Home पड़ताल नोटबंदी की तरह जीएसटी भी दु:स्वप्न साबित हुआ है अब तक !

नोटबंदी की तरह जीएसटी भी दु:स्वप्न साबित हुआ है अब तक !

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गिरीश मालवीय

जीएसटी को लागू हुए दो महीने का वक्त बीत चुका है और आम आदमी के लिये जिस तरह से नोटबन्दी विफल साबित हुई है उसी प्रकार जीएसटी भी एक बुरा सपना साबित होने जा रही है

एक व्यापारी के लिए, एक सी ए के लिए जीएसटी तो एक बहुत बड़ा सरदर्द तो साबित हो रही है लेकिन इस लेख में हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि आम आदमी को जीएसटी ने कितना अधिक प्रभावित किया है और सरकार इस बारे में क्या कह रही थी

सरकार का कहना था कि इससे वस्तुओं के दाम कम होंगे महंगाई घटेगी लेकिन इस पर लोकल सर्किल ने एक सर्वे किया है जिसमें लोगों से पूछा गया है कि उनकी रोजमर्रा की ज़िंदगी पर जीएसटी का क्या असर पड़ा। क्योंकि सरकार ने ये दलील दी थी कि जीएसटी से केवल टैक्स नेट ही नहीं बढ़ेगा बल्कि टैक्स का कैसकेडिंग इफेक्ट कम होने के चलते महंगाई भी कम होगी

सर्वे में लोगों से उनके मंथली बिल, राशन, दवाईयां और एंटरटेनमेंट से जुड़ी चीज़ों के बारे में पूछा गया कि आखिर जीएसटी आने के बाद इन चीज़ों पर क्या असर हुआ। इस सर्वे में 40000 से ज़्यादा लोगों ने अपनी राय रखी थी

आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि 54 फीसदी लोगों का मानना है कि जीएसटी के बाद उनका मंथली बिल ओवरऑल बढ़ा है। जबकि, 6 फीसदी लोगों ने कहा कि इससे उनका मंथली बिल कम हुआ है। वहीं, 20 फीसदी भागीदारों का कहना है कि इससे उनके मंथली बिल पर कोई असर नहीं हुआ है  

पिछले 2 महीनों में आपके राशन के खर्च पर क्या असर हुआ? इस सवाल पर 51 फीसदी लोगों का कहना था कि उनका खर्च बढ़ा है। जबकि सिर्फ 7 फीसदी लोगों ने माना कि इससे उनका राशन बिल घटा है। वहीं 26 फीसदी लोगों ने कहा कि इससे उनके राशन बिल पर कोई असर नहीं पड़ा है

पिछले 2 महीनों में आपके मेडिकल बिल पर क्या असर हुआ? इस सवाल पर सर्वे में शामिल 47 फीसदी लोगों ने माना कि खर्च बढ़ा है। जबकि सिर्फ 5 फीसदी ने माना कि खर्च कम हुआ। वहीं 29 फीसदी लोगों ने कहा कि इससे उनके मेडिकल बिल पर कोई असर नहीं हुआ है

आप यह भी जान लीजिए कि बीते पांच माह से लगातार नीचे आ रही थोक महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 1.88 प्रतिशत और खुदरा महंगाई दर 2.36 प्रतिशत हो गयी हैं, यानी अब एक बार फिर से महंगाई बढ़ने की शुरुआत हो गयी हैं

जब जीएसटी लागू की गयी थी तो खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने तो यहां तक कहा था कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए जीएसटी लागू होने के बाद दाम बढ़ने या घटने की स्थिति में वस्तुओं पर नई एमआरपी लिखने का प्रावधान किया जायेगा लेकिन वो होना तो दूर रहा बल्कि जीएसटी लागू होने के बाद 55 शिकायतें उपभोक्ता मंत्रलय को मिली हैं, जिनमें एमआरपी से ज्यादा दाम वसूलने की बात कही गई है।

वस्तुओं के दाम घटाने को लेकर सरकार ने कम्पनियो पर कड़ा रुख अपनाया है ऐसे बड़े बड़े दावे किये गए थे लेकिन इन दावों की पोल खुद उपभोक्ता मंत्रालय ने खोली है उन्ही के दिए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद 50 हजार में से सिर्फ 15 कंपनियों ने ही दाम कम किए। उपभोक्ता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन 15 कंपनियों ने जीएसटी के बाद अपने उत्पादों के दाम कम भी किए हैं, उनमें अधिकतर खेल का सामान बनाने वाली कंपनियां है

आइये अब जीएसटी को अब एक बड़े औद्योगिक परिदृश्य पर समझने की कोशिश करते हैं

हमारे देश मे सेवा क्षेत्र से लाखों लोगों के रोजगार जुड़े हुए है एक बड़ी अर्थशास्त्री पॉलीयाना डी लीमा ने कहा है कि अगस्त में सेवा क्षेत्र ने निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नीचे खींचने का काम किया है, यानी सेवा क्षेत्र भी जीएसटी के बाद बुरा परफॉर्म कर रहा है

वित्तीय क्षेत्र में शोध एवं सलाह देने वाली कंपनी मॉर्गन स्टानली ने अपनी एक रिपोर्ट में बता रही है कि देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उद्योग जगत के मुनाफे की वृद्धि दर 11 प्रतिशत पर आ गई है जो पिछली पांच तिमाहियों में सबसे कम है.
एक बड़ी एजेंसी फिच ने कहा हैं कि जीएसटी संभवत: वाहन, सीमेंट और संगठित खुदरा क्षेत्र के लिये फायदेमंद हो सकती है लेकिन तेल एवं गैस और लघु एवं मध्यम उद्योगों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा

हम लगातार देख रहे हैं कि लघु उद्योग और मध्यम श्रेणी के उद्योगों पर जीएसटी की वजह से तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है ओर बड़े उद्योगों के मुनाफे को भी जीएसटी ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बुरी तरह प्रभावित किया है

यदि एक एक क्षेत्र के व्यापार उद्योग का विश्लेष्ण लेकर अलग अलग भी बैठा कर किया जाये तो भी जीएसटी की व्यवस्था ने उस इंडस्ट्री को किस बुरी तरह से प्रभावित किया है यह साफ़ नजर आ जायेगा कुल मिलाकर कम से कम आज के दिन तो यह कहा जा सकता कि यह नए कर की व्यवस्था जीएसटी भारतीय उद्योग धंधो को तेजी से नुक्सान की तरफ ले जाती दिख रही है



लेखक इंदौर (मध्यप्रदेश )से हैं , ओर सोशल मीडिया में सम-सामयिक विषयों पर अपनी क़लम चलाते रहते हैं ।



 

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