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‘कॉपी-पेस्ट’ पत्रकारिता ने हिसार के दुष्यंत चौटाला को बना दिया सिरसा का सांसद !

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दीपांकर पटेल

15 दिसम्बर को ऑनलाइन मीडिया में गलती का एक अजीबोगरीब पैटर्न बनाता चला गया। जो टीवी तक जा पहुंचा। ये सब फटाफट, कॉपी-कट करने की बढ़ी आदत के कारण हुआ।

हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला को कुछ ऑनलाइन मीडिया पोर्टल ने सिरसा का सांसद लिखना शुरू कर दिया।

दरअसल दुष्यंत चौटाला ट्रैक्टर में सवार होकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने सरकार के एक नोटिफिकेशन का विरोध करने के लिए ऐसा किया था। सरकार ने हाल ही में एक नोटीफिकेशन जारी करके सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1889 में संशोधन करके नया सेंट्रल व्हीकल (अमेंडमेंट) रूल्स 2017 बनाया है, जिसमें ट्रैक्टर को नॉन ट्रांसपोर्ट व्हीकल की श्रेणी से हटाकर ट्रांसपोर्ट व्हीकल की श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे ट्रैक्‍टर की कीमत तो बढ़ेगी ही ट्रैक्‍टर मालिकों पर टैक्‍स का बोझ भी बढ़ जायेगा । इसी का विरोध करने के लिए दुष्यंत चौटाला ने ये तरीका अपनाया।

बेशक ये न्यूज मटेरियल है, लेकिन इसे भी संसद कवर करने वाले पत्रकारों ने इवेंट कवरेज की तरह लिया। ट्रैक्टर आगे चार और पीछे चार वाली स्टाइल में मीडिया वैन दौड़ने लगी।

और उधर क्यूबिकल में बैठे क्लिक-बोट और कॉपी-पेस्ट पत्रकारिता के धुरंधरों ने चौटाला का संसदीय क्षेत्र कन्फर्म करने के लिए विकिपीडिया तक जाने की भी जहमत नहीं उठाई और दुष्यंत चौटाला को सिरसा से सांसद लिखना शुरू कर दिया।

सिरसा और हिसार दोनो जगहों पर INLD के सांसद हैं, हिसार से दुष्यंत चौटाला जबकि सिरसा से चरणजीत सिंह रोड़ी सांसद हैं। दोनो जगहों पर INLD के सांसद होने के कारण किसी से शुरूआत में ये गलती हुई होगी।

लेकिन IndiaSamvad Amarujala Pradeshtoday.com और Dainik Bhaskar जैसी वैबसाइट्स ने 15 घण्टे बाद भी इस गलती में सुधार नहीं किया। ये सिलसिला यहीं नहीं रुका News Nation ने तो प्राइम टाइम (9-10PM) स्लाट में यही गलती कर दी।

फैक्ट्स चेकिंग पत्रकारिता का सबसे मूल सिद्धान्त है, लेकिन रफ्तार और दिन में 10 स्टोरी फाइल करने के दबाव ने इसे चौपट कर दिया है।

दुनियाभर की समझ रखने का दावा करने वाला पत्रकार काम के दबाव में फैक्टचेकिंग का सबसे बेसिक काम इसलिए नहीं करता क्योंकि वो ये सोच लेता है कि किसी ने तो चेक किया ही होगा, इसे चेक करके वक्त क्यों जाया किया जाय।

इस तरह एक न्यूज पोर्टल की गलती सैकड़ों की गलती बन जाती है और करोड़ों लोगों तक गलत तथ्य पहुंचता है।ये सिर्फ एक नमूना है ऐसा आये दिन होता ही रहता है ज्यादातर तथ्यात्मक गलतियां तो पकड़ में ही नहीं आती।

गलती कोई गुनाह नहीं है, लेकिन जब इस तरह से गलती का खास पैटर्न बनता दिखता है तो चिन्ता होती है। ये गैर पेशेवर तो है साथ ही ये आपके पाठक के भरोसे को भी कम करता है।

आपकी वेबसाइट पर 10 मिनट लेट गई खबर से आपका ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन एक गलत फैक्ट आपको और रीडर दोनों को नुकसान पहुंचता है।

 

 

 



 

 

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