
    Lets forget everything and vote for India ONLY.

  13. Ek baar aur Modi aya to khana b credit card se milega. Isliye modi jaise nhi chahiye jo brain wash krke notanki krte h

  14. sab sale chootiya past mai jee rahe hai…….abe koi raja kya that isse kya ghanta fark padega…. aaj ji socho aaj kha par hai 80% poor people in india

  15. “आज जो बुद्धि, विचार, सोच के संस्कार लिए हुए है उनका न पढ़ने का मन होता है, न टीवी चैनल देखने का होता है और न बहस में हिस्सा लेने का।”
    ^^ सत्य बोल,….सत्य है! ^^
    अर्थ की अर्थी उठा दी। काम के नाम पे सैल्फी की पोर्न दिखा थी। करो ह’मैथुन, पैं…

  16. Toh aap chahte kya hai sir rss se bhi khush ni hai (jo ki koi kaam desh hit me kabhi kiya hi ni hai)
    Na modi se
    Aap akhandta or education p kaam kyu ni karte.
    Jo halat bante ja rahe hai dar lagta hai kahi Russia k trah hum bhi na toot jain

  17. koi nahin hum tootne valle hum. Is joker ko hatao, Bahut hui iski chhapchhapchhapchhapp.
    Tootne ka darra-darra ke bar bar vote mangne aa jata hai, jo theek tha, usse bhi Tod raha hai.
    Mussalman se agar jo kuchh samajhana samajhaana hua bhi toh woh hum khud nibat lengen. Aur Desh ke andarooni angrejo aur Bollywoode ke rand nachaiyyaon se bhi.

  18. ये आलेख मात्र बौद्धिक प्रदूषण और मोदी जी के विश्वपटल में बढ़ते रुतबे से उत्पन्न खीज और कांग्रेस और कांग्रेसी विचारधारा के पतन का रोष मात्र है। लेखक को भ्रष्टाचार-नियंत्रण, वैश्विक स्तर पर भारत का विकास, और लोगों में जगती राष्ट्रवादिता अत्यन्त असहनीय लग रहें हैं। और ऐसे प्रमाण रहित केजरीवालिये आरोप लगाना और बाद में क्षमापत्र लिखना शायद इनकी भी आदत में हो सकती है।

    लेकिन लेखक ने ये तो सिद्ध किया कि इससे पहले जो लुप्तधर्म, अप्रकट कर्म, अभिमानपूर्ण लोग शासन कर रहे थे वो हिन्दू नहीँ थे। इसी से मोदी जी के शासन का सामर्थ्य सिद्ध होता है।

    ।।ये आलेख मात्र एकपक्षीय खीज से उत्पन्न बौद्धिक प्रदूषण मात्र है।।

    ।।अकारणाविष्कृत-वैर-दारुणादसज्जनात् कस्य भयं न जायते।।
    ।।कटु क्वणन्तो मलदायका खला:।।

  19. Lgta hai kuchh hinduo ko apne aap ko hindu kahlana bura lgta hai tsbhi to unke adarsh hai aludfin khilji .ihd gori moinufdin chisti doob mro

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