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जज लोया केस की सुनवाई के दौरान ‘मछली बाज़ार’ बना सुप्रीम कोर्ट !

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गिरीश मालवीय

सोमवार को जब जज लोया के केस में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा “इस कोर्ट में हमें बहस को मछली बाजार के स्तर पर नहीं लाना चाहिए तो उसके बाद से ही मुख्य मीडिया का इस कार्यवाही में इंटरेस्ट दिखाई देने लगा।

आखिर मछली बाजार में होने वाली चिल्लपों ओर अभद्र भाषा अब न्यूज़ देने वाली एजेंसियों में आम हो चुकी है इसलिए जब सुप्रीम कोर्ट मछली बाज़ार का जिक्र हुआ तो मीडिया के भी कान खड़े हो गए और जज लोया के केस की कल की सुनवाई को पिछली सुनवाई की बनिस्बत अच्छा कवरेज दिया गया

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकीलों में तीखी बहस हुई..

दुष्यंत दवे बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की तरफ से बहस कर रहे थे, पल्लव सिसोदिया महाराष्ट्र के जर्नलिस्ट बंधुराज संभाजी लोन की तरफ से पेश हुए, हरीश साल्वे महाराष्ट्र सरकार की ओर से और वी.गिरी कांग्रेस सपोर्टर तहसीन पूनावाला की तरफ से पेश हुए

सुप्रीम कोर्ट में बहस की शुरूआत करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा “आपको मुझे सुनना होगा, मि. दवे। आप तब बोलिएगा जब आपकी बारी आएगी।”
दुष्यंत दवे का जवाब था कि “नहीं, मैं नहीं सुनूंगा। आपको उन लोगों को (पल्लव सिसोदिया और हरीश साल्वे) इस केस में अपीयर होने से रोकना होगा। आपको अपने जमीर को भी जवाब देना है।’

जस्टिस खनविलकर ने दवे को समझाते हुए कहा कि”हमें हमारे जमीर के बारे में शिक्षा ना दें।”इस बीच पल्लव सिसोदिया ने दो विरोधाभासी न्यूज रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा, “इनसे (रिपोर्ट्स) हमारे ज्यूडिशियल सिस्टम की पवित्रता पर सवाल खड़ा हुआ है।”

सिसोदिया ने फिर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया और कहा कि “इसमें (प्रेस कॉन्फ्रेंस) भी मामले की सुवनाई कर रहे एक जज पर खुला आरोप लगाया गया। इन हालात में ये साफ होता है कि स्वतंत्र जांच वन वे ट्रैफिक की तरह नहीं हो सकती है, जिसमें आरोप लगाने वाला मारकर चला जाए… वो भी इस कोर्ट और पूरी ज्यूडिशियरी की प्रतिष्ठा, इज्जत और उसमें विश्वास को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी लिए बिना।”

इस पर दुष्यंत दवे ने कहा कि “अगर वो (जर्नलिस्ट) इस मामले में जांच नहीं चाहते हैं, तो फिर पिटीशन फाइल करने की क्या जरूरत थी। इनकी दलील ने इन्हें बेनकाब कर दिया है। पिटीशन केवल इसलिए दायर की गई ताकि ये निश्चित किया जा सके कि मामला दफन हो गया है’

दुष्यंत दवे ने पल्लव सिसोदिया ओर हरीश साल्वे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि “आप पहले अमित शाह के लिए अपीयर हुए थे और अब पिटीशनर के लिए पेश हुए हैं।”

पल्लव सिसोदिया ने भी तीखा जवाब देते हुए कहा कि “मि. दवे, हमें इसकी फिक्र नहीं कि आप क्या कह रहे हैं। आप नर्क में जाएं या स्वर्ग में… जहां आपकी मर्जी हो।”

इस बीच जस्टिस चंद्रचूड़ ने हस्तक्षेप किया “कोर्ट की गरिमा बनाए रखें और सुनें। आपको जज को सुनना होगा।”

दुष्यंत दवे फिर बोले “मैं नहीं सुनूंगा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया नोटिस जारी कर रही है और मेरे जैसे वकील के आवाज उठाने के अधिकार में बाधा डाल रही है। इन वकीलों (साल्वे और सिसोदिया) को इस मामले में पेश होने से रोका जाए, क्योंकि ये अमित शाह को रिप्रेजेंट कर चुके हैं।”

अदालत ने फिर एक बार दवे को चेताया “शिष्टाचार ही शिष्टाचार को जन्म देता है। कभी-कभी जो शब्द इस्तेमाल होते हैं, वो वकील को शोभा नहीं देते।”

हरीश साल्वे बीच मे कूद गए ओर बोले कि “कभी-कभी शिष्टाचार, शिष्टाचार को जन्म नहीं देता।”

दुष्यंत दवे ने फिर सरकार के कर्तव्यों की बात की ओर बोले कि “सरकार को अपनी जनता की रक्षा करनी चाहिए और केवल इसी के पास जांच कराने के साधन हैं।’

वी.गिरी जो तहसीन पूनावाला की तरफ से पेश हुए थे उन्होंने एक बार फिर महाराष्ट्र स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट की जांच में कथित खामियों का मसला उठाया। कहा, “स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ये नहीं बता पाया कि किस तरह से 1 दिसंबर 2014 की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की तारीख 7 दिसंबर बताई गई।”

इंदिरा जयसिंह भी अपनी दलीलें पेश करने लगी लेकिन बेंच ने फिर अगली तारीख 9 फरवरी शुक्रवार की दे दी



लेखक इंदौर (मध्यप्रदेश )से हैं , ओर सोशल मीडिया में सम-सामयिक विषयों पर अपनी क़लम चलाते रहते हैं ।



 

 

4 COMMENTS

  1. DEAR( SOCALEED) RESPECTED BOURGEOIS JUDICIARY OF INDIA PLEASE SEE enagrik.com, page 4, 1to 15 December and 16 to 31 December, 2017. PLEASE SAVE BOURGEOIS JUDICIARY AT LEAST. DON’T CARE FOR ” HIM”

  2. Shantibhusan named 8 definitely Corrupt chief justices of india. The bhusan openly said it is MachhaliBazar !!! With loya case in court sc have a rare opportunity to regain it’s already lost image.

  3. 80 years before now German Parliament was set to fire (I don’t mean nda government did Parliament attack because not sure ). Here loya case. So to defame communist charge made against Dimitrov etc. So German Parliament or Reichtag case was heard in London parallel manner by legal commission of enquiry. Shouldn’t we do something like that again in some other land. Giving full transparency to case. Providing teleconference facilities for busiest party head of probably largest political party Amit Shah.

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