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2G: सवाल मत उठाइए, उठाइए तो किसी को भनक मत लगने दीजिए, वरना…!

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जितेन्‍द्र कुमार

हमारे सीएजी के पूर्व प्रमुख, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कर्ता-धर्ता, प्रधानसेवक जी के कई-कई बड़ी कमिटियों के अध्यक्ष, प्रधानसेवक जी की सरकार द्वारा ही पद्म भूषण से नवाजित और वर्तमान सरकार के ‘ब्लूआइड बॉय’  विनोद राय ने एक थ्योरी गढ़ी कि 2जी घोटाला 1,76,0000 करोड़ का घपला है। ‘पिंजड़े में बंद तोता’ को लगा दिया गया, कई नेताओं की गिरफ्तारी हुई, कई उद्योगपतियों की हालत पतली हुई, अन्ना हजारे का आंदोलन हुआ, एक तरफ केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तो दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी गुजरात से आकर प्रधानसेवक बन बैठे। अब कल जाकर पता चला कि इसमें कोई दोषी ही नहीं है!

तो क्या कहा जाए कोई घोटाला ही नहीं था वह? लगता तो यही है!

कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि हम शुरू से कहते थे कि यह कोई घोटाला नहीं है, कपिल सिब्बल ने तो यह बात बतौर दूरसंचार मंत्री संसद में कही थी कि 2जी कोई घोटाला ही नहीं है…।

देश के वित्त मंत्री और सबसे बड़े ‘स्पिन डॉक्टर’ अरुण जेटली कह रहे हैं कि कोर्ट का फैसला सही नहीं है (फिर अमित शाह के मामले में जो कोर्ट ने कहा था, वो भी गलत हो सकता है, या फिर नरेन्द्र मोदी को गुजरात नरसंहार में जिस रूप में कोर्ट ने छोड़ा था, वह भी गलत था)।

लेकिन बात इतनी भी छोटी नहीं है और न ही इतनी बड़ी है। चूंकि बात स्तर की है जिसे बड़े लोग अपनी-अपनी सुविधा से देखते और विश्लेषित करते हैं। इसलिए सुविधा के अनुसार बड़े लोगों के काम आ जाता है और हम जैसे बेवकूफ लोग ‘इमोशनल’ हो जाते हैं। किसी भी बड़े लोगों का कल्पना कीजिए और आप पाएंगे कि इसमें सीधे नहीं तो दूर या काफी दूर से लगभग वो व्यक्ति इसमें शामिल रहा है…! नीरा राडिया का टेप आ गया था, 16,000 से अधिक रेकार्डिंग में जिस-तिस का नाम था और क्या से क्या बातें हो रही थीं: निजी से लेकर धंधे तक की।

मजा देखिए। सत्ता परिवर्तन हुआ और ट्राई (TRAI) के रिटायर्ड अध्यक्ष नृपेन मिश्रा को सारे कानूनी प्रावधानों की धज्जियां उड़ाकर प्रधानसेवक जी का प्रधान सचिव बना दिया गया। अब आप अंदाजा लगाइए कि जिस आदमी के कार्यकाल में इतना बड़ा घोटाला हुआ वो आदमी को देश का सबसे बड़ा पदाधिकारी बना दिया गया। प्रधानसेवक जी की मजबूरी देखिए कि वे विदेश-देश की यात्रा और उसके लिए तरह-तरह के परिधान तैयार करवाने में इतने व्यस्त रहते हैं कि उनके पास न्यूनतम समय भी नहीं मिल पाता है और समय की कमी के कारण सभी विभागों को निर्देश कौन दे रहा होगा? वही मिश्रा जी न, जहां पहले तोता पिंजड़े में बंद रहता था जो बाद में हिंसक बाघ बन गया है। और अब होना क्या था!

इसलिए निश्चिंत रहिए। हमारे देश और समाज में सारे ‘नैतिकवान’ लोग बड़े-बड़े पदों पर आसीन हैं। जरा सा गर्दन उठाएगें तो जस्टिस लोया की तरह मार दिए जाएंगे और हिम्मत जुटाकर घटना की जांच की मांग करके थोड़ा सा सुगबुगाएंगे तो एडवोकेट श्रीकांत खंडालकर की तरह ‘आत्महत्या’ करा दी जाएगी!

शांत रहिए…  विकास आ गया है… हिन्दू राष्ट्र बन रहा है… बड़े को पाने के लिए छोटी चीजों की कुर्बानी तो देनी ही पड़ती है। रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, भाईचारा छोटी बातें हैं!

हां, विनोद राय जी के बारे में कोई सवाल मत पूछिए… वो ईमानदारी के प्रतीक हैं, मोदी जी के बारे में मत पूछिए, वे विकास पुरुष हैं और किसी के बारे में कोई सवाल पूछिए ही मत…। सारे सवाल अपने से कीजिए कि यह सवाल पूछना चाहिए या नहीं? और अगर इसका जवाब हां है, तो फिर एक बार यही सवाल और दोहरा दीजिए और गंभीर चुप्पी साध लीजिए… जितने भी सवाल हों वह आपके अपने से होने चाहिए और यह सुनाई नहीं पड़ना चाहिए…. अन्यथा….!


लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं। टिप्‍पणी उनकी फेसबुक दीवार से साभार