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जज लोया ने कहा था- इस्‍तीफ़ा दे दूंगा, खेती कर लूंगा, लेकिन एक गलत फैसला नहीं दूंगा !

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सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई करने वाले जज बृज लोया की 2014 में हुई ‘संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत’ पर दि कारवां की स्‍टोरी की श्रृंखला में यह तीसरी स्‍टोरी है जो शुक्रवार को पत्रिका की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट को आतिरा कोनिक्‍करा ने लिखा है। मीडियाविजिल अपने पाठकों के लिए इस रिपोर्ट का अविकल हिंदी अनुवाद दि कारवां से साभार प्रकाशित कर रहा है। तस्‍वीरें लाइवलॉ डॉट इन और स्‍क्रॉल डॉट इन से साभार हैं – संपादक

आतिरा कोनिक्‍करा । दि कारवां

 

 

बीते 27 नवंबर को लातूर बार असोसिएशन के सदस्‍यों ने लातूर की जिला अदालत से जिला कलेक्‍टर के कार्यालय तक एक मार्च निकाला और जज लोया की मौत की जांच कराने संबंधी एक ज्ञापन सौंपा। दि कारवां को दिए एक इंटरव्‍यू में मरहूम जज के बैचमेट, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता और बार असोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष उदय गावरे ने याद करते हुए बताया कि सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई के दौरान लोया ने उनके समक्ष ”दबाव में होने” की बात स्‍वीकारी थी। गावरे कहते हैं कि उस दौर में ”मैंने पहली बार देखा कि बृजमोहनजी इतने ज्‍यादा तनाव में थे वरना वे आम तौर से खुशमिजाज़ रहते थे।”

मरहूम जज लोया लातूर के निवासी थे। वे वहां बार असोसिएशन के सदस्‍य रह चुके थे और दस साल वकालत कर चुके थे, जिसके बाद उनकी नियुक्ति जज के रूप में हुई। गावरे ने दि कारवां को बताया कि कोर्ट की छुट्टियों के दौरान लोया लातूर आते थे और बार असोसिएशन के अपने पूर्व सहकर्मियों से बात करते थे। गावरे याद करते हैं कि 2014 की दिवाली में लोया जब लातूर आए तब उन्‍होंने कहा था कि सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई में उन पर दबाव पड़ रहा है। गावरे के मुताबिक लोया ने कहा था, ”मैं इस्‍तीफा देना चाहता हूं। मैं गांव जाकर खेती कर लूंगा, लेकिन मैं एक गलत फैसला नहीं दूंगा।”

दि कारवां को जानकारी मिली है कि लोया ने एक और वकील दोस्‍त से इस मसले पर काफी लंबी बातचीत की थी। उनके उस दोस्‍त से जब दि कारवां ने संपर्क किया तो वे बोले, ”मेरे पास तमाम साक्ष्‍य यह दिखाने के लिए हैं कि उनके ऊपर दबाव था।” लेकिन उन्‍होंने आगे कहा, ”मैं इस बारे में केवल किसी जांच अधिकारी के सामने मुंह खोलूंगा।”

Resolution passed by Latur Bar Association, Courtesy Livelaw.in

लातूर बार असोसिएशन की आम सभा ने 25 नवंबर को संकल्‍प पारित किया कि उसने ”एकमत से निर्णय” लिया है कि लोया की मौत से जुड़ी ”संदिग्‍ध परिस्थितियों” में जांच की मांग की जाए। संकल्‍प में बार असोसिएशन ने जज की मौत की जांच ”सुप्रीम कोर्ट/हाइ कोर्ट के एक स्‍वतंत्र आयोग” से करवाने की मांग की है। दो दिन बाद बार के सदस्‍यों ने जिला कलेक्‍टर के दफ्तर तक मार्च निकाला और भारत के राष्‍ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

बार असोसिएशन के ज्ञापन में कहा गया है कि जज लोया की मौत के ”इर्द-गिर्द मौजूद संदेह” ”न्‍यायपालिका के लिए स्‍वस्‍थ स्थिति नहीं है”। ज्ञापन कहता है कि ”न्‍यायिक प्रणाली का हिस्‍सा होने के नाते हम महसूस करते हैं कि प्रासंगिक अवधि में एक जज के बतौर काम करते हुए उनके ऊपर पड़े दबाव और उनकी कथित अप्राकृतिक मौत की पारदर्शी जांच किया जाना अनिवार्य है।”

