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न बयान, न विज्ञप्ति! EVM हैक करने की चुनौती देने वाला ECI का ‘आधिकारिक सूत्र’ भला कौन है?

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गुरुवार 13 अप्रैल, 2017 की सुबह सभी अख़बारों और बीती रात सभी टीवी चैनलों की सबसे बड़ी ख़बर थी कि ”चुनाव आयोग ने मई के पहले सप्‍ताह में ईवीएम को हाइजैक करने की खुली चुनौती दी है।” किसी ने लिखा कि यह ‘खुली चुनौती’ या ‘ओपेन चैलेंज’ अरविंद केजरीवाल को दिया गया है, तो किसी प्रकाशन ने सभी विपक्षी दलों को दी गई चुनौती बताया। आइए, ज़रा विस्‍तार से नज़र डालें कि अलग-अलग मीडिया संस्‍थानों ने इस ख़बर को कैसे रिपोर्ट किया:

The Hindu: ‘ईवीएम को हाइजैक करने की चुनौती’ संबंधी केवल ख़बर है। चुनौती कैसे दी गई- क्‍या कोई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस हुई, कोई बयान, किसी का हवाला, चुनौती किसने दी, यह सब सूचना ख़बर में नदारद है। बस इतना कहा गया है कि चुनाव आयोग ने चुनौती दी है।

अमर उजाला: इस अख़बार ने पहले पैरा में लिखा है, ”चुनाव आयोग ने उन लोगों को ओपन चैलेंज देने का मन बनाया है, जिन्हें लगता है की ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती है। यह चैलेंज मई के पहले हफ्ते में होगा।  चुनाव आयोग ने इस संबंध में विज्ञानी, टेक्नोक्रेट और राजनीतिक दलों को खुला चैलेंज में आने के लिए कहा है।” ख़बर के स्रोत के रूप में PTI का ट्वीट दिया गया है।

ABP News: ख़बर ‘आधिकारिक सूत्र’ के हवाले से लिखी गई है।

Aaj Tak: यहां भी ख़बर ‘आधिकारिक सूत्र’ के हवाले से लिखी गई है।

India TV: यहां भी ख़बर ‘आधिकारिक सूत्र’ के हवाले से लिखी गई है। यह इकलौती ख़बर है जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान का एक बयान ‘खुली चुनौती’ को प्‍लांटेड ख़बर बताते हुए दिया गया है जिसमें वे पूछते हैं, ”क्‍या चुनाव आयोग ने कोई प्रेस रिलीज़ जारी की है या यह उसका आधिकारिक बयान है? क्‍या एमसीडी चुनाव से पहले ऐसी ख़बर प्‍लांट करने का यह प्रयास है? हम इस पर चुनाव आयोग से एक आधिकारिक बयान की मांग करते हैं।”

Zee News: यहां भी ‘आधिकारिक सूत्र’ के हवाले से ख़बर है, लेकिन ‘चुनौती’ केजरीवाल को दी गई बताई गई है।

New Indian Express: सभी राजनीतिक दलों को दी गई ‘चुनौती’ लिखा गया है। समर्थन में 2009 की चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति चिपका दी गई है। Indian Express का हवाला दिया गया है।

India Today: सीधे चुनाव आयोग के हवाले से ख़बर है, 2009 में ऐसा हुआ था यह बताया गया है।

Hindustan Times: Indian Express का हवाला दिया गया है। स्रोत ‘अनाम’ यानी ‘unnamed’ है।

Times Of India: ‘आधिकारिक सूत्र’ का हवाला।

दैनिक जागरण: यह अख़बार सबसे एक कदम आगे जाकर लिखता है, ”’दैनिक जागरण’ ने रविवार को प्रकाशित अपनी खबर में पहले ही बता दिया था कि चुनाव आयोग मशीनों के साथ छेड़छाड़ के आरोपों को साबित करने का विशेष मौका दे सकता है। अब आयोग ने यह भी तय कर लिया है कि वह अगले महीने के पहले हफ्ते से ही इसकी शुरुआत कर देगा। अधिक से अधिक लोगों को यह मौका मिल सके, इसलिए वह लगातार एक हफ्ते या उससे भी अधिक समय तक यह मौका उपलब्ध करवा सकता है। तारीख तय होते ही आयोग विज्ञापन जारी कर इसके लिए लोगों को आमंत्रित कर सकता है।” ख़बर में किसी का बयान, स्रोत या सूत्र नहीं है।

Business Standard: पूरी ख़बर बिना किसी स्रोत के लिखने के बाद नीचे डिसक्‍लेमर दिया गया है: This story has not been edited by Business Standard staff and is auto-generated from a syndicated feed.

ANI: चूंकि इस एजेंसी से ही सारे समाचार चैनल अपनी फीड लेते हैं, लिहाजा इसकी ख़बर सबसे अहम है। जो ख़बर यहां चल रही है, उसमें न किसी का बयान है, न कोई सूत्र। सीधे लिख दिया गया है कि ”चुनाव आयोग ने बुधवार को दलों के नेताओं को खुली चुनौती दी है कि वे ईवीएम हैक कर के दिखाएं”। सभी चैनलों ने इस ख़बर को जस तस उठा लिया और चला दिया। चूंकि इसमें किसी का बयान नहीं था, तो चैनलों की ख़बरों में भी कोई पुष्टि करने वाली बाइट मौजूद नहीं थी।

सवाल जायज़ है- क्‍या ‘ईवीएम हैक करने की चुनाव आयोग की दी गई चुनौती’ की ख़बर प्‍लांट कराई गई है? क्‍या पीटीआइ और एएनआइ ने मिलकर ऐसा किया है? अगर वाकई यह ख़बर सच है तो कोई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस क्‍यों नहीं की गई, कोई रिलीज़ जारी क्‍यों नहीं की गई, मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त की ओर से कोई बयान क्‍यों नहीं आया और सबसे बड़ा सवाल उन मीडिया संस्‍थानों पर है जिन्‍होंने ‘आधिकारिक सूत्र’ के हवाले से ख़बर चलाई है- आखिर वो कौन सूत्र है जो इतने अहम संस्‍थान की ओर से चुनौती जारी कर रहा है और मीडिया उसे चुनाव आयुक्‍त से वेरिफाइ करना ज़रूरी नहीं समझता?

(मीडियाविजिल डेस्‍क)