Home पड़ताल GST: सूरत का कपड़ा कारोबार 40% घटा, लाखों हुए बेरोज़गार!

GST: सूरत का कपड़ा कारोबार 40% घटा, लाखों हुए बेरोज़गार!

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गिरीश मालवीय


1 जुलाई को जीएसटी को एक साल पूरा हो गया. जैसी आशंकाएं व्यक्त की गयी थीं इन एक सालों में भारत के छोटे व्यापार उद्योग को इस जीएसटी से बहुत बड़ी चोट पहुंची है. आपको याद होगा कि जीएसटी का सबसे तीखा विरोध गुजरात के सूरत में देखने मे आया था. यह देखना दिलचस्प होगा कि आज सूरत के क्या हालात हैं. जैसे ही जीएसटी का एक साल पूरा हुआ सूरत के कपड़ा कारोबारियों ने इस टैक्स प्रणाली का विरोध करते हुए कपड़ा बाजार इलाके में पकौड़े का स्टॉल लगाया और पकौड़ों के साथ-साथ साथ साड़ियां भी मुफ्त में बांटी. सूरत के 75,000 कपड़ा कारोबारियों में 90 फीसदी लघु एवं मझोले कारोबारी हैं, लेकिन ये ही सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

 

जीएसटी के लागू किये जाने से पहले सूरत में रोजाना 4 करोड़ मीटर सिंथेटिक कपड़े का उत्पादन हो रहा था, जो अब घटकर 2.5 करोड़ मीटर प्रतिदिन रह गया है। रोजगार में भारी कमी आई है। जीएसटी से पहले उद्योग में 17 से 18 लाख कामगार थे। यह संख्या अब घटकर महज 4 से 4.5 लाख रह गई हैं

जीएसटी लागू होने के बाद किसी ने कपड़े का नया कारोबार शुरू नहीं किया है, जबकि जीएसटी लागू होने से पूर्व सूरत में प्रतिमाह 200 नए व्यापारी दुकान शुरू करते थे. खबर के मुताबिक स्थिति यह है कि शहर के एसटीएम, मिलेनियम, आरकेटीएम, अभिषेक, गुडलक, कोहिनूर जैसे कई मार्केटों में 15 से 20 फीसदी किराया कम करने के बाद भी दुकान लेने वाला कोई नहीं है जबकि पहले इन मार्केटों में किराए पर दुकान लेने के लिए वेटिंग लिस्ट रहती थी.

जीएसटी लागू होने के बाद पिछले एक साल में इस शहर के बहुत से पावरलूम मालिकों ने अपना काम-धंधा बंद कर दिया है सूरत में लगभग 6 लाख 50 हजार पावरलूम हुआ करते थे जिनमें से जीएसटी लागू होने के बाद 1 लाख कबाड़ के रूप में बिक चुकी हैं, बहुत से कपड़ा और हीरा कारोबारियों ने दूसरे कारोबारों का रुख कर लिया है

फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव चंपालाल बोथरा ने कहा कि उनका कारोबार 40 फीसदी तक घट गया है

सूरत भारत में बने सभी मानव निर्मित कपड़े का 40% उत्पादन करती है. अब यदि सूरत में असंगठित क्षेत्र की यह हालत हुई है तो आप अंदाजा लगा लीजिए कि भारत के उद्योग धंधों में लगे असंगठित क्षेत्र की क्या हालत हुई होगी शहरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में छोटे मोटे व्यापार करने वालो ने बड़ी संख्या में अपने यहाँ काम करने वालो की छटनी कर दी है, सीए और एकाउंटेंट का खर्च तीन से चार गुना अधिक बढ़ गया है एक साल में जितने दिन नही होते उससे अधिक 375 बदलाव जीएसटी में किये गए है

मलेशिया का जीएसटी जो भारत के लिए आदर्श माना गया था जो हर तरह से भारत से बेहतर तरीके से लागू किया गया तीन सालों में ही वहाँ से वापस ले लिया गया

कुल मिलाकर जीएसटी छोटे व्यापार धंधों को बरबाद कर बड़े कारपोरेट के लिए रास्ता साफ कर देने वाला सबसे कारगर ओजार साबित हुआ है, ओर इसी बात का डर था

 

लेखक आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं।

 

तस्वीर सोशल मीडिया से ।

 



 

1 COMMENT

  1. Who said it was unsuccessful? What else you hope in capitalism. Destruction of petty producers and concentration of capital in fewer hands

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