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मीडिया की दिलचस्पी नहीं कि कौन उद्योगपति मरवाना चाहता था अमर सिंह को !

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कुछ दिनों से दिल्ली के राजनीतिक हलकों में दम साध कर एक पर्दाफाश का इंतज़ार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल का दावा है कि एक टेलीकॉम कंपनी ने पीएमओ तक में सेंध लगाकर तमा राजनेताओं, उद्योगपतियों और वरिष्ठ नौकरशाहों का अरसे तक फोन टेप किया। इन्हीं टेप में एक जगह देश के एक भारी-भरकम उद्योगपति को मोटे (अमर सिंह) को निपटाने (मार देने) की बात कहते सुना जा रहा है।

इंडिया डॉयलॉग वेबसाइट इसे आज़ाद भारत का सबसे बड़ा ख़ुलासा बता रही है जो जल्दी ही हो सकता है। उसके मुताबिक यह भारत में क्रोनी कैपटिलिज़्म का ऐसा प्रमाण है जो बताता है कि देश को किस कदर खोखला किया जा रहा है। इस संदर्भ में पीएमओ को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कोई सुगबुगाहट नहीं है। उधर, मुख्यधारा का मीडिया भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। नीचे पढ़े वेबसाइट का दावा–

 

                                  कौन मरवा देना चाहता था अमर सिंह को ?

 

यह सूचना आपको व्यथित कर देगी पर यह सच है कि एडवोकेट सुरेन उप्पल के पास जिन टेप्स की चर्चा है उसमें से एक में देश का एक बहुत बड़ा क्रोनी कैपिटलिस्ट यह कहता सुना गया है कि “मोटे को निबटा दो”! “मोटा” अमर सिंह के संदर्भ में कहा गया है इसके साफ़ संकेत विभिन्न वार्ताओं में हैं ।

अमर सिंह उन दिनों इस सेठ के छोटे भाई के अंतरंग हुआ करते थे और दोनों भाइयों की दुश्मनी बेहद भीषण स्तर पर बढ़ चुकी थी ।

अब इंतज़ार रहेगा कि उप्पल जल्द से जल्द इन टेप्स को सार्वजनिक करें और देश इस सरकार विपक्ष न्यायपालिका व सम्मानित लोगों के साझे नेतृत्व वाली पारदर्शी जाँच में सच्चाई से अवगत हो ।

अपराधी धरे जांय और भविष्य में ऐसा असंभव हो इसकी व्यवस्था हो ।

सुप्रीम कोर्ट के एक वक़ील सुरेन उप्पल ने बताया कि एक जून को उनके स्टाफ़ ने दिल्ली के साउथ ब्लाक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय को एक बेहद गंभीर मामले की लिखित सूचना सौंपी है । उन्होंने उसकी पावती भी ली है ।

सूचना के अनुसार उन्होंने लिखा है कि वर्ष २००१-२०११ के बीच एक टेलीकाम कंपनी ने पी एम ओ समेत देश के तमाम बड़े मंत्रियों ,व्यापारियों , बैंकों के चेयरमैनों और अन्य लोगों के फोन अवैध रूप से टेप किये । शुरू शुरू में इसका मक़सद उस टेलीकाम कंपनी के मालिकों के बैंकों में चल रहे भारी क़र्ज़ों का पुनर्गठन कराने के लिये बैंकों के चेयरमैनों की कमज़ोरियों की खोज करना था पर बाद में दायरा बढ़ता गया और वह पी एम ओ तक पहुँच गया ।

हजारों घंटों तक फैली इन टेलीफ़ोन टैपिंग में से करीब पचास घंटे की वाइटल टैपिंग किसी माध्यम से इन वक़ील साहब तक पहुँची है । इनमें देश की तमाम नीतियों को बदलवाने में क्रोनी कैपिटल की भूमिका समेत तमाम आर्थिक राजनीतिक अपराधों का पर्दाफ़ाश है ।

सूत्रों के अनुसार उप्पल साहब की यह शिकायत पी एम ओ के वेबसाइट पर रिफलेक्ट नहीं हो रही है । इस वजह से इन्होंने कुछ दिन बाद दुबारा इसे जमा कराया है और जमा कराने की रसीद ली पर दुबारा यह वेबसाइट से नदारद है ।

उप्पल साहब इस करीब पचास घंटे की रिकार्डिंग्स को ट्रांसक्राइब कर रहे हैं और शीघ्र ही प्रेस क्लब में इसे “आम” करने वाले हैं