बार के सदस्‍यों ने बताया कि एक किलोमीटर लंबी पदयात्रा में बार के कुछ सौ लोगों ने हिस्‍सा लिया। मरहूम जज की मौत की संदिग्‍ध परिस्थितियों पर उनके परिवार की चिंताओं को स्‍वर देने वाली निरंजन टाकले की सिलसिलेवार खोजी रिपोर्टों के दि कारवां में प्रकाशन के बाद हुआ निकला मार्च और ज्ञापन कानूनी बिरादरी की ओर से की गई पहली सामूहिक पहल है।

Courtesy scroll.in

बार असोसिएशन अकेले राष्‍ट्रपति को ही ज्ञापन नहीं भेज रहा है। असोसिएशन के अध्‍यक्ष पाटील ने दि कारवां को बताया कि ”ज्ञापन की प्रतियां भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश, बंबई उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश और संसद में विपक्ष के नेता को भी भेजी जाएंगी।” पाटील ने बताया, ”यदि एक स्‍वतंत्र जांच नहीं बैठायी गई तो बार आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा। अगर इसका कोई नतीजा नहीं निकला तो हम उच्‍च न्‍यायालय में एक रिट याचिका डाल देंगे।” गावरे ने भी दि कारवां को बताया कि बार असोसिएशन का संकल्‍प कहता है कि ”एक जांच होनी ही चाहिए…।” ”हम किसी पर उंगली नहीं उठा रहे हैं।”

लोया के बेटे अनुज की बंबई उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश से मुलाकात से संबंधित समाचार- जिसमें उसने कहा है कि उसके पिता की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई और उसे ”न्‍यायपालिका के उन सदस्‍यों में पूरी आस्‍था है जो (लोया) के साथ थे”- के आलोक में लातूर बार असोसिएशन ने 29 नवंबर को प्रतिक्रिया में एक प्रेस वक्‍तव्‍य जारी किया। वक्‍तव्‍य कहता है कि अनुज ”घटना के वक्‍त प्रत्‍यक्ष रूप से मौजूद नहीं था… मौत से जुड़े सवाल अनुत्‍तरित हैं।” इसमें कहा गया है कि ”अगर इस मामले में जांच शुरू होती है, तो उनके परिवार को कई किस्‍म की प्रताड़नाएं झेलनी पड़ सकती हैं। हो सकता है इसी वजह से उसने ऐसा बयान दिया है क्‍योंकि जांच को रोकने के लिए डाले जा रहे दबाव में वह आ गया है।” अनुज की चिट्ठी के संबंध में छपी ख़बर पर गवारे ने दि कारवां से कहा:

लोयाजी का बेटा अनुज फिलहाल अकेला है। उसके पास पूरी जिंदगी पड़ी है। उसकी मां को बाकी जिंदगी जीनी है। उसके पिता के रूप में जो सुरक्षा थी, वह जा चुकी है। ऐसे हालात में अगर रोज़ाना हर कदम पर उसके साथ धोखा हो रहा है और उसके पीछे गुंडे पड़े हों, तो ज़ाहिर है वह यही कहेगा कि जाने दो, पिता से अब क्‍या ही लेना-देना। मुझे जीने दो। चीफ जस्टिस से उसने यही तो कहा है।


यह स्‍टोरी दि कारवां से साभार है। अनुवाद अभिषेक श्रीवास्‍तव ने किया है

6 COMMENTS

  1. What is point in believing HC court, S C judges. Enquiry team must include some retired judges with impeccable record.

  2. कहानी में कहीं भी किसी पारिवारिक सदस्य का ब्यान कयूं नहीं है ?
    एक PIL तो फाईल हो सकती है। अभी तक कयूं नहीं हूई ?
    जवाब जरूर दें।

  3. Anuj beta! Hamne gujarat 2002 kiya. And now we are now at sky. Just above even supreme Court. Where will you go? Accept our blessing ( 500 crore) And forget everything.

  4. godi media I.T.CELL( jo dhamki gali bahas ke disha badalne etc. ke liye) aur diger cheiz banaya gaya hay ye fasist tabkon ka karger gathyar raha hay ALLAH aap sabhon ko maheooz rakkhe.AAMEEN

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