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UP: निर्दलीयों के पीछे घिसटती बीजेपी का चुनावी प्रदर्शन दिखाने से मीडिया क्‍यों डर गया?

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अमरेश मिश्र

भारत को अंबानी, अडानी, विदेशी पूंजी के हाथों बेचने और नोटबंदी को एक तरफ़ रख दें। यह इन सबसे बड़ा घोटाला है। जब हमारे जवान सरहद पर मारे जा रहे थे और नवाज़ शरीफ़ के साथ मोदी चाय पी रहे थे, उसके मुकाबले भी यह बड़ा घोटाला है। आपने बूथ लूटने के बारे में तो सुना होगा लेकिन जब एक चुनाव के परिणामों को जनता से छुपा लिया जाए और एक अंश को पूरे नतीजे के रूप में दिखाने की कोशिश की जाए, तो आप इस घोटाले को क्‍या नाम देंगे?

जहां एक समानांतर झूठी ‘वास्‍तविकता’ को गढ़ा जाता है ताकि सच्‍ची ‘वास्‍तविकता’ को ध्‍वस्‍त किया जा सके!

बीजेपी की शहरी केंद्रों की 16 सीटों में 14 पर जीत को विजय घोषित किया जा रहा है। कहां हैं शेखर गुप्‍ता, प्रताप भानु मेहता, कहां हैं अभिसार शर्मा और कहां है वो आदमी… प्रणय रॉय? राजदीप सरदेसाई कहां हैं… अरविंद केजरीवाल कहां हैं। कहां हैं राधिका रामशेषन, बरखा दत्‍त… कहां छुपे हो आप लोग? किस बात का डर है?

आपमें से किसी के पास भी इतनी हिम्‍मत नहीं हुई कि जनता के सामने यूपी के नगर निकाय चुनावों के सही नतीजे कम से कम रख दिए जाएं।

कल पूरे दिन मीडिया तथ्‍यों के साथ बलात्‍कार करता रहा और लगातार दिखाता रहा कि बीजेपी ने 16 में से 14 जगहों पर नगर निकाय चुनाव जीत लिए हैं। एक शब्‍द भी नगर परिषद और नगर पंचायत के बारे में नहीं बोला गया।

असली आंकड़े यहां देखें:

नगर पंचायत (टाउन एरिया) अध्‍यक्ष : 438
निर्दलीय: 182
भाजपा: 100
सपा: 83
बसपा: 45
कांग्रेस: 17
आम आदमी पार्टी: 2
राष्‍ट्रीय जनता दल: 2
राष्‍ट्रीय लोक दल: 2
एआइएमआइएम: 1
एआइएफबी: 1
अमान्‍यता प्राप्‍त दल: 2
नगर पालिका परिषद अध्‍यक्ष : 198
बीजेपी: 70
सपा: 45
निर्दलीय: 43
बसपा: 29
कांग्रेस: 9
सीपीआइ: 1
तदर्थ पंजीकृत पार्टी: 1
नगर निगम अध्‍यक्ष: 16
भाजपा: 14
बसपा: 2
और आगे देखते हैं…

कुल 652 सीटों में भाजपा को मिली हैं 184 सीटें जबकि सबसे ज्‍यादा सीटें निर्दलीयों के खाते में आई हैं।

652 में निर्दलीय 225 जीते हैं और इस तरह सबसे बड़े विजेता समूह के रूप में उभरे हैं।

समाजवादी पार्टी इस मामले में 652 में से 128 सीट लाकर तीसरे स्‍थान पर है।

बसपा 652 में से 76 सीटें लाकर चौथे स्‍थान पर है।

मतदान 52.4 फीसदी था यानी मोटे तौर पर 4 करोड़ से कुछ ज्‍यादा वोट पड़े।

2.65 करोड़ वोट 438 नगर पंचायतों में पड़े। 35 लाख वोट 16 कॉरपोरेशन में पड़े और एक करोड़ वोट 198 नगर पालिका परिषदों में पड़े।

बीजेपी ने 16 निगमों में से 14 में जीत हासिल की। सभी 16 सीटों पर बीजेपी को 87 फीसदी वोट पड़े और बसपा को 12.5 फीसदी… इस तरह 35 लाख वोटों का 87 फीसदी बनता है करीब 30 लाख वोट।

नगर पालिका परिषद में बीजेपी की जीती 70 सीटों को मिले हैं 35.5 फीसदी वोट। समाजवादी पार्टी को 22.5 फीसदी और बसपा को 14.65 फीसदी वोट जबकि कांग्रेस को पड़े हैं 4.5 फीसदी वोट। निर्दलीयों को कुल पड़े वोटों का 21.72 फीसदी हासिल हुआ। इस तरह नगर पालिका परिषद के कुल एक करोड़ वोटों के मतदान में बीजेपी के हासिल 35.5 फीसदी वोट का मतलब बनता है 35 लाख वोट…

नगर पंचायतों में पड़े हैं कुल 2.65 करोड़ वोट। बीजेपी को 438 में से महज 100 सीटें मिली हैं जिसका मतलब है कि उसे इस श्रेणी में केवल 22 फीसदी वोट मिले हैं। निर्दलीयों को इस श्रेणी में 41.55 फीसदी वोट मिले, सपा को 18.95 फीसदी, बसपा को 10.27 फीसदी और कांग्रेस के वोट रहे 3.88 फीसदी।

तो मोटे तौर पर गिन लें कि 2.5 करोड़ का 22 फीसदी कितना बैठता है? करीब 58 लाख… और 2.5 करोड़ का 41.55 फीसदी कितना बनता है? 1.7 करोड़…।

तो कुल मिलाकर बीजेपी को 4 करोड़ वोटों में से 1 करोड़ 23 लाख वोट आए हैं। यह कुल वोटों का 30 फीसदी बैठता है।

इसका मतलब यह हुआ कि आज अगर यूपी में चुनाव हो जाएं तो बीजेपी को 30-34 सांसदी की सीटें और 158-162 असेंबली की सीटें आएंगी। बस…।

बिलकुल यही खेल गुजरात में होने जा रहा है…

बीजेपी को गुजरात में 30 से 33 फीसदी वोट पड़ने वाले हैं जिसका मतलब यह है कि उसकी सीटें गिरकर 60 के नीचे आ जाएंगी।

इस समूची गणना में मैंने नगर निगम के नतीजों में हुई भारी हेरुेर, खराब ईवीएम और दूसरी गड़बडि़यों को शामिल नहीं किया है।

दरअसल, बीजेपी को यूपी में आम आदमी की बगावत झेलनी पड़ी है। ब्राह्मण, मुस्लिम, यादव और दलितों ने मोटे तौर पर बीजेपी के खिलाफ अपना वोट दिया है।

कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो बीजेपी बस्‍ती, गोंडा, चित्रकूट, इलाहाबाद, मिर्जापुर, बाराबंकी, आज़मगढ़, जौनपुर, कौसाम्‍बी, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, फिरोज़ाबाद इत्‍यादि में सभी सीटें हार गई है। अमेठी की सीट तो पिछली बार भी बीजेपी के पास थी, इसलिए इसमें कोई आश्‍चर्य नहीं है।

यह नुकसान योगी के लिए बड़ा झटका है… आप सेाचिए कि बीजेपी निर्दलीयों के पीछे घिसट रही है। यही रुझान यूपी में नई ताकतों के उभार का संकेत है।


दि मिल्‍ली गजेट से साभार

